Posts

Showing posts from July, 2022

मूलनिवासी राष्ट्रपतियों का अपमान

 मेरे 85% मूल निवासियो, सोहम्, जय गुरुदेव! बड़े दुख की बात है कि हमारे 85% मूलनिवासी लोग अपने साथ घटने वाले अपमान को नहीं समझ पा रहे हैं, जिस के कारण मूल निवासियों का स्वाभिमान रो रहा है, मनुवादियों ने सिंधु घाटी की सभ्यता को समूल नष्ट कर के हमारी सभ्यता, संस्कृति और स्वतंत्रता को खत्म कर दिया था, जिस के साथ ही हमारे दैवीय गुणों से युक्त देवी, देवताओं के इतिहास को भी खत्म करने के लिए, उन के नाम बदल कर के, उन की मूर्तियों को काला कर के, उन के पवित्र मंदिरों को मनुवादियों ने छल कपट, धोखाधड़ी से अपना कर के, अपने कब्जे में कर रखा है| आदि पुरुष से जुगाद का जन्म हुआ है, जिस से धरती के ऊपर मानव जाति और प्राणी जीव जगत का प्रादुर्भाव हुआ है| गुरु रविदास जी महाराज ने अपने मूल मंत्र में इस सत्य को परिभाषित किया है, उन्होंने लिखा है, "इक ओंकार सतनाम कर्ता पुरख निर्भाऊ, निर्वैर अकाल मूरत अजूनी सै भंग, गुरु प्रसाद, आद सच, जुगाद सच, है भी सच, हो सी भी सच" अर्थात आदि पुरुष सत्य है और उस का पुत्र जुगाद भी सत्य है| जुगाद से नील, कैल, चंडूर, मण्डल और कैलाश हुए हैं, जिन की संतान चंवरवंशी सम्राट ...

मूल निवासी अपने ही मूलनिवासी को ही वोट डालें

 मेरे 85% मूलनिवासी साथियो, सोहम, जय गुरुदेव! भारतवर्ष आप का देश है| आप इस देश के मूल निवासी हैं, आप इस देश के मालिक हैं| आद पुरुष से लेकर के आज तक इस देश में आप के ही वंशज अवतरित हुए हैं, मगर 4000 साल पहले यूरेशियन लोगों ने भारत में आ कर के आप के पूर्वजों को छल बल, धोखे से मार काट कर के, आप को गुलाम बना रखा है| आप को पता है, जब किसी को गुलाम बना लिया जाता है, तो सब से पहले उसी जाति का इतिहास खत्म किया जाता है, उस के महापुरुषों का नाम मिटा दिया जाता है, उन के स्मृति चिन्ह मिटा दिए जाते हैं, उन को राक्षस सिद्ध करने के लिए कल्पित कहानियां तैयार की जाती हैं, यही हाल इस देश के मूल निवासी वीर, वीरांगनाओं का हुआ| जब हमारे पूर्वज गुलाम बना लिये गए तो उन की सभ्यता, संस्कृति और इतिहास भी खत्म कर दिए गए| हमारे पूर्वज 1947 तक पूरी तरह ब्राह्मणवाद के खिलाफ आंदोलन करते रहे मगर सफल नहीं हो पाए| आद पुरुष की देवीय शक्ति अपरंपार है, जब मनुस्मृति के काले कानूनों ने, हमारे पूर्वजों के खून बहा, बहा कर निर्दयता की सारी सीमाएं तोड़ दीं, नृशंस हत्याएं होती गई, बलि के नाम पर उन का कत्ल किया जाता रहा, जिस ...

महामहिम राष्ट्रपति द्रोपती मुर्मु जी

 आदरणीय 85% मूलनिवासी साथियो, सोहम, जय गुरुदेव! बड़े हर्ष का विषय है, कि इस वर्ष भी पिछले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की तरह ही अनुसूचित जनजाति "आदिवासी" समाज में से पुन: भारत का राष्ट्रपति 25 जुलाई 2022 को शपथ दिला कर के बना दिया गया है। श्रीमती द्रोपती मुर्मू जी के महामहिम राष्ट्रपति बनने से देश के मूल निवासियों को खुशी तो हुई है मगर इस बात का किसी को कोई भरोसा भी नहीं है, कि वह जिस समाज से राष्ट्रपति बनी है, उस समाज के लिए वह कुछ कर पाएँगी भी या पूर्व महामहिम की तरह ही मूक दर्शक बनी रहेंगी क्योंकि भारत के मनुवादी लोग 85% मूल निवासियों के वोट लेने के लिए राष्ट्रपति तो बनाते आ रहे हैं, यही नहीं अल्पसंख्यकों को भी राष्ट्रपति बनाते आ रहे हैं, अब तो आदिवासी को भी बना दिया गया मगर इन वर्गों से जो राष्ट्रपति बनाए जा रहे हैं, उन से उन की ही जातियों के खिलाफ इन राष्ट्रपतियों से हस्ताक्षर करवा कर के मनुवादी प्रधानमंत्री अत्याचार ढा रहे हैं। जब कांग्रेस ने मुस्लिम और सिख राष्ट्रपति बनाए तो उन्हें मुस्लिमों और सिखों के खिलाफ प्रयोग किया गया। अनुसूचित जाति के राष्ट्रपति बनाए गए, तब भी उन ...

अपने पाँवों पर खड़े हो जाओ

 आदरणीय 85% मूलनिवासी साथियों,  सोहम, जय गुरुदेव! आपको ज्ञात ही है कि भारत में 90 करोड़ लोग मूल निवासी है जिन का धर्म "आदि धर्म" है "गुरु आदि प्रकाश ग्रन्थ " इन का धार्मिक ग्रंथ है। मूल निवासियों का इतिहास अरबों खरबों सालों पुराना है जिस को यूरेशियन आर्यों ने आ कर के छल कपट से समाप्त कर दिया है, जब भारतवर्ष आजाद हुआ तब फिर इन्होंने छल कपट से खुद को तो आजाद लिया मगर भारतवर्ष के मूल निवासियों को नए तरीके से अपना गुलाम बना लिया, भले ही वोट के अधिकार से भारत में लोकतंत्र की स्थापना हो गई है मगर लोकतंत्र को भी इन लोगों ने धत्ता दिखा दिया है और वोट को भी अपना रखैल बना रखा है। जब साहिब कांशीराम ने बहुजन समाज पार्टी बना डाली और कहा कि "वोट हमारा राज तुम्हारा नहीं चलेगा, नहीं चलेगा" उस सत्य को समझ कर के इन लोगों ने मूल निवासियों के जेहन में यह बैठा दिया आप का वोट अगर बहुजन समाज पार्टी को गया तो वह खराब हो जाएगा। ये बहुजन समाज पार्टी के लोग जीतेंगे तो नहीं, मगर आप को मुसीबत में डाल देंगे, इसलिए आप हमें ही वोट दो। 1947 से ले कर आज तक, आपने मनुवादियों को ही वोट डाला म...

आप पार्टी की छल कपट की नीतियाँ।

 मेरे प्यारे 85% मूल निवासियों साथियो, सोहम, जय गुरुदेव! आज भारतवर्ष में आप पार्टी के प्रति लोगों का रुझान बढ़ता जा रहा है। भारत की जनता आप पार्टी के दिवा स्वप्नो को देख कर के इस के प्रति आकर्षित होती जा रही है, मगर भारत की मूल निवासी जनता, इस पार्टी के खतरनाक इरादों को समझ नहीं पा रही है। इस के षड्यंत्रों को अनुभव नहीं कर पा रही है, इस की छल कपट पूर्ण कूटनीति को मूलनिवासी समझ नहीं पा रहे हैं। ये लोग भारत के मूल निवासियों को मूर्ख बनाने के लिए दिन-रात नए-नए, फुसलाने वाले विस्मयकारी फरमान जारी कर रहे हैं, जिन को सुनकर के लोग इन के दीवाने होते जा रहे हैं, ये लोग जानते हैं, कि अब मोहनदास करमचंद गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार बल्लभ भाई पटेल, बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, की छल कपट पूर्ण घात नीतियों, छल प्रपंचों को पचासी प्रतिशत मूल निवासी समझ चुके हैं और डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के प्रति भारत के मूल निवासियों की श्रद्धा और आस्था बढ़ती ही जा रही है, इसीलिए आप पार्टी ने अपना आईकॉन डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को बना लिया है और अपने दफ्तरों में डॉ भीमराव अंबेडकर के ही फोटो लगा कर के भारत के मूल नि...

उत्तर प्रदेश में चल रहा बुलडोजर।

 मेरे 85% मूलनिवासी साथियो, सोहम, जय गुरुदेव!  उत्तर प्रदेश के अनूसूचित जाति, जनजाति ओबीसी और अल्पसंख्यक मुसलमानों, ईसाइयों की दिन प्रति दिन दुर्दशा होती जा रही है, जिस के लिए केवल और केवल, बहुजन समाज पार्टी  की नेत्री सुश्री मायावती, मुस्लिम नेता ओवैसी, समाजवादी पार्टी के ओबीसी नेता अखिलेश यादव और राजभर ही दोषी हैं, इन की मूर्खता और अहंकार ही इन को ले डूबा। आज उत्तर प्रदेश में राक्षस राज चल रहा है, उस के लिए पूरी तरह यही लोग जिम्मेदार हैं, इन्हीं की फूट के कारण आज गरीबों के घरों को बुलडोजर से उजाड़ा जा रहा हैं, गरीबों को बेघर किया जा रहा है, गरीबों को भूखे नंगे मरने के लिए विवश किया जा रहा है, रोटी, कपड़े और मकान से बेजार किया जा रहा है, बरसात के मौसम में कई लोग बेघर हो चुके हैं, यदि ये सभी अहंकारी नेता बामसेफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वामन मेश्राम जी का कहा मान लेते, तो आज उत्तर प्रदेश में संयुक्त मोर्चे की सरकार होती, जिस में सभी मूलनिवासी दलों के नेता जिस में ओवैसी, अखिलेश, मायावती और राजभर इकट्ठे रहते तो आज उत्तर प्रदेश में योगी राज ना होता। चुनावों में योगी तो क्या मोदी ...

घोटालों में आप का धन हजम किया जाता।

  मेरे प्यारे 85% मूल निवासियो, सोहम, जय गुरुदेव! बड़ी हैरानी की बात है कि कांग्रेस, भाजपा और अन्य मनुवादी पार्टियां मिलकर आपस में अरबों खरबों रुपए के घोटाले कर के हम गरीबों का इकट्ठा किया गया टैक्स (धन) हजम कर के आप को कंगाल बनाती जा रहे हैं मगर आप सभी चुपचाप इस अन्याय को सहन करते आ रहे हैं। मनुवादी अपनी सत्ता को बचाए रखने के लिए दिन रात वोटों को खरीदने के लिए वोटरों को यह धन बांटते आ रहे हैं और हमारे ही पैसे से हमें ही गुलाम बनाने का यह ड्रामा 1947 से चलता आ रहा है मगर आप लोग नहीं समझ पा रहे हैं कि अरबों खरबों के बैनर, झंडे, पंपलेट, और पोस्टर कहां से छप कर के चुनावों में प्रयोग किए जाते हैं। आप नहीं समझ पा रहे हैं कि हर पार्टी के कैंडिडेट की गाड़ियां दिन रात किस के धन से चलती हैं और किसके विरुद्ध इन गाड़ियों को चलाया जाता है। सब से पहले इन गाड़ियों को चलाने के लिए कांग्रेस के समय से घोटाले किए जाने लगे थे, जिन में सबसे पहले::: 1948 में 2000 जीपों को खरीदने का घोटाला किया गया। 1951 में साईकल आयात घोटाला किया गया, 1958 में 1. 2 करोड हरिदास मुंद्रा एलआईसी कंपनी का घोटाला हुआ, 196...

मूल निवासी हिन्दू नहीं।

 मेरे प्यारे भारत के मूलनिवासी साथियो, सोहम, जय गुरुदेव! आपको यह जानकर हैरानी होगी कि हिंदू शब्द का प्रयोग मुसलमानों और अंग्रेजों ने भारत वासियों को एक गाली के रूप में प्रयोग किया है मगर विदेशी यूरेशियन आर्यों ने इसे अपना धर्म मानकर अपने अपने विदेशी लोगों को एक झंडे तले इकट्ठा करने के लिए स्वीकार कर लिया है और इस धर्म के अवतार राम, कृष्ण को मान कर अपनी आर्यों की एकता स्थापित की हुई है, जिन के काले नियम मनुस्मृतियों में भरे पड़े हैं, जिन का अध्ययन करने से इंसान के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। ये आर्य लोग इतने निर्दयी हैं, कि अपनी ही विधवा बहू बेटियों को सती के नाम पर जिंदा जलाते आए हैं।  यदि भारत में मुसलमान और अंग्रेज ना आते तो शायद आज भी विधवा युवतियों को जिंदा ही जलना पड़ता। इन लोगों ने मूल भारतीयों को गुलाम बना कर के ऐसे कड़े फरमान जारी कर रखे थे, कि आदमी आदमी को स्पर्श नहीं कर सकता था। ये लोग आदमी की बलि देकर के अपने देवताओं को खुश करते थे, जो घृणित काम आज भी जारी है। यदि मूल निवासी इन लोगों के सामने ऊंचे स्थान पर बैठ जाता था, तो उस के पिछवाड़े में कीलें ठोक देते थे, अगर कोई ध...

गरीब सवर्णों गरीब अवर्णों से मिल जाओ

 मेरे प्यारे देशवासियों, सोहम, जय गुरुदेव! भारतवर्ष ही एक ऐसा देश है जिस देश में 6743 जातियां खोज कर मनुष्य को मनुष्य का दुश्मन बनाया गया जा चुका है। यह कैसा देश है जिस में इंसान इंसान को छूना पाप मानता है। पाप समझता है। एक दूसरे के हाथों से खाना खाना नहीं चाहता है और ना ही खाता है, यहां तक कि चाय पान तक नहीं करना चाहता है और ना ही करता है परंतु जब राज सत्ता छीनने की बात आती है, तो चोरी छुपे यह राक्षस रात के अंधेरे में और बंद कमरे में इन अछूत लोगों के घरों में सब कुछ खा पी जाते हैं मगर जब संगत और पंगत में खाना खाने की बात आती है, तब यह लोग अछूतों के घरों में खाना नहीं खाते हैं। यहां तक उच्च शिक्षित सवर्ण भी अछूतों के साथ संगत में, पंगत में बैठ कर खाना नहीं खाते हैं और ना ही पानी तक पीते हैं। जब नारी शोषण की बात आती है, तो सभी मनुवादी जात पात को भूल कर के अछूत नारियों के साथ बलात्कार तक कर लेते हैं, तब छुआछूत सारी समाप्त हो जाती है अर्थात किसी को भी छुआछूत नजर नहीं आती है। छुआछूत अछूत पुरुष के साथ ही की जाती है, इस के पीछे केवल और केवल अछूत लोगों को गुलाम बनाए रखने की केवल साजिश है ...

सामाजिक बुराइयों से गरीबी का अंत

  । ।सामाजिक बुराईयों की समाप्ति से गरीबी का अंत।। आदरणीय मेरे भाईयो, बहनों, वच्चों, बजुर्गो, "सोहम" जय गुरुदेव! अमीर आर्यों ने पांच हजार सालों से भारत की जनता को छः हजार जातियों में बांट कर के समरसता खत्म कर रखी है, जिस से एक जाति दूसरी जाति से अपने आप को उच्च एवं श्रेष्ठ मान कर, आपस में ना तो रोटी-बेटी का सम्बंध करते हैं, ना ही छूते हैं। तो फिर मानव बनने का क्या मतलब रह जाता है? सभी जातियों के कुछ अमीर शैतान व्यक्तियों ने, अपने वच्चों को सुखी व समृद्ध बनाए रखने के लिए, ऐसे घृणित, गंदे, रीति-रिवाजों और परंपराओं को जन्म दे रखा है, जिन के कारण वे तो घर बैठ कर ही गरीबों का खून चूस कर सुखमय जीवन बिताते आए हैं और हर जाति, धर्म का गरीब, गरीब ही रखा जाता है, जिससे सभी जातियों के अमीर-अमीर, गरीब, गरीब ही होते जा रहे हैं, इसलिए:--- जाति धर्म खत्म करो:--- जाति और धर्मों के बंधन खत्म करके, सभी मूलनिवासी आपस में अंतर्जातीय, अंतर्धार्मिक विवाह कर के जातियों और धर्मों को खत्म करो। धर्म केवल आदपुरष द्वारा स्थापित आदिकाल से चला आ रहा, एक ही आदधर्म है, वही अपना कर आप जनगणना में लिखवाओ।...

मूल निवासियों वोट की कीमत समझो

  मूल निवासियो बोट की कीमत समझो।। मेरे भारत के पचासी प्रतिशत मूल निवासियो, सोहम, जय गुरुदेव! बड़े दुख की बात है कि आप वोट की कीमत को नहीं समझ रहे हैं। अपने वोट को कौड़ी के बदले उन लोगों को दे देते हैं, जो लोग आप के ऊपर अत्याचार करते हैं! सितम ढाते हैं! माबलिचिंग करते हैं! बलात्कार व्यभिचार करते हैं! आप को लाचार बना कर रखा हुआ है! आप को गुलाम बना करके रखा हुआ है! आप को नोकरियों से महरूम किया जा चुका है! फिर भी आप उन्हीं जालिम लोगों को अपना अमूल्य वोट दे देते हैं, जो राजे, महाराजे, सम्राट बनाता है। एक वोट की कितनी अहमियत है? कितनी कीमत है? आप नहीं समझते। यह अधिकार कोई अपने आप नहीं मिल गया हैं और ना ही यह वोट का अधिकार किसी ने आप को बड़ी आसानी से दिया है, अगर वोट की प्राप्ति का इतिहास आप जानना चाहते हैं, तो साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवालिया जी, स्वामी अछूतानंद जी महाराज कानपुर, बीडीओ हजारा राम के इतिहास को पढ़ो, हमारे पचासी प्रतिशत मूलनिवासियों को गांधी, नेहरू, पटेल, बाल गंगाधर तिलक, वाल कृष्ण गोखले आदि हमें वोट तो दूर की बात थी वे तो कोई भी मौलिक अधिकार नहीं देना चाहते थे और अंग्रेजो...

85% मूलनिवासी एकता बना कर रहो।

 मेरे प्यारे पचासी मूल निवासियों, जय गुरुदेव! बड़ी हैरानी की बात है कि भारत में हम 85% लोग हैं मगर हम कभी धार्मिक और राजनीतिक रूप से एक सूत्र में बंध करके जीवन नहीं जीते हैं, जब कि हमारा खून चूसने वाले, हमारी खून पसीने की कमाई पर पलने वाले लोग जंगलराज को अपना करके मूलनिवासियों का जीना दूभर करते आए हैं। ये मनुवादी लोग जंगलराज के सिद्धांतो पर चल कर जीवन बिताते हैं।ये लोग जैसे जंगल में बड़ा जानवर छोटे जानवर को खाता जाता है फिर  छोटे को छोटा खाता जाता है, उन्हीं जंगली जानवरों की नकल करके उनके नियमों को ही मनुवादी अपनाए हुए हैं और हम उस जंगलराज के नियमों के कारण प्रतिदिन मारे जाते हैं, पीटे जाते हैं, खून बहाया जाता है, और बड़ी निर्दयता के साथ हमारे लोगों के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है। हम केवल भैंसों के झुण्डों की तरह, हिरणों के झुंडों की तरह, शेर और चीतों का शिकार होते रहते हैं, मगर जो निडर भैंस या भैंसा शेर के ऊपर टूट पड़ता है, तो शेर की अंतड़ियों को निकाल कर के बाहर फ़ेंक देते हैं, यहां तक की दस बीस कुत्ते भी शेर को मार मार कर के गिरा कर खा जाते हैं मगर हम भारतीय मूलनिवासी 85% ...

85% मूल निवासियों अपनी सुरक्षा के लिए गांवों में सुरक्षा दल बनाओ सुरक्षा दल बनाओ

 मेरे प्यारे भारत के मूल निवासियों, जय गुरुदेव! बड़े दुख से लिखना पड़ रहा है कि हम ग्राम स्तर से लेकर के राष्ट्रीय स्तर तक अपनी सुरक्षा के लिए कोई सुरक्षा प्रबंध नहीं करते आए हैं, जिस के कारण प्रतिदिन 85% मूलनिवासियों के साथ बलात्कार, माब्लिंचिंग, कत्लेआम होते रहते हैं। कोर्ट के निर्णयों में भी अन्याय मिलता आ रहा है, जबकि ब्राह्मण, राजपूत, मनुवादियों के खिलाफ अगर कोई अधिकारी न्यायधीश कानून के अंदर रह करके कोई फैसला करें, तो भी ये मनुवादी गुंडे न्यायधीशों को मारने की धमकियां देने लग पड़ते हैं। शहरों को जला देते हैं। रेल पटरी को उखाड़ देते हैं। कारों, बसों आदि को जला देते हैं, मगर मूलनिवासी कभी भी अपने गांवों में अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा दस्ते नहीं बनाते हैं। इस के बाबजूद कुछ कांग्रेस, भाजपा आदि राजनीतिक दलों में हमारे ही दल्ले और दलाल विधायक और सांसद बन कर मूल निवासियों के ऊपर होने वाले नृशंस दंगों, अत्याचारों को मूक, बधिर बन कर देखते रहते हैं और इन मनुवादी दलों में, बेशर्म हो कर बने रहते हैं, उन को अपने ही संगठनों की गुप्त सूचना देते रहते हैं, जो मूल निवासियों के ...

मूल निवासियों गुलामी करना छोड़ दो।

 मेरे भारत के मूलनिवासियों, जय गुरुदेव!  आपको जान कर के हैरानी होगी कि, जब हम और हमारे पूर्वज मुसलमानों और अंग्रेजों के साथ आजादी की लड़ाई लड़ रहे थे, अंग्रेजों के साथ मुकाबला कर रहे थे, अपने खून की नदियां बहा रहे थे, अंग्रेजों को भारत से निकालने के लिए दिन रात संघर्ष कर रहे थे, उस समय आर एस एस के कुछ लोग भारत को मिलने वाली आजादी पर कब्जा करने के लिए बंद गुफाओं में बैठ कर योजनाएं बना रहे थे, इन के मनुवादी लोग जो आजादी की लड़ाई में शामिल थे भी, वे भी भारत के 85% मूलनिवासियों को अपना गुलाम बनाने के लिए योजना बना रहे थे, जिनमें सबसे बड़े धोखेबाज मोहनदास करमचंद गांधी, मोती लाल नेहरू, जवाहरलाल नेहरू, मदन मोहन मालवीय, लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक आदि थे, जो मूलनिवासियों और अछूतों के घरों में जा कर के अपने हाथ से झाड़ू मारते, उन्हें मूर्ख बनाने के लिए ड्रामेबाजी कर रहे थे, जबकि अंदर ही अंदर ये लोग आर एस एस की नीतियों को लागू करने के लिए, अछूतों के प्रति मगरमच्छ के आंसू बहा रहे थे, जब आद धर्म मंडल ने लार्ड साइमन और लार्ड लोथियन को अपनी गुलामी के बारे में जानकारी दी, तो गांधी ने अंग...

जनजागरण अभियान प्रथम।

 मेरे भारत के मूल निवासियों, जय गुरुदेव!  आपको जान कर के हैरानी होगी कि, जब हम और हमारे पूर्वज मुसलमानों और अंग्रेजों के साथ आजादी की लड़ाई लड़ रहे थे, उनके साथ मुकाबला कर रहे थे, अपने खून की नदियां बहा रहे थे, अंग्रेजों को भारत से निकालने के लिए दिन रात संघर्ष कर रहे थे, उस समय आर एस एस के कुछ लोग भारत को मिलने वाली आजादी पर कब्जा करने के लिए बंद गुफाओं में बैठ कर योजनाएं बना रहे थे, इन के मनुवादी लोग जो आजादी की लड़ाई में शामिल थे भी, वे भी भारत के 85% मूल निवासियों को अपना गुलाम बनाने के लिए योजना बना रहे थे, जिनमें सबसे बड़ा धोखेबाज मोहनदास करमचंद गांधी, जवाहरलाल नेहरू, मदन मोहन मालवीय लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक आदि थे, जो मूल निवासियों और अछूतों के घरों में जा कर के अपने हाथ से झाड़ू मारते, उन्हें मूर्ख बनाने के लिए ड्रामेबाजी कर रहे थे, जबकि अंदर ही अंदर ये लोग आर एस एस की नीतियों को लागू करने के लिए, अछूतों के प्रति मगरमच्छ के आंसू बहा रहे थे, जब आद धर्म मंडल ने लार्ड साइमन और लार्ड लोथियन को अपनी गुलामी के बारे में जानकारी दी, तो गांधी ने उनको भी गुमराह किया कि भा...

जनजागरण अभियान।

 गत दिवस बहुजन मुक्ति पार्टी के प्रचार अभियान के अंतर्गत मैंने ऊना के दो गांवों में जनसंपर्क किया, जिस में गणमान्य लोगों ने भाग लिया, जिन्होंने आप बीती बताते हुए कहा कि हमारे बच्चे बीटैक, एमटैक कर के घर में बैठे हुए हैं, हमें और हमारे बच्चों को कोई प्राइवेट कंपनी भी नौकरी देने के लिए तैयार नहीं है, यदि कंपनी वालों के पास जाएं या उन से पत्र व्यवहार करें तो वे कहते हैं कि किसी विधायक, सांसद, मंत्री से फोन करवाओ, जिस के कारण हमें प्राइवेट सेक्टर में भी नौकरी नहीं मिल पा रही है। सरकारी सेक्टर तो कांग्रेस पार्टी के तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने हमारे लिए पहले ही बंद कर दिया है। सभी विभागों में कच्ची नौकरियां दे कर के आरक्षण समाप्त कर दिया है। कच्ची नौकरियों में केवल ब्राह्मण, राजपूत, और अपने ही कार्यकर्ताओं को ही रखा गया है। अनुसूचित जाति, जनजाति, ओबीसी और अल्पसंख्यकों को जानबूझकर वीरभद्र सिंह ने कंगाली के कगार पर पहुंचा दिया है। जो लोग भर्ती किए गए हैं उनको भी दो, चार, पांच, सात हजार वेतन देकर के शोषण किया जा रहा है, उन का भी भविष्य अंधकार में है, उन को भी पक्का करने की कोई उम्म...

सभी जातियों के गरीब एक मंच पर इकट्ठा होकर थर्ड फ्रंट को जिताएं।

 मेरे देश के गरीब भारतवासियो,  जय गुरुदेव! विदेशी आर्यों ने सम्राट शिवशंकर और उसकी गृहमंत्री साम्राज्ञी गौरजां को छल से मार कर के भारतवर्ष को अपना गुलाम बनाया हुआ है, तब से भारतवर्ष के मूल निवासियों का जीना दुश्वार हो गया है। छुआछूत की दीवारें खड़ी कर के आदमी को आदमी ना समझ करके, पशुओं की तरह जीवन जीने के लिए मनुवादियों ने मजबूर कर रखा है। यह मनुवादी, अपने कुत्ते को अपने बिस्तर के ऊपर सुला सकते हैं, कुत्ते को अपने हाथ से खाना खिला सकते, कुत्ता इन के मंदिरों में प्रवेश करके मूर्ति के ऊपर मूत्र विसर्जन कर सकता है मगर भारत के मूलनिवासी इन के मंदिरों, गुरुद्वारा में प्रवेश नहीं कर सकते हैं, अगर करें तो उनके साथ माबलिंचिंग की जाती है, घोड़े के ऊपर कुत्ता बैठ सकता है मगर घोड़े के ऊपर मूलनिवासी दूल्हा, दुल्हन लाने के लिए नहीं जा सकता है और घोड़ी से उतार कर के मारा जाता है, मगर भारत के 85% असली मूल निवासियों को कुत्तों से बदतर समझ कर के आज अछूत, राक्षस, दानव घोषित किए हुए हैं, यानी कुत्ते को छूना पवित्र काम है मगर भारत के मूल निवासियों को छूना अपवित्र काम है। उन के छूने से, स्पर्श करन...

सभी मूलनिवासी एक मंच पर इकट्ठे हो जाओ।

 मेरे प्रिय भारतीय मूलनिवासी साथियों,  जय गुरुदेव!  बड़े दुख की बात है कि हम कांग्रेस, बीजेपी और आप पार्टियों की दरियों को उठाने और बिछाने का काम करते आ रहे हैं और अब भी यही काम करते जा रहे हैं, जबकि इन पार्टियों के नेता हमें केवल बोट बटोरने के लिए ही प्रयोग करते हैं। किसी पॉलिसी मैटर में हमें कोई नहीं पूछता है, फिर भी हम इन मनुवादी पार्टियों के दल्ले और दलाल बने हुए हैं। हम अपना स्वाभिमान भूल गए हैं, हम अपनी 85% शक्ति को भी भूल गए हैं। हम अपने वीरों, बहादुरों की बहादुरी को भूल चुके हैं। चमार रेजिमेंट ने विश्व में सबसे अधिक परमवीर चक्र जीते हैं, जिस का इतिहास मनुवादी सरकारों ने कभी उजागर नहीं होने दिया। इस वीर रेजमेंट को खत्म कर दिया गया है। हम वर्षों से चमार रेजीमेंट को बहाल करने के लिए आग्रह कर रहे हैं और प्रयास करते आ रहे हैं मगर चमार रेजिमेंट को ख़त्म करने वाला मनुवाद और मनुवादी सरकारें है, जो चमार रेजीमेंट को बहाल नहीं कर रही हैं। हम कोरेगांव संघर्ष को भी भूल चुके हैं, जिसमें हमारे वीरों ने हमारे दुश्मनों को मार मुका कर सबक सिखाया था। हम छोटे बड़े राजनीतिक दल बनाकर क...