गुरु रविदास जी और सर्वधर्म एकता।।
।।गुरु रविदास जी औऱ सर्वधर्म एकता।।
गुरु रविदास जी महाराज ने, अनुभव किया था कि, विश्व में चल रहे शासकीय, न्यायिक और प्रशानकीय आतंकवाद की जड़ है, केवल और केवल शासकों में धार्मिक भावना का ना होना ही है। ईश्वर एक है, अल्लाह एक है, गाड भी एक है, आदिपुरुष भी वही है, फिर इतने सारे धर्म कहाँ से आ गए? किस लिए, किस के लिए, और क्यों ईजाद किए गए? एक धर्म, दूसरे धर्म के खून का प्यासा क्यों बन गया है? इस्लाम धर्म के फर्माबरदारों ने भारत भूमि को क्यों लहूलुहान कर रखा है ? ईसाई धर्म ने भी सारे संसार को अपनी धरोहर क्यों बना रखा है ? सभी शासक, धर्मो के नाम पर इंसान के खून की नदियों क्यों बहाते जाते हैं? सारे शासक अपने धर्मों के प्रचार प्रसार के लिए, भारत की धरती को खून से क्यों लाल करते जा रहे ? विश्व में जहां एकता, स्नेह, समरसता, सदभावना और सम्मान, होने चाहिए, वहाँ एक दूसरे के जानी दुश्मन क्यों बने हुए हैं?
गुरु रविदास जी महाराज ने, संसार में पनपती हैवानियत के कारणों की जांच बड़ी बारीकी से की थी। उन्होंने उनकी नब्जों को समझा, परखा औऱ पाया कि ये धर्म और धर्मों के ठेकेदारों ने ही, इतिहास में अपना नाम चमकाने के लिए, अमानवतावादी तानाशाही ताकत से विश्व में तवाही मचाई हुई है। जब कि एक ही शक्ति सारे संसार को चला रही है, एक ही विश्व का नियंता है, एक ही मार्गदर्शक है, एक की ही सभी संताने है। फिर ये अनेकेश्वरवाद क्यों ? विश्व अनेक धर्म में क्यों बंटा हुआ है ? विश्व अनेकों ग्रन्थों-पन्थों को क्यों बना कर बैठा हुआ है ? इन्हीं भिन्नताओं और अनेकताओं के कारण एक देश, दूसरे देश का जानी दुश्मन बना हुआ है, जिनकी एकता स्थापित करने के लिए गुरु रविदास महाराज ने कहा:----
मंदिर मस्जिद दोउ एक हैं, इन में कोउ अंतर नाहीं।।
रविदास राम रहीम दोऊ का, झगड़ा भी कोउ नाहीं।।
गुरु रविदास जी फरमाते हैं कि, राम रहीम का कोई झगड़ा नहीं है, सभी मंदिर-मस्जिद भी एक समान हैं, फिर दोनों ही एक दूसरे के दुश्मन क्यों बने हुए हैं ?
रविदास हमरे राम जोई, सोइ हैं रहमान।
काबा काशी जानिए, दोउ एक समान।।
गुरु रविदास जी महाराज फरमाते हैं कि, ये जो मुसलमानों के रहमान हैं, वही तो हमारे राम हैं। काबा काशी दोनो को ही एक बराबर समझो। काबा काशी भी धरती के ही नाम हैं, वहां भी एक निरंकार ही रहता है फिर आपस में भेदभाव क्यों?
मुसलमान सियों दोसती, हिंदुअन सियों कर प्रीत।।
रविदास सभ जोति राम की,सब हैं अपने प्रिय मीत।।
गुरु रविदास जी समझाते है कि, मुसलमानों से मित्रता करो और हिंदुओं से प्रेम। वे फरमाते हैं कि, सभी प्राणियों में राम का ही नूर है, सभी हमारे प्यारे मित्र हैं।
मस्जिद सियों कछु घिन नाहीं, मंदिर सियों नाहिँ पिआर।।
दोउ माहिं अल्लाह अरु राम नाहिँ, कह रविदास चमार।।
गुरु रविदास जी महाराज फरमाते हैं कि, हमें मस्जिद से कोई भी, किसी प्रकार की नफरत नहीं है और ना ही मन्दिरों से किसी किस्म का प्यार है। गुरु रविदास महाराज समझाते हैं कि, किसी भी मन्दिर और मस्जिद में दोनों अल्लाह और राम नहीं रहते हैं, वे तो घट घट में, प्रत्येक जीवात्मा में रहते हैं।
जब सब करि दोउ हाथ पग,दोउ नैन कान।
रविदास पृथक कैसे भये, हिन्दू मुसलमान।
गुरु रविदास महाराज फरमाते हैं कि, जब सारे संसार के, सभी इंसानों के एक समान हाथ, पैर, नाक, कान, आंख हैं तो फिर हिंदू-मुसलमान कैसे दो बन गए ?
कहन सुनन कूं दुई, करि खालिक किओ तमासा।।
हिन्दू तुर्क दोई एकहिं, सत सत भाखै रविदासा।।
कुछ सिर फिरे लोगों ने, कहने, सुनने के लिये हिंदू, मुसलमान बना कर संसार में तमाशा बना रखा है। गुरु रविदास ये सच बताते हैं कि, हिँदू मुसलमान दोनों एक ही हैं।
हिन्दू तुरकन में भेद नाहिँ, सभ में रक्त अरु मास।।
दोउ एकहिं, दूजा कोउ नाहीं, सब पेख्यो रविदास।।
गुरु रविदास जी महाराज फरमाते हैं कि, हिन्दू मुसलमान में कोई अंतर-भेद नहीं है, सभी में एक जैसा खून और मांस है। हमने शूक्ष्म दृष्टि से देखा है कि, दोनों ही एक हैं, दूसरा कोई भी नहीं है।
रविदास पेख्या सोध करि, आदम सबहि एक समान।।
हिन्दू मुस्लिम ईसाई कोउ, स्रष्टा सभ का एक समान।।
गुरु रविदास जी महाराज फरमाते हैं कि, हमने पूरी छानबीन करके देख लिया है, सभी आदमी एक जैसे ही हैं। कोई भी हिन्दू, मुस्लिम नहीं है, सभी का रचयिता ईश्वर, अल्लाह और गाड एक ही है।
रविदास कंगन कनक माहिं, जिमि अंतर कछु नाहिं।
तैसीओ ही अंतर नाहीं, हिन्दूअन सभ तुरकन माहिं।।
गुरु रविदास जी फरमाते हैं कि, जैसे सोने और कंगण में कोई अंतर नहीं है, तैसे ही सभी हिंदू और मुसलमानो भी में कोई अंतर नहीं है।
हिन्दू तुरक माहिं नाहिँ भेद, दुई आयहु इक दुआर।।
प्राण पिंड लोहू मांस हड्ड, एकहि रविदास विचार।।
गुरु जी फरमाते हैं कि, हिन्दुओं और मुसलमानो में कोई भेद नहीं है, दोनो एक ही (दरबाजे) रास्ते से संसार में आए हैं। गुरु रविदास जी महाराज सोच विचार कर फरमाते हैं कि, ये शरीर रूपी पिंड, चमड़ी, मांस और खून और हड्डियों से बना हुआ है।
रविदास उपजई इक नूर ते, ब्राहमण मुल्ला शेख।।
सभ का करता धरता एकहि, सबहि कूं एकहिं पेख।।
गुरु रविदास इस दोहे में मानव जाति को समरस होकर रहने और जीने के लिए उपदेश देते हैं कि, ब्राह्मण, मुल्ला और शेख सभी एक ही प्रकाश से उपजे हुए हैं, जिन्हें एक विधाता ही बनाने वाले हैं, इसलिए सभी को एक ही नजर से देखो।
गुरु रविदास जी महाराज ने, इन सभी दोहों में मानवतावादी, दृष्टिकोण के द्वारा, हिन्दू मुस्लिम एकता पर ही बल दिया है। कहीं भी जातीयता का लेस मात्र भी वखान नहीं किया है। सभी इंसानों को एक ही प्रकाश पुंज से निकली हुई किरणें बताया है। सभी का मालिक एक ही है फिर आपस में खून खराबा क्यों करते हैं ?
स्वामी ईशरदास जी कृत गुरु आदिप्रकाश ग्रँथ, गुरु अर्जुनदेव द्वारा संपादित गुरु ग्रँथ साहिब, वाल्मीकि कृत रामायण, वेद व्यास कृत गीता, वेद और पुराण, चालीस विद्वानों द्वारा संपादित बाईबल है और अबू बकर द्वारा संपादित कुरान है, मिश्रित विद्वानों द्वारा संपादित बाईबल है, सभी धर्मग्रंथों में आदपुरुष, बाहेगुरु, मुहम्मद, राम-रहीम, ईशु आदि को ही सृष्टि के सर्वोच्च स्वामी स्वीकार किए है, तो फिर इन के ये लोग एक ईश्वर के हुक्म को क्यों नहीं स्वीकार करते ? इन सभी वैश्विक मतभेदों को देखते हुए, वैश्विक एकता के लिए, गुरु रविदास जी ने, वैश्विक स्तर पर एक ""पोथिसाहिब"" वैश्विक धर्मग्रँथ, एक ही पंथ औऱ एक वैश्विक सरकार की योजना बनाई थीं, जिसके लिए उन्होंने परम् पूज्य कबीर जी, नामदेब जी, गुरु नानकदेव, सन्त रैदास, सन्त जीवनदास जी महाराज को बुला कर सन्तघाट में आयोजित धर्म सम्मेलन में, योजना का प्रारूप तैयार किया था, ताकि धर्मों को त्यागकर, केवल धर्म को अपनाया जाए और संसार में धार्मिक एकता स्थापित की जाए।
रामसिंह आदवंशी।
अध्यक्ष।
विश्व आदिधर्म मंडल।
सितंबर 26, 2020।
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