85% मूलनिवासी एकता बना कर रहो।

 मेरे प्यारे पचासी मूल निवासियों,

जय गुरुदेव!

बड़ी हैरानी की बात है कि भारत में हम 85% लोग हैं मगर हम कभी धार्मिक और राजनीतिक रूप से एक सूत्र में बंध करके जीवन नहीं जीते हैं, जब कि हमारा खून चूसने वाले, हमारी खून पसीने की कमाई पर पलने वाले लोग जंगलराज को अपना करके मूलनिवासियों का जीना दूभर करते आए हैं। ये मनुवादी लोग जंगलराज के सिद्धांतो पर चल कर जीवन बिताते हैं।ये लोग जैसे जंगल में बड़ा जानवर छोटे जानवर को खाता जाता है फिर  छोटे को छोटा खाता जाता है, उन्हीं जंगली जानवरों की नकल करके उनके नियमों को ही मनुवादी अपनाए हुए हैं और हम उस जंगलराज के नियमों के कारण प्रतिदिन मारे जाते हैं, पीटे जाते हैं, खून बहाया जाता है, और बड़ी निर्दयता के साथ हमारे लोगों के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है। हम केवल भैंसों के झुण्डों की तरह, हिरणों के झुंडों की तरह, शेर और चीतों का शिकार होते रहते हैं, मगर जो निडर भैंस या भैंसा शेर के ऊपर टूट पड़ता है, तो शेर की अंतड़ियों को निकाल कर के बाहर फ़ेंक देते हैं, यहां तक की दस बीस कुत्ते भी शेर को मार मार कर के गिरा कर खा जाते हैं मगर हम भारतीय मूलनिवासी 85% होकर के भी आपस में कभी भी धार्मिक एकता नहीं बनाते हम आदधर्मी, हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बुध, राधा स्वामी, निरंकारी बने हुए हैं मगर जो हमें गुलाम बना कर बैठे हुए हैं वे केबल 15% हिंदू बनकर धार्मिक एकता बनाए हुए हैं, इसी तरह हम कभी भी राजनीतिक एकता बना कर के संगठित नहीं होते हैं। हमारे राजनेता अपने आप को अवतार, देवी और देवता सिद्ध करने के लिए, अहंकारी बनकर के अलग-अलग अनेकों राजनीतिक पार्टियां बना कर के बैठे हुए हैं और जेल की सीखों में बंद होकर के मर रहे हैं,कुछ जेल की सीखों के भय से कांग्रेस, भाजपा की अर्थी को कंधा देते फिरते हैं। मगर कभी भी एक फ्रंट बनाकर के वोटर को इकट्ठा नहीं करते हैं, जबकि जो लोग 15% हिंदू है सभी इकट्ठे मिलकर के 85% गैर हिंदुओं को गुलाम बनाए हुए हैं। हमारे कागजी शेर कभी भी हमारे साथ अत्याचार करने वालों के खिलाफ, जैसे को तैसा करने के लिए आगे नहीं आते हैं। हम अपने शेर, चीते बिरसा मुंडा, छत्रपति शिवाजी, चमार रेजिमेंट के वीरों, महार रेजिमेंट के बहादुरों, शहीद उधम सिंह आदि के जीवन से सीख नहीं लेते हैं, जिन्होंने खून के बदले खून ले कर के अपने दुश्मन को सबक सिखाया था। खूनी क्रान्ति के समर्थक गुरु रविदास जी महाराज ने भी कहा है, कि "सतिसंगत मिली रहियो माधो जस मधुप मखीरा"। गुरु रविदास जी महाराज अपनी क्रांतिकारी वाणी और ओजस्वी भाषा में कहते हैं कि हे भारत के मूल निवासियो! आप सभी मधुमक्खियों की तरह रहो, यदि कोई याचक आपसे शहद मांगता है तो उस को शहद दे दो मगर अगर कोई जालिम मधुमक्खियों के छत्ते को पत्थर मारता है और पत्थर मारकर मधुमक्खियों की जान लेता है, तो मधुमक्खियां तुरंत अपने कातिलों को सबक सिखाने के लिए, दुश्मन के ऊपर टूट पड़ती हैं और दुश्मन को मार करके उसका खून पी जाती हैं। गुरु रविदास जी महाराज मधुमक्खियों का परमाण देते हुए आप को समझाते हैं कि आप भी प्यार देने वाले को प्यार दो और प्यार से उस के साथ व्यवहार करो, जो कुछ मांगता है उसको दे दो मगर अगर कोई आपके साथ अत्याचार, अनाचार, व्यभिचार, बलात्कार और कत्लेआम करता है, तो आप भी जालिम के साथ वैसा ही प्रतिकार लेते हुए, उस जालिम को दंड दो, तभी दुष्ट अत्याचारी का, बलात्कारी का हौसला पस्त होगा और शोषण, अत्याचार और बलात्कार करने से डरेगा मगर जब तक तुम अत्याचारी का मुकाबला नहीं करते हो तब तक जालिम, अत्याचारी आपके ऊपर अत्याचार करते ही रहेंगे, इसलिए आप सभी गुरु रविदास जी महाराज, कबीर साहिब, साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवालिया, स्वामी अछूतानंद जी महाराज शहीद उधम सिंह जी के बताए हुए रास्ते पर चलकर के स्वाभिमान की जिंदगी जीने के लिए हिम्मत करो, अपनी हीनता , कायरता और विवशता को त्याग दो, जानवरों के साथ जानवर बन कर मुक़ाबला करो।

मैं मानता हूं कि आप चार हजार वर्षों से पशुओं की तरह रखे गए हैं, पशु बनने के लिए विवश किया हुआ है, यहां तक कि आपको पशु बना ही दिया गया है, जिस के कारण आपका आत्मबल भी खत्म कर दिया गया है। आप को कंगाल बना कर के रखा गया था और आज भी आपको धन, धरती से वंचित करके रखा गया है, जिसके कारण आप ना तो अपनी फैक्ट्री लगा सकते हैं, ना उद्योग लगा सकते हैं, ना बड़े-बड़े विद्यालय, महाविद्यालय और विश्वविद्यालय बना सकते हैं, मगर यदि आप संगठित हो जाएं और संगठित होकर के अपने उद्योग, फैक्ट्रियां, विद्यालय और महाविद्यालय बना लें, उनमें अपने ही जीनियस मूलनिवासी लोगों को नियुक्त किया जाए, तो मूल निवासियों के अंदर जो हीनता की भावना आ चुकी है, कंगाली आ चुकी है, तत्काल खत्म हो जाएगी और मनुवादी विचारधारा का भी मुकाबला किया जा सकता है, तभी आप 85% लोगों को भय मुक्त करके मनुवादियों की गुलामी से छुटकारा दिला सकते हैं।

रामसिंह आदवंशी।

महासचिव बहुजन मुक्ति पार्टी हिमाचल प्रदेश।

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