आयुष्मान भारत का छलावा
मेरे 85% मूलनिवासी साथियो,
सोहम, जय गुरुदेव!
जब से भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आई है तब से भारतवर्ष के 85% मूलनिवासियों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए ऐसे ऐसे आकर्षक और लच्छेदार भाषण देने के लिए ऐसे ऐसे शब्दों को खोजा जा रहा है, जिन को सुनने मात्र से ही मूलनिवासियों के मुंह में पानी आ जाता है। जिन अमृत वचनों को सुन कर वंचित गरीबों के मन में उत्साह जागृत हो जाता है, कि भारतीय जनता पार्टी ही भारतवर्ष की गरीबी का अंत कर के गुरु रविदास जी की इच्छानुसार सभी को सम्मान दे कर समान कर देगी, क्योंकि गुरु रविदास जी महाराज ने अपनी वाणी में लिखा है, कि---- ऐसा चाहूं राज मैं जहां मिले सभन्न को अल।
छोटबड़ सभ सम वसै तां रविदास रहे प्रसन्न।
इन दो पंक्तियों को पढ़-सुन कर के सारे विश्व में क्रांतिकारी परिवर्तन आ चुका है मगर भारत में इन क्रांतिकारी विचारों को दफन करने के लिए केवल लच्छेदार भाषा में लोगों को गुमराह किया जाता है। इन क्रांतिकारी विचारों को दफन करने के लिए कांग्रेस, भाजपा, कम्युनिष्ट और अन्य मनुवादी राजनीतिक दल दिन रात केवल 85% मूलनिवासियों को गुलाम बनाए रखने के लिए ही योजनाएं बनाते हैं।
जमीन बंजर रखी हुई है मगर गरीब बेकार:-- बड़ी हैरानी की बात है, कि भारतवर्ष की 50% से भी अधिक जमीन बंजर पड़ी हुई है, जिस पर कोई खेतीबड़ी नहीं की जा रही है। बड़े-बड़े लैंडलॉर्ड लोगों ने अपनी जमीन के ऊपर सफेदा, खैर और चील जैसे पेड़ लगा रखे हैं और काबिले कास्त मैदानी जमीन को रोक रखा है, जिस पर यदि खेतिबाड़ी की जाए तो अरबों-खरबों रुपयों की राष्ट्रीय आमदन हो सकती है, मगर 85% मूलनिवासियों को बेकार रख कर नंगे-भूखे रहने के लिए विवश किया हुआ है और नखटू अमीरों की सेवा के लिए गुलाम सेवक बनाया हुआ है! आजादी के बाद भी पचहतर सालों से इसी तरह धरती का दोहन नहीं किया जा रहा है। मनुवादी सरकारें राष्ट्रीय नुकसान इसलिए सहन कर रही हैं, ताकि भारत के मूलनिवासी भूमिहीन रह कर मनुवादियों के अनाज को खरीदते रहे, उन के लकड़ी और घास को खरीद कर उन के रहमों कर्मो पर जीते रहें!
आयुष्मान भारत योजना:--- भारतीय जनता पार्टी एक ऐसी पार्टी है, जिस का अंदर से दिल काला है और बाहर से देखने में सफेद लगता है। अपने कालेपन को ढकने के लिए ऐसे ऐसे शब्दों को खोजा जा रहा है, जिस से भोलेभाले लोग आकर्षित हो कर के गुमराह हो जाते हैं। इन के शब्दजाल में फंस कर भारतीय जनता पार्टी को सत्ता में लाने के लिए वोट डाल रहे हैं। वर्तमान सरकार ने एक आयुष्मान शब्द का प्रयोग कर के आयुष्मान योजना की घोषणा की हुई है। करोड़ों रुपए इस योजना के प्रचार प्रसार के लिए खर्च कर दिये गए हैं, भारत के कोने कोने में करोड़ों रंगीन फलेक्स लगा दिए हैं, जिन से केवल मात्र भाजपा का प्रचार प्रसार ही किया जा रहा मगर धरातल पर कुछ भी नहीं है।
आयुष्मान योजना के लाभ:---- आयुष्मान नामक सुंदरी योजना के माध्यम से सार्वजनिक अस्पतालों और नेटवर्क प्राइवेट हॉस्पिटलों में परिवार के आकार, लिंग और उम्र से संबंधित किसी भी लिमिटेशन के बिना शोषित, वंचित परिवारों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है और सारे परिवार को पांच लाख रुपये तक बीमा राशि के साथ कवर किया जाता है। सरकार देश के अति गरीब तबके के लोगों का मुफ्त इलाज कराने के लिए भारत प्रधान मंत्री जन आरोग्य योजना चला रही है, जिस से 3.8 करोड़ लोगों का मुफ्त इलाज हो चुका है। इस योजना का मुख्य लक्ष्य है, आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को आर्थिक दृष्टि से संपन्न करना और स्वास्थ्य की दृष्टि से स्वस्थ रखना है। खराब हालत में परिवार के सदस्य की प्रजनन क्षमता में वृद्धि करना। ऋण का लाभ उपलब्ध करवाना, बीमार होने के मामले में भर्ती होने के बाद पूर्ण मुफ्त इलाज करवाना। प्रसव के समय औरतों को नौ हजार रुपये का वित्तीय लाभ भी दिया जाना है, इस प्रकार सरकार का ये मन लुभावन लक्ष्य है कि रोगी महिलाओं के स्वास्थ्य पर विशेष रूप से ध्यान रखा जाए मगर ये सर्वस्व कागजों मे ही है ताकि मुफ्त के नाम पर गरीबों को मूर्ख बना कर कल्याणकारी सरकार कहलाई जा सके।
आयुष्मान योजना का पोस्टमार्टम :----- यदि आयुष्मान योजना का पोस्टमार्टम किया जाए तो यह केवल ख्वाबों में ही जन्नत को दिखाना मात्र है। सरकारी संस्थानों में डॉक्टर नहीं है, स्कूलों में शिक्षक नहीं है और प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों की चमड़ी तक उतारी जा रही है, जिन में गरीबों के लिए तो पहले ही नफरत होती है, शोषित वंचित और गरीब तो इन प्राइवेट अस्पतालों की दहलीज पर पांव रखने से भी कतराते हैं, फिर ऐसे अस्पतालों को आयुष्मान योजना के अंतर्गत शामिल ही क्यों किया गया है। सरकार वंचित परिवारों का नाम लेकर उन को वित्तीय सहायता प्रदान करने की बात करती क्यों करती है? पांच लाख रुपए स्वास्थ्य बीमा का ख्याली पुलाव क्यों खिलाया जा रहा है? जब गरीब लोग इस प्रकार के संस्थानों में जा ही नहीं सकेंगे, तो फिर बीमे से इन गरीब लोगों को क्या मिलेगा यानी जमा जुबानी खर्च हो रहा है।
सरकार वंचित लोगों को मुफ्तखोर क्यों बना रही है :----सरकार मन लुभावने कार्यक्रम शुरू करके वंचित लोगों को गुमराह कर रही है। मुफ्त का इलाज और मुफ्त का बीमा क्यों किया जा रहा है ? क्या यह धन दौलत सरकार के सांसदों प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के निजी खजानों से निकाल कर दिया जाता है? जिस को मुफ्तखोरों में बांट दिया जाता, ऐसा क्यों नहीं किया जा रहा है? कि सभी वंचित लोगों को रोजी रोटी के ही साधन उपलब्ध किये जाएं, छोटी मोटी नौकरी दे कर इन को आत्मनिर्भर बनाया जाए, ताकि ये मुफ्तखोर ना बन सकें और मुफ्तखोरी के ऊपर अपना जीवन बसर ना कर सकें, मगर मनुवादी सरकारें 85% मूलनिवासियों को जानबूझ कर आत्मनिर्भर नहीं बनाना चाहती है, ताकि ये लोग आत्मनिर्भर हो कर अपने पाँव पर खड़े ही ना सकें, कहीं मनुवादियों के बराबर सांस्कृतिक, धार्मिक, राजनैतिक, सामाजिक जागृति उत्पन्न हो ही ना सके, बस मुफ्तखोर बना कर के अपने सेवक बनाए रखना ही, इन का एक मात्र लक्ष्य है, जिस गुप्त छल को 85% मूलनिवासियों को समझाना चाहिए और मुफ्तखोर बनने से परहेज करना चाहिए और ना ही आयुष्मान जैसी मन लुभावनी योजनाओं का लाभ लेना चाहिए, क्यों कि मुफ्त का खाना मनुष्य को हरामी ही बनाता है, नर्क की ओर धकेलता है, जो लोग कड़ी मेहनत कर के हक हलाल की कमाई खाते हैं, उन के बच्चे भी बुद्धिमान और लायक होते हैं और वही सफलता प्राप्त कर के जीवन को सुनहरा बनाते हैं। मुफ्तखोरो को इसी धरती पर अपना हिसाब किताब देते समय कुत्ते की मौत मरना पड़ता है, इसलिए मूलनिवासियों को मनुवादियों की छल कपट पूर्ण योजनाओं को समझ कर इन्हें सत्ता से वंचित कर देना चाहिए और भिखारी नहीं बनना चाहिए।
इन कागजी योजनाओं को केवल बहुजन मुक्ति पार्टी ही खत्म कर सकेगी। केवल यही पार्टी वंचित, शोषित लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए रोजगार और ज़मीन उपलब्ध करवाएगी और हक हलाल का खाना खाने के लिए साधन उपलब्ध करवाएगी, इसलिए मूलनिवासियों को मनुवादी राजनीतिक दलों को किक मार कर के अपने पांव पर खड़ा होने के लिए बहुजन मुक्ति पार्टी को ही सत्ता में लाने का प्रयास किया जाना चाहिए।
रामसिंह आदवंशी।
महासचिव,
बहुजन मुक्ति पार्टी हिमाचल प्रदेश।
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