सभी जातियों के गरीब एक मंच पर इकट्ठा होकर थर्ड फ्रंट को जिताएं।

 मेरे देश के गरीब भारतवासियो, 

जय गुरुदेव!

विदेशी आर्यों ने सम्राट शिवशंकर और उसकी गृहमंत्री साम्राज्ञी गौरजां को छल से मार कर के भारतवर्ष को अपना गुलाम बनाया हुआ है, तब से भारतवर्ष के मूल निवासियों का जीना दुश्वार हो गया है। छुआछूत की दीवारें खड़ी कर के आदमी को आदमी ना समझ करके, पशुओं की तरह जीवन जीने के लिए मनुवादियों ने मजबूर कर रखा है। यह मनुवादी, अपने कुत्ते को अपने बिस्तर के ऊपर सुला सकते हैं, कुत्ते को अपने हाथ से खाना खिला सकते, कुत्ता इन के मंदिरों में प्रवेश करके मूर्ति के ऊपर मूत्र विसर्जन कर सकता है मगर भारत के मूलनिवासी इन के मंदिरों, गुरुद्वारा में प्रवेश नहीं कर सकते हैं, अगर करें तो उनके साथ माबलिंचिंग की जाती है, घोड़े के ऊपर कुत्ता बैठ सकता है मगर घोड़े के ऊपर मूलनिवासी दूल्हा, दुल्हन लाने के लिए नहीं जा सकता है और घोड़ी से उतार कर के मारा जाता है, मगर भारत के 85% असली मूल निवासियों को कुत्तों से बदतर समझ कर के आज अछूत, राक्षस, दानव घोषित किए हुए हैं, यानी कुत्ते को छूना पवित्र काम है मगर भारत के मूल निवासियों को छूना अपवित्र काम है। उन के छूने से, स्पर्श करने से यह मनुवादी अपवित्र हो जाते हैं मगर जब उन के बनाए हुए जूते पांव में डालते हैं, तब उनके बनाए हुए जूते पवित्र लगते हैं। यही नहीं 6000 जातियों से जो काम करवाया जाता है, वह काम पवित्र होता है मगर काम करने वाले मूलनिवासी अपवित्र होते हैं, जो हड्ड खानी गंगा है उस के अपवित्र पानी के छिड़काव से खुद पवित्र हो जाते हैं मगर अछूत मूल निवासियों को आज तक गंगा में डूबो कर के पवित्र नहीं किया गया है और अपवित्र बना करके रखा हुआ है। मूल निवासियों के लिए शिक्षा के दरवाजे बंद रखे गए थे, इस का मुख्य कारण है कि भारत के 85% मूल निवासियों को गुलाम बनाए रखा जाए, केवल अछूत ही नहीं माना जाता है मगर इन के लिए शिक्षा के दरवाजे भी बंद कर कर के पुश तक बना कर रखा गया था, जिसके खिलाफ सबसे पहले गुरु रविदास जी महाराज ने ही सामाजिक परिवर्तन के लिए, क्रांतिकारी आंदोलन शुरू किया था और सब से पहले गुरु रविदास जी महाराज ने ही राजों, महाराजाओं और बादशाह को विवश कर के शिक्षा के दरवाजे खुलवाए थे मंदिरों के ताले खुलवाए थे मगर आज फिर वहां पर भी इन मनुवादियों ने दोहरी शिक्षा की व्यवस्था कर डाली। अपने बच्चों को अच्छी एजुकेशन देने के लिए प्राइवेट स्कूल खोल लिए और असली मूल निवासियों के लिए सरकारी स्कूल खोल दिए गए, जिन में ना तो पूरे टीचर दिए जाते हैं और वर्षों तक उनके मुख्य अध्यापकों, प्रिंसिपलों के पद भी खाली रखे जाते हैं। मूल निवासियों के बच्चों को घटिया शिक्षा देने के लिए उनको बिना परीक्षा दिए ही अगली कक्षा में प्रमोट कर दिया जाता है ताकि वे मनु वादियों के बच्चों के साथ कंपीट ही ना कर सकें।

ऐसी भेदभाव वाली शिक्षा देख कर के कांग्रेस, भाजपा और आप पार्टियां बड़े बड़े अमीरों के नालायकों को निजी शिक्षा संस्थानों से डिग्रियां दिला कर बड़े बड़े पदों पर तैनात कररही हैं। कुछ 85% मूल निवासियों में से भी अपना उल्लू सीधा करने के लिए दल्ले और दलाल पैदा किए जा रहे हैं, जो अपने निवासियों के वोट दिला कर के मनुवादियों की सरकार बनाते आ रहे हैं। ये अमीर चाहे मनुवादी हो या भारत के स्वार्थी अछूत मूलनिवासी, ये सभी मिलकर के गरीबों का खून चूस रहे हैं। ये गरीब चाहे ब्राह्मण, राजपूत और बानिया ही क्यों ना हो, इन सभी को गरीब बना करके रखा जा रहा है, ताकि अमीर मनुवादी और अछूत मूलनिवासी मिल कर अपनी मौज मस्ती की जिंदगी जी सकें और बाकी सभी जातियों के गरीब लोग गरीब ही रहे, इसलिए सभी जातियों के गरीबों को इकट्ठा हो कर के बहुजन मुक्ति पार्टी और उन के सहयोगी दलों की सरकार बनानी चाहिए और यही  मूल निवासियों की बहुजन मुक्ति पार्टी अर्थात थर्ड फ्रंट गरीबों का कल्याण कर सकता है। यही फ्रंट दोहरी शिक्षा व्यवस्था को ही खत्म कर सकता है, हर घर से  एक व्यक्ति को रोजी-रोटी का साधन उपलब्ध करवा सकता है, बेकार बंजर पड़ी हुई भूमि को भूमिहीनों में बांट कर के उन की रोजी-रोटी का प्रबंध कर सकेगा, गांवों में छोटे-छोटे उद्योग लगा कर के बेरोजगार बच्चों के लिए रोजगार उपलब्ध करवा सकेगा, इसलिए मेरी सभी जातियों के गरीबों से विनम्र अपील है कि वे जाति बंधन को त्याग करके, लुटेरे, समग्लरों की लूट को बंद  करने के लिए, जातीय बंधनों को तोड़ कर, एक मंच पर इकट्ठा होकर के बहुजन मुक्ति पार्टी के गठबंधन के उम्मीदवारों को ही पंच, उपप्रधान, प्रधान, बीडी सी, जिला परिषद मेंबर, एमएलए और सांसद बनाएं, तभी सभी को न्याय, रोटी, कपड़ा और मकान मिल सकेगा अन्यथा सभी सवर्ण, अवर्ण लोग नारकीय जिंदगी जीते जीते जी मर जाएंगे।

रामसिंह आदवंशी।

हिमाचल प्रदेश।


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