मूल निवासी अपने ही मूलनिवासी को ही वोट डालें

 मेरे 85% मूलनिवासी साथियो,

सोहम, जय गुरुदेव!

भारतवर्ष आप का देश है| आप इस देश के मूल निवासी हैं, आप इस देश के मालिक हैं| आद पुरुष से लेकर के आज तक इस देश में आप के ही वंशज अवतरित हुए हैं, मगर 4000 साल पहले यूरेशियन लोगों ने भारत में आ कर के आप के पूर्वजों को छल बल, धोखे से मार काट कर के, आप को गुलाम बना रखा है| आप को पता है, जब किसी को गुलाम बना लिया जाता है, तो सब से पहले उसी जाति का इतिहास खत्म किया जाता है, उस के महापुरुषों का नाम मिटा दिया जाता है, उन के स्मृति चिन्ह मिटा दिए जाते हैं, उन को राक्षस सिद्ध करने के लिए कल्पित कहानियां तैयार की जाती हैं, यही हाल इस देश के मूल निवासी वीर, वीरांगनाओं का हुआ| जब हमारे पूर्वज गुलाम बना लिये गए तो उन की सभ्यता, संस्कृति और इतिहास भी खत्म कर दिए गए| हमारे पूर्वज 1947 तक पूरी तरह ब्राह्मणवाद के खिलाफ आंदोलन करते रहे मगर सफल नहीं हो पाए| आद पुरुष की देवीय शक्ति अपरंपार है, जब मनुस्मृति के काले कानूनों ने, हमारे पूर्वजों के खून बहा, बहा कर निर्दयता की सारी सीमाएं तोड़ दीं, नृशंस हत्याएं होती गई, बलि के नाम पर उन का कत्ल किया जाता रहा, जिस घोर अत्याचार को आदि पुरुष सहन नहीं कर पाया और युरेशयन को मिट्टी में मिलाने के लिए दुबारा युरेशयन को ही भारत में भेज दिया, जिस के परिणाम स्वरूप सातवीं शताब्दी में इस देश में मुस्लिम अक्रान्ता मुहमद बिन कासिम आया, जिन्होंने इस देश के जालिमों को नकेल डाली, मगर जब उन्होंने पूरी तरह मनुस्मृति शासन को खत्म नहीं किया, तो भारतवर्ष में उन्हीं के वँशज अंग्रेज आए| अंग्रेजों ने हिंदुओं की सभी मनुस्मृतियों के अमानवीय, पाशविक कानूनों छुआछूत, बलि प्रथा, सति प्रथा आदि राक्षसी खूनी कानूनों को रद्द कर के समाप्त कर दिया, जिस के परिणाम स्वरूप ही स्वामी अछूतानंद कानपुर, गद्दरी बाबा साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवालिया जी ने मूल निवासी लोगों की स्वतंत्रता के लिए लाल रंग का झंडा हाथ में ले कर के, अंग्रेजों के साथ लंबी लड़ाई लड़ी जिस के परिणाम स्वरुप सन 1931 की जनगणना में आप को अपना धर्म "आदि धर्म" लिखने का अधिकार दिलाया गया है| सन् 1932 में जब लॉर्ड लोथियन भारत आया था, तब उस को भी आप की दुर्दशा और मनुवादियों की अमानवीयता बता कर के आरक्षण, शिक्षा, स्कालरशिप, भूमि, नौकरी और समानता के अधिकार प्राप्त किए, जिस के परिणाम स्वरूप 1936 के असेंबली चुनाव में आप के लोगों को आरक्षण के माध्यम से विधायक चुना गया और इसी आरक्षण के बल पर आप को भरपेट रोटी मिलने लगी, मगर आजादी के बाद कांग्रेस ने आप के अधिकारों को सीमित कर के आप के आरक्षण को कभी पूरा नहीं किया| जब मण्डल कमीशन लागू कर के ओबीसी को उन का 27% हिस्सा देदिया गया, तब  इसी कांग्रेस सरकार के प्रधानमंत्री नरसिंहा राव ने आप की नौकरियां खत्म करने के लिए प्राइवेटाइजेशन शुरू कर दिया, जिस के कारण सरकारी नौकरियां खत्म होने लगी और आज तक होती ही गई| नीजिकरण करके मनुवादियों के लिए प्राइवेट सेक्टर में अपने सवर्णों को ही नौकरियां देने का प्रबंध कर दिया गया, मगर आज ऐसी स्थिति बन चुकी है, कि प्राइवेट सेक्टर में भी 85% मूल निवासियों को नौकरी नहीं दी जा रही है और जो लोग नौकरी कर भी रहे हैं, वे अपनी जाति छुपा कर के नौकरी कर रहे हैं| जब मालिक को पता चल जाता है, कि अछूत है, मूल निवासी है, उस को मालिक द्वारा तत्काल नौकरी से निकाल दिया जाता है, मगर बड़े दुख की बात तो यह हो चुकी है, कि कांग्रेस और भाजपा के सवर्ण विधायक, सांसद और मंत्री जब तक प्राइवेट सेक्टर के मालिक को सिफारिश नहीं कर पा रहे हैं, तब तक आप के बच्चों को कोई नौकरी नहीं दे रहा है, इसलिए जब कांग्रेस, बीजेपी और उन के सहयोगी दल आप को ना तो सरकारी और ना ही निजी सेक्टर में नौकरी दिला रहे हैं और आरक्षण खत्म कर के आप को भूखे मरने के लिए विवश करते जा रहे हैं, तो फिर आप को मनुवादी पार्टियों को वोट भी नहीं देना चाहिए| वोट केवल और केवल अपने ही मूलनिवासी उम्मीद बार को डाल कर के विधायक और सांसद बनाना चाहिए| जब आप के 85% मूलनिवासी लोगों में से विधायक और सांसद बनेंगे, तो आप की ही सरकार बनेगी और आप के लिए ही संविधान में रोटी, कपड़े और मकान का स्थाई प्रबंध किया जाएगा| इसलिए आप सभी से अपील है, कि भविष्य में आप सभी 85% मूलनिवासी अपने ही मूल निवासी भाई को वोटिंग करके कांग्रेस, भाजपा और उन के सहयोगी दलों को सबक सिखाओ, तभी आप की गुलामी खत्म हो सकती है।

रामसिंह आदवंशी,

महासचिव।

बहुजन मुक्ति पार्टी हिमाचल प्रदेश


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