जनजागरण अभियान प्रथम।

 मेरे भारत के मूल निवासियों,

जय गुरुदेव! 

आपको जान कर के हैरानी होगी कि, जब हम और हमारे पूर्वज मुसलमानों और अंग्रेजों के साथ आजादी की लड़ाई लड़ रहे थे, उनके साथ मुकाबला कर रहे थे, अपने खून की नदियां बहा रहे थे, अंग्रेजों को भारत से निकालने के लिए दिन रात संघर्ष कर रहे थे, उस समय आर एस एस के कुछ लोग भारत को मिलने वाली आजादी पर कब्जा करने के लिए बंद गुफाओं में बैठ कर योजनाएं बना रहे थे, इन के मनुवादी लोग जो आजादी की लड़ाई में शामिल थे भी, वे भी भारत के 85% मूल निवासियों को अपना गुलाम बनाने के लिए योजना बना रहे थे, जिनमें सबसे बड़ा धोखेबाज मोहनदास करमचंद गांधी, जवाहरलाल नेहरू, मदन मोहन मालवीय लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक आदि थे, जो मूल निवासियों और अछूतों के घरों में जा कर के अपने हाथ से झाड़ू मारते, उन्हें मूर्ख बनाने के लिए ड्रामेबाजी कर रहे थे, जबकि अंदर ही अंदर ये लोग आर एस एस की नीतियों को लागू करने के लिए, अछूतों के प्रति मगरमच्छ के आंसू बहा रहे थे, जब आद धर्म मंडल ने लार्ड साइमन और लार्ड लोथियन को अपनी गुलामी के बारे में जानकारी दी, तो गांधी ने उनको भी गुमराह किया कि भारत में कोई भी अछूत नहीं है, वे केवल छोटे हिंदू हैं, जिनको हम जल्दी ही अपने साथ मिला लेंगे मगर जब अंग्रेजों ने 85% मूल निवासियों को दो वोट का अधिकार दिया, शिक्षा का अधिकार दिया, 80 अछूत टीचर  ट्रेंड करके स्कूलों में लगाए, जमीन के मालिक बनाए, नौकरियों में आरक्षण लागू किया, तब गांधी ने यरवदा जेल में आमरण अनशन रख दिया, ताकि भारत के असली 85% मूल निवासियों को यह अधिकार ना दिया जाए। दो वोट का अधिकार खत्म करने के लिए गांधी ने पूना पैक्ट करवाया, जिस में उसने हमारा दो वोट का अधिकार छीन लिया और उसी के परिणाम स्वरूप आज जो आरक्षण से विधायक और सांसद बनते हैं, वे सभी मनु वादियों की हां में हां मिला करके मूल निवासियों के साथ गद्दारी करते हैं। 75 साल बीत जाने के बाद पचासी प्रतिशत मूल निवासियों की वही हालत है, जो 1947 से पहले थी। आज तक मूल निवासियों को आत्मनिर्भर नहीं बनाया गया है और ना ही मनुवाद की गुलामी से आजाद किया गया। आज नईं किस्म की गुलामी तो थोंपी जा रही है, जिस के अनुसार मूल निवासियों की रोजी, रोटी समाप्त करने के लिए आरक्षण खत्म कर दिया गया। सरकारी सेक्टर बेच दिए गए और कुछ बेटे जा रहे हैं। सभी नौकरियां चोर दरवाजे से भरी जा रही हैं, ताकि आरक्षण का कोई महत्व ही ना आ रहे। 

इसलिए मेरे प्यारे भारत के 85 प्रतिशत मूल निवासियो! अपने पांव पर खड़ा होने के लिए, अपनी सरकार बनाने के लिए, अपने बोटरों को इकट्ठा करो और मूल निवासियों को समझाओ कि  कांग्रेस, भाजपा और आप पार्टी आदि ब्राह्मणवादी पार्टियां हमें रोजी-रोटी ही नहीं देती हैं, तो फिर हम इनको वोट क्यों दें। आप अपना वोट कभी भी कांग्रेस, भाजपा और आप पार्टी को ना दें, क्योंकि ये सभी अंदर से एक ही है और हमें मूर्ख बनाने के लिए, हमें बरगलाने के लिए नूरा कुश्ती करते हैं। ये सभी दिखावे के लिए आपस में लड़ते झगड़ते और गाली गलौज करते हैं मगर अंदर से एक ही हैं। कांग्रेस पार्टी का पतन होते देख कर के आर एस एस ने, आप पार्टी को जन्म दिया है, जिस ने दिल्ली और पंजाब में आरक्षण खत्म कर दिया है और मुफ्त का राशन पानी दे कर के, मुफ्त की दवाइयां दे कर के, हमारे लोगों को मूर्ख बनाना शुरू किया हुआ है। नौकरी, रोजगार का कोई वायदा नहीं करते और ना ही कोई गारंटी देते हैं, औरतों को एक हजार मुफ्त में देने की गारंटी जरूर देते हैं मगर ये केवल छलावा ही देते हैं, इसलिए आने वाले चुनावों में केवल मूलनिवासी फ्रंट को ही वोटिंग करो और अपनी सरकार बनाओ, तभी भारत के गरीब ब्राह्मणों, राजपूतों, वानियों, जाटों और गरीब मूल निवासियों को रोजगार मिलेगा, भूमिहीनों को जमीन मिलेगी, अच्छी शिक्षा की व्यवस्था की जाएगी, निजीकरण बंद किया जाएगा, हर घर के किसी एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी मिलेगी अन्यथा गरीब पिसता ही रहेगा।

रामसिंह आदवंशी।

हिमाचल प्रदेश।


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