गुरु रविदास जी का सेठ करोड़ीमल को उपदेश।।
।।गुरु रविदास जी का सेठ करोड़ीमल को उपदेश।। गुरु रविदास जी ने, करोड़पति करोड़ीमल की, कड़ी परीक्षा लेने के बाद जब दर्शन दिए तब, खुशी के आंसू बहाते हुए करोड़ीमल, गुरु जी के चरणकमलों पर गिर कर कहता है कि, हे मेरे भगवान! मुझे नरक से बचाने वाले, अब मुझे अपनी शरण में ले कर, बख्श लो, मेरी इल्तजा स्वीकार कर लो, मेरे जन्म के फंदनों को काट दो। गुरु रविदास जी सेठ करोड़ीमल को कहते हैं:---- ।। दोहा गुरु जी।। जागण दा अब पता भया, दृढ़ भरोसा राख। अब करम क्या करत हूँ, श्री रविदासजी भाख। गुरु रविदास जी महाराज करोड़ीमल को कहते हैं कि, करोड़ीमल अब जागने का पता लग गया है, अब अज्ञानता का पर्दा आंखों से हट गया है, अब मन में पक्का विश्वासः उतपन्न कर लो। गुरु रविदास जी ने शाह करोड़ीमल को पूछा, तू क्या काम करता है? ।। दोहा लखपति।। अन्न देंवदा जिआं नूँ, ऐह मैं करम कमाई। तुमरे दर्श को लोचदा, हुण दरशन पाई।। गुरु महाराज, जब से आप ने मेरी आंखें खोली हैं, तभी से मैं प्राणियों को अन्न जल दे रहा हूँ, मैं यही कर्म ...