गरीब सवर्णों गरीब अवर्णों से मिल जाओ
मेरे प्यारे देशवासियों,
सोहम, जय गुरुदेव!
भारतवर्ष ही एक ऐसा देश है जिस देश में 6743 जातियां खोज कर मनुष्य को मनुष्य का दुश्मन बनाया गया जा चुका है। यह कैसा देश है जिस में इंसान इंसान को छूना पाप मानता है। पाप समझता है। एक दूसरे के हाथों से खाना खाना नहीं चाहता है और ना ही खाता है, यहां तक कि चाय पान तक नहीं करना चाहता है और ना ही करता है परंतु जब राज सत्ता छीनने की बात आती है, तो चोरी छुपे यह राक्षस रात के अंधेरे में और बंद कमरे में इन अछूत लोगों के घरों में सब कुछ खा पी जाते हैं मगर जब संगत और पंगत में खाना खाने की बात आती है, तब यह लोग अछूतों के घरों में खाना नहीं खाते हैं। यहां तक उच्च शिक्षित सवर्ण भी अछूतों के साथ संगत में, पंगत में बैठ कर खाना नहीं खाते हैं और ना ही पानी तक पीते हैं। जब नारी शोषण की बात आती है, तो सभी मनुवादी जात पात को भूल कर के अछूत नारियों के साथ बलात्कार तक कर लेते हैं, तब छुआछूत सारी समाप्त हो जाती है अर्थात किसी को भी छुआछूत नजर नहीं आती है। छुआछूत अछूत पुरुष के साथ ही की जाती है, इस के पीछे केवल और केवल अछूत लोगों को गुलाम बनाए रखने की केवल साजिश है नजर आती है, ताकि इन लोगों को अपनी इच्छा अनुसार गुलाम बना कर के अपना स्वार्थ सिद्ध करते रहें, यदि छुआछूत होती तो यह मनुवादी लोग कभी भी अछूत नारी के साथ स्पर्श नहीं करते और ना ही किसी अछूत नारी के साथ बलात्कार होता, मगर केवल कुछ राक्षस लोगों के मन की उपज है, कि भारत के मूल निवासियों का शोषण करने के लिए जाति व्यवस्था का निर्माण किया जाए, जो लोग इन जातियों में मेधावी होते हैं उन लोगों को भी ये मनुवादी लोग अपने स्वार्थ के लिए घर बुलाकर बुलाकर अपना काम सिद्ध कर लेते हैं मगर उनका प्रयोग करके उन को औरत से मरवा देते हैं, जिस के साक्षात प्रमाण महाराज़ा बलि, महात्मा रावण, डॉक्टर भीमराव अंबेडकर आदि है। महात्मा रावण से सोने की श्रीलंका का निर्माण करवा कर उस को इसलिए मार दिया गया कि उस की लंका को ये लोग छीनना चाहते थे। डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को प्रयोग करके, संविधान लिखवा करके, बाद में उन को मरवा दिया गया। इसी तरह अभी-अभी गरीबों के मसीहा साहब कांशीराम जी को भी इसीलिए मरवा दिया गया कि वे अमीर और गरीब को एक समान करना चाहते थे। वे किसी एक अछूत के नेता नहीं थे। वे सभी सवर्णों और अवर्णों के गरीबों को एक समान करना चाहते थे। उन के मन में जातिवाद नहीं था। वे मनुवादी गरीब ब्राह्मणों, राजपूतों और वाणीयों को भी, अछूत गरीबों के बराबर करना चाहते थे मगर मनुवादी अमीरों ने जिन की प्रवृत्ति राक्षस प्रवृत्ति है, उन को साहब कांशी राम जी की विचारधारा पसंद नहीं आई और उनको भी मरवा दिया गया। उनके मरने के बाद किसी जांच एजेंसी को कोई आदेश नहीं दिया गया, कि साहब कांशीराम की मृत्यु के कारणों की जांच पड़ताल की जाए अपितु जिन लोगों ने उनकी मृत्यु की जांच पड़ताल करने की आवाज उठाई, उस आवाज को भी दबा दिया गया। वास्तव में सभी जातियों के अमीरों की एक साजिश है, जो सभी जातियों के गरीबों को गुलाम बनाकर के अपनी मौज मस्ती करते आए हैं और करते रहना चाहते हैं। अमीर किसी गरीब को अपने समान देखना ही नहीं चाहते हैं। जिसके कारण भारतवर्ष में असंतोष फैलता जा रहा है। आज सारे देश में जातिवाद, धर्म बाद का उन्माद फैलाया जा रहा है। भारतवर्ष में हिंदू मुस्लिम के बीच खाई खोद करके आपस में लड़या जा रहा है, ऊंच-नीच की खाई को खोद करके कुछ लोग नीच लोगों को मांलिंचिंग करके मारते जा रहे हैं और संविधान को ठेंगा दिखा करके, किसी के ऊपर कोई भी कानूनी कार्रवाई नहीं की जा रही है। संविधान को किनारे रख कर के गुंडागर्दी का शासन चल रहा है, इसी प्रकार के शासन को राक्षस राज कहा जाता है। यदि राक्षस राज इसी ढंग से चलता रहा तो भारतवर्ष विनाश के कगार पर पहुंच जाएगा और जिस प्रकार श्रीलंका में आज अमीर और गरीब आमने सामने आकर के शासन और प्रशासन को भी मौत के घाट उतारने के लिए उतारू हो गया है और शासन प्रशासन अपने राजमहल और घर छोड़ कर के भाग रहा ह, ठीक वैसी ही स्थिति भारतवर्ष में हो जाएगी, इसलिए भारतवर्ष के सभी जातियों के गरीबो एक मंच पर इकट्ठा हो जाओ, अपनी सभी जातियों को भुला करके एकता स्थापित कर लो और केवल और केवल उच्च शिक्षित गरीब को ही विधायक और सांसद बनाओ। गुंडे और हिस्ट्रीशीटर को कभी भी वोट मत डालो, ताकि पवित्र संसद भवन में उच्च शिक्षित, अच्छे इंसान पहुंच कर आप की गरीबी को दूर करने के लिए नया संविधान बनाएं।
राम सिंह आदवंशी
महासचिव।
बहुजन मुक्ति पार्टी हिमाचल प्रदेश
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