मूलनिवासी राष्ट्रपतियों का अपमान
मेरे 85% मूल निवासियो, सोहम्, जय गुरुदेव! बड़े दुख की बात है कि हमारे 85% मूलनिवासी लोग अपने साथ घटने वाले अपमान को नहीं समझ पा रहे हैं, जिस के कारण मूल निवासियों का स्वाभिमान रो रहा है, मनुवादियों ने सिंधु घाटी की सभ्यता को समूल नष्ट कर के हमारी सभ्यता, संस्कृति और स्वतंत्रता को खत्म कर दिया था, जिस के साथ ही हमारे दैवीय गुणों से युक्त देवी, देवताओं के इतिहास को भी खत्म करने के लिए, उन के नाम बदल कर के, उन की मूर्तियों को काला कर के, उन के पवित्र मंदिरों को मनुवादियों ने छल कपट, धोखाधड़ी से अपना कर के, अपने कब्जे में कर रखा है| आदि पुरुष से जुगाद का जन्म हुआ है, जिस से धरती के ऊपर मानव जाति और प्राणी जीव जगत का प्रादुर्भाव हुआ है| गुरु रविदास जी महाराज ने अपने मूल मंत्र में इस सत्य को परिभाषित किया है, उन्होंने लिखा है, "इक ओंकार सतनाम कर्ता पुरख निर्भाऊ, निर्वैर अकाल मूरत अजूनी सै भंग, गुरु प्रसाद, आद सच, जुगाद सच, है भी सच, हो सी भी सच" अर्थात आदि पुरुष सत्य है और उस का पुत्र जुगाद भी सत्य है| जुगाद से नील, कैल, चंडूर, मण्डल और कैलाश हुए हैं, जिन की संतान चंवरवंशी सम्राट ...