बहुजन मुक्ति पार्टी झूठी गारंटी नहीं देगी
मेरे 85% मूलनिवासी साथियो,
सोहम्, जय गुरुदेव!
मनुवादी राजनीतिक पार्टियां चुनाव जीतने के लिए, भारत के 85% मूलनिवासियों को अपने जाल में फंसाने के लिए अनेकों प्रकार के मन लुभावने लालच से भरी हुई घोषणाएं करती हैं। झूठे वायदे कर के वोट लेने का षड्यंत्र करती आई हैं। कांग्रेसी प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी ने अपने समय में एक नारा दिया था, "गरीबी हटाओ, देश बचाओ" मगर इंदिरा गांधी मर गई मगर गरीबी नहीं हटी, बल्कि गरीबों को ही पर्दे से हटाया जाने लगा था। इसी तरह भारतीय जनता पार्टी ने भी कई नारे दिए जिन में से एक है "सब का साथ, सबका विकास" भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी भी सर्वहारा की बात करती आई है और नारा लगाती फिरती है " धन धरती बंट कर रहेगी" कम्युनिष्ट राज खत्म भी हो गया मगर धन धरती अमीरों के ही पास रही, ये भी हरे घास में हरे सांप ही निकले और अंततः मिट्टी में मिल गए। इन्हीं छ्ली कम्युनिस्टों के स्थान पर पश्चिमी बंगाल में सुश्री ममता बनर्जी, उतर प्रदेश में सुश्री मायावती और दिल्ली प्रदेश में क्लीन मैंन केजरीवाल ने नई पार्टियां बना कर नई नई सरकारें बनाई मगर इन्होंने भी अपने मंत्रिमंडल में 80% मंत्री ब्राह्मण ही रखें। कांग्रेस, भाजपा अन्य लोकदल की सरकारें भी यही करती आई है। केंद्रीय सरकार में तो हमेशा से ही अस्सी प्रतिशत ब्राह्मणों को ही प्रतिनिधित्व देकर के मंत्री बनाया जाता आया है, फिर आप अनुमान लगा सकते हैं, कि सभी मनुवादी राजनीतिक दलों ने किस की गरीबी दूर की? किस किस को अमीर बनाया? किस किस को खानाबदोश ही रखा है? कांग्रेस ने कभी भी गरीबी दूर करने का कोई ठोस कार्य शुरू नहीं किया। सन 1947 में मुसलमान चार लाख एकड़ जमीन खाली छोड़ कर चले गए थे। जब इस जमीन को भूमिहीन मूलनिवासी लोगों को बांटने की बात की गई, तो पंजाब के जाट सिखों, ब्राह्मणों, राजपूतों, वैश्यों ने अपने राजनेताओं को वश में कर के कहा था, "कि यदि अछूतों को जमीन दे दी गई, तो फिर हम भूखे मर जाएंगे और हम चोरी करने के लिए विवश हो जाएंगे, शूद्र लोग हमारे घरों में काम नहीं करेंगे, जब यह परेशानी तत्कालीन कानून मंत्री सरदार प्रताप सिंह कैरों ने तत्कालीन प्रधान मंत्री जवाहर लाल नेहरू को बताई तो उस ने भी मनुवादियों के षड्यंत्र को समझ कर भी कोई कार्यवाही नहीं कर सका था, जिस बहकाबे में आ कर के नेहरू ने चार लाख एकड़ जमीन नहीं बांटी और बाद में लैंड सीलिंग एक्ट भी बनाया गया मगर राजपूत राजाओं ने मुख्यमन्त्री पदों पर अधिपत्य जमा लिया और लैंड सीलिंग एक्ट को लागू नहीं होने दिया। बेईमान राजाओं ने भूमिहीन मूलनिवासी जनता के पेट में लात दे मारी, जब कि इन्हीं 85% गरीब मूलनिवासियों के वोट ले कर के ये बेईमान राज करते रहे।
जो जमीन सरकारी है, वो हमारी है:--- जब बेसहारा, भूमिहीनों के मसीहा मान्यवर साहिब कांशी राम जी का राजनीति में अवतार हुआ तब उन्होंने देश में ये नारे लगाए कि:---
"जो जमीन सरकारी है, वह हमारी है*
*वोट हमारा राज तुम्हारा नहीं चलेगा, नहीं चलेगा*
*जो वहुजन की बात करेगा, वह दिल्ली से राज करेगा*
*मंडल कमीशन लागू करो, वरना कुर्सी खाली करो*
तब कांग्रेस की कुंभकरणी नींद खुली, कि अब तो हमारी कुर्सी गई। पहले तो इन ढोंगी लोगों ने मान्यवर कांशीराम जी को लालच देकर राष्ट्रपति बनाने का भरसक प्रयास किया, ताकि मान्यवर जी कांग्रेस की गुलामी स्वीकार कर के वहुजन क्रांति को रोक सकें मगर साहब कांशीराम जी ने कांग्रेस पार्टी की सरकार के षड्यंत्र को समझ कर राष्ट्रपति बनना स्वीकार नहीं किया और मनुवादी ब्राह्मणी शासन के खिलाफ अपना अभियान जारी रखा, तब कांग्रेस ने भयभीत हो कर एक एक एकड़ जमीन मूलनिवासी लोगों को देने का काम शुरू किया था मगर वह भी अछूत लोगों को उबड़ खाबड़ और बेकार की चट्टानों वाली जमीन दे कर के आदिवासियों को मूर्ख बनाने की ही कोशिश की थी।
क्षेत्रीय राजनीतिक दलों का छल कपट:---- जब मान्यवर साहिब काशीराम के क्रांतिकारी नारे सारे देश में गूंजने लगे और कांग्रेस पार्टी का विनाश होने लगा, तब छ्ली मनुवादियों ने समझ लिया, कि अब कांग्रेस सरकार मर कर जिंदा नहीं हो सकती है, इसलिए कई राज्यों में क्षेत्रीय दल तैयार किए गए, जिन में असम गण परिषद, तृणमूल कांग्रेस और आप पार्टी जैसे राजनीतिक दल उभारे गए। 85% मूलनिवासी भी इन सभी राजनीतिक दलों के बहकावे में आ गए, उधर ब्राह्मणों के षड्यंत्र में शामिल हो कर मायावती ने साहब कांशीराम के आंदोलन को भी मिट्टी में मिला दिया, इसी कारण 85% मूलनिवासियों को क्षेत्रीय दलों के साथ चलना पड़ा, इन लोगों ने भी गरीबी दूर करने की गारंटी ही दी, गारंटी देने के सिवाय कुछ नहीं किया, जिस लकीर पर कांग्रेसी चलते रहे, उसी पर ही ये दल भी चलते गए। ये नये राजनीतिक दल कांग्रेस और भाजपा से भी अधिक खतरनाक सिद्ध हुए। इन लोगों ने भी वही रास्ते अपनाए जिन पर इन के पूर्वज चलते आए हैं।
बहुजन मुक्ति पार्टी की गारंटी:--- राष्ट्रीय बहुजन मुक्ति पार्टी एक ऐसी पार्टी है, जिस के नेता मान्यवर वामन मेश्राम, कमलकांत काले, बीएल मातंग जी ब्राह्मणवाद के मनुस्मृतिबाद, मनुवाद, ब्राह्मनबाद, जातिबाद, धोखाबाद, छलबाद, कपटबाद, अन्यायबाद, झूठबाद के खिलाफ जन आंदोलन करती आ रही है, इस पार्टी का मुख्य लक्ष्य 85% मूलनिवासियों को ही नहीं अपितु गरीब मनुवादियों को भी मुख्यधारा में शामिल कर के गरीबी से निजात दिलाना है। सभी जातियों का समान विकास करना, रोजी रोटी और मकान उपलब्ध कराना ही लक्ष्य है। समान विकास के रास्ते पर किसी को भी आड़े नहीं आने दिया जाएगा। धोखेबाज कांग्रेस, भाजपा, तृणमूल कांग्रेस, आप पार्टी, बसपा, सपा, आरजेडी आदि मनुवादी पार्टियों की तरह छल कपट कर के राजसत्ता पर बने रहने का कार्य नहीं करेगी। बहुजन मुक्ति पार्टी की यह गारंटी है, कि बंजर पड़ी हुई धरती को भूमिहीन लोगों में बाँट कर के रोजी रोटी उपलब्ध करवाई जाएगी, प्रत्येक घर से एक व्यक्ति को रोजगार अवश्य ही उपलब्ध करवाया जाएगा, कच्चे कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है, जिसे तत्काल बंद कर दिया जाएगा। गोदामों मे सड़ रहे अनाज को मनुवादी सरकारें सस्ते रेट पर बाँट कर, मूलनिवासी गरीब लोगों को जहरीला राशन खिला कर मार रही हैं, उस जहरीले राशन को बंद कर के रोजगार देकर आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। सरकार बनते ही अस्थाई कर्मचारियों को स्थाई कर दिया जाएगा। पेंशन बंद कर के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के साथ जो अन्याय किया गया है, उस को दूर करने के लिए सभी भूतपूर्व अधिकारियों और कर्मचारियों की पेंशन बहाल कर दी जाएगी। मनुवादियों की तरह कोई भी झूठी गारंटी का बायादा नहीं किया जाएगा, इसीलिए आप वहुजन मुक्ति पार्टी की ही सरकारें बनाई जाएं।
राम सिंह आदवंशी।
महासचिव,
बहुजन मुक्ति पार्टी हिमाचल प्रदेश।
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