।। मृग मीन भृंग पतंग कुंचर।।
।। मृग मीन भृंग पतंग कुंचर।। ।।राग आसा।। गुरुओं के गुरु, गुरु रविदास जी महाराज ने राग आसा में वैज्ञानिक आधार पर तर्कसंगत चिंतन करते हुए प्राणी जगत की रचना, विकास और विनाश का वास्तविकता चित्रण निम्नलिखित तुक में किया है। मृग मीन भृंग पतंग कुंचर, ऐक दोख बिनास।। पंच दोख असाध जा महि, ता की केतक आस।। १।। गुरु रविदास जी महाराज फरमाते हैं कि हिरण, मछली, भ्रमरा, पतंगा और हाथी केवल एक ही रस का स्वाद लेते हैं, एक रस की बुराई ही इन प्राणियों नष्ट कर देती है। हिरण को शिकारियों की हेड़े की ध्वनि सुनने से कान रस, मछली को कांटे में जकड़े हुए भोजन को देख उस की जीभ में जिव्हा रस, भ्रमरे को फूल सूंघने के कारण नाक रस, पतंगे को दीपक की लौ देख कर नेत्र रस, हाथी को गड्ढे के ऊपर कल्पित हाथिन की तस्वीर दिखाने पर कामवासना रस ही मौत के मुंह मे ले जाया करते हैं अर्थात एक एक बुराई के कारण ही इन प्राणियों का विनाश हो जाता है। मगर जिस आदमी के बीच पांच असाध्य विकार अर्थात काम, क्रोध, मोह, लोभ, अहंकार के कारण कान रस, जीभ रस, नाक रस, र...