महामहिम राष्ट्रपति द्रोपती मुर्मु जी
आदरणीय 85% मूलनिवासी साथियो,
सोहम, जय गुरुदेव!
बड़े हर्ष का विषय है, कि इस वर्ष भी पिछले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की तरह ही अनुसूचित जनजाति "आदिवासी" समाज में से पुन: भारत का राष्ट्रपति 25 जुलाई 2022 को शपथ दिला कर के बना दिया गया है। श्रीमती द्रोपती मुर्मू जी के महामहिम राष्ट्रपति बनने से देश के मूल निवासियों को खुशी तो हुई है मगर इस बात का किसी को कोई भरोसा भी नहीं है, कि वह जिस समाज से राष्ट्रपति बनी है, उस समाज के लिए वह कुछ कर पाएँगी भी या पूर्व महामहिम की तरह ही मूक दर्शक बनी रहेंगी क्योंकि भारत के मनुवादी लोग 85% मूल निवासियों के वोट लेने के लिए राष्ट्रपति तो बनाते आ रहे हैं, यही नहीं अल्पसंख्यकों को भी राष्ट्रपति बनाते आ रहे हैं, अब तो आदिवासी को भी बना दिया गया मगर इन वर्गों से जो राष्ट्रपति बनाए जा रहे हैं, उन से उन की ही जातियों के खिलाफ इन राष्ट्रपतियों से हस्ताक्षर करवा कर के मनुवादी प्रधानमंत्री अत्याचार ढा रहे हैं। जब कांग्रेस ने मुस्लिम और सिख राष्ट्रपति बनाए तो उन्हें मुस्लिमों और सिखों के खिलाफ प्रयोग किया गया। अनुसूचित जाति के राष्ट्रपति बनाए गए, तब भी उन से अनुसूचित जाति के लोगों के ऊपर अत्याचार ढाने के लिए, मनुवादी सरकार ने काले हस्ताक्षर करवाए हैं, जिस का साक्षात उदाहरण दिल्ली स्थित गुरु रविदास जी महाराज के तुगलकाबाद मन्दिर का विध्वंस है, जिस की मनुवादी सरकार ने 700 कनाल जमीन छीन ली और गुरुओं के गुरु रविदास जी महाराज का 600 साल पुराना दैवी शक्ति से संपन्न मंदिर भी ध्वस्त करवा दिया गया, मगर अनुसूचित जाति के ही महामहिम राष्ट्रपति राम नाथ कोविद जी ने गुरु रविदास जी महाराज के इतिहास को बचाने के लिए कोई भी कार्य नहीं किया, इन्होंने ये कार्य इसलिए नहीं किया कि मनुवादी सरकार और न्यायालय के आदेशों का पालन कराना अति आवश्यक था।
अब फिर मनुवादी सरकार के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उस की कार्यकारिणी ने जनजाति महिला आदिवासी को भारत का राष्ट्रपति बनवा लिया है, जिस के पीछे भी मनुवादी छल कपट, परपंच और षड्यंत्र ही नजर आ रहा है, क्योंकि निवर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जी के मान सम्मान को घटाने के लिए मनुवादी भाजपा सरकार ने उन से ब्राह्मणों के पांव स्पर्श करवाए, जिस से अनुसूचित जातियों का भी अपमान करने का षड्यंत्र किया गया| जब अनुसूचित जातियों के राष्ट्रपति से ही मनुवादियों के उन लोगों के पाँवों को स्पर्श करवाया गया जो संगत की कमाई पर पलते हैं, परजीवी बन कर के अपना जीवन बसर करते हैं, उस से 85% मूल निवासियों के सिर को भी झुकाया गया| इस प्रमाण से स्पष्ट हो रहा है कि जनजाति महिला द्रोपती मुर्मू को भी मनुवादी सरकार अपने इशारे पर नाच नचायेगी और 85% मूल निवासियों के खिलाफ उनसे भी हस्ताक्षर करवाए जाएंगे| कोई भी कार्य मूल निवासियों के हित के लिए ना तो किया गया है, और ना ही किया जाएगा, मगर जिन के हित के लिए इन राष्ट्रपतियों के माध्यम से उन की शक्तियों का प्रधानमंत्रियों ने दुरुपयोग किया, वे उच्छृंखल हो कर मूलनिवासी जनता को अपमानित करते हैं|
जब ज्ञानी जैल सिंह जी सेवानिवृत्त हो गए और हमारे तत्कालीन सेवास्तंभ के राष्ट्रीय अध्यक्ष संगीता राव की किताब का विमोचन करने के लिए उन को बुलाया गया, तब ज्ञानी जैल सिंह ने पश्चाताप करते हुए हमें बताया था, कि मुझे जो आप लोगों ने आज मान सम्मान दिया है, वह मुझे राष्ट्रपति रहते हुए कभी नहीं मिला मगर जब तक मैं राष्ट्रपति रहा तब तक मैं आप के लिए, आप के कल्याण के लिए, आप की भलाई के लिए, आप के अधिकारों की रक्षा के लिए, कोई काम नहीं कर सका था, जिस का मुझे दुख है और अब तो पश्चाताप करने का भी कोई अवसर नहीं है| साथियों ज्ञानी जैल सिंह की इस बात से यह बात स्पष्ट हो जाता है कि 85% मूल निवासियों में से उन लोगों को राष्ट्रपति बनाया जाता है, जो केवल मनुवादी प्रधानमंत्रियों की हां में हां मिलाएं और जैसे वह चाहे वैसे हस्ताक्षर कर दें| यही संदेह वर्तमान राष्ट्रपति के प्रति भी हमारे जहन में पैदा हो रहा है, मगर जिस दिन से मुर्मू जी ने राष्ट्रपति बनने से पहले राज्यपाल के रूप में उन्होंने मुख्यमंत्रियों और मनुवादी सरकार को नकेल डाली थी, उससे आशा भी बध रही है कि महामहिम राष्ट्रपति मुर्मू जी वर्तमान सरकार की अन्याय पूर्ण नीतियों को लगाम लगाने के लिए कड़े से कड़े कदम उठाएंगी और मनुवादी सरकार के अन्याय पूर्ण, भेदभाव पूर्ण, कुशासन को नकेल डालेंगी, यदि ऐसा नहीं किया गया तो महामहिम राष्ट्रपति मुर्मू अपने पिछले इतिहास को बचा नहीं पाएंगी और जिस समाज में से उनको चुना गया है, उस समाज के प्रति भी धोखा ही होगा, इसलिए भारत के 85 प्रतिशत मूलनिवासी महामहिम राष्ट्रपति द्रोपती मुर्मू जी से आस लगाए बैठे हैं, कि वे भारत के अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ी जाति और अल्पसंख्यकों के ऊपर जो अत्याचार ढाए जा रहे हैं, मॉबलिंचिंग की जा रही है, आदिवासियों की जो भूमि छीनी जा रही है, आदिवासियों को उजाड़ कर बर्बाद किया जा रहा है, निजी और सरकारी सेक्टर में आरक्षण समाप्त किया गया है, जो प्राइवेटाइजेशन किया जा रहा गया है, उस को तत्काल बंद करने के लिए सरकार को कठोर शब्दों में एडवाइजरी जारी करेंगी, अगर वे ऐसा नहीं करेंगी, तो उन का मूल निवासी समाज के लिए राष्ट्रपति बनना बेकार होगा| मूलनिवासी अपनी आजादी को प्राप्त करने के लिए अब कमर कस कर बैठ गए हैं| वे आरक्षण से बनने वाले विधायकों और सांसदों के नाक में दम करने के लिए लामबंद होते जा रहे हैं, इसलिए महामहिम जी मनुवादी शोषण से बचाने के लिए मूल निवासियों के हित में सकारात्मक कदम उठाएं| हम मूलनिवासी आप की सफलता के लिए आद पुरुष से प्रार्थना करते हैं और उनको हार्दिक बधाई भी देते हैं|
राम सिंह आदवंशी,
महासचिव,
बहुजन मुक्ति पार्टी हिमाचल प्रदेश
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