।।तत्त्व सिद्धांत।। भाग दस।।

 

सटीक वाणी श्री गुरु रविदास जी और तत्त्व सिद्धांत।।
                 ।।भाग नौ।।
      ।।लेखक प्रोफेसर लालसिंह।।
        ।।सृष्टि सृजन का सिद्धांत।।
गतांक से आगे। इस शब्द के बीच कई सिद्धांतों का सृजन संभव हुआ है। गुरु रविदास जी के इस शब्द के बीच एक ओंकार "सोहम" का सिद्धांत मूर्तिमान होता है और "सोहम" से ही सृष्टि के सृजन का सिद्धांत प्राप्त होता है। इस शब्द की पहली तुक के पहले लफ्ज से ही गुरुजी स्पष्ट कर देते हैं कि "पारब्रह्म एक ही है।" तोही एक वचन है और अर्थ होता है, पारब्रह्म एक ही है, इसी तुक का दूसरा लफ्ज मोही है और अर्थ होता है "मैं" भाव, पारब्रह्म की अंश, जीवात्मा। इस तरह पहली तुक का अर्थ स्पष्ट हो जाता है कि परमात्मा और जीवात्मा एक ही हैं। कोई भी भेद नहीं है।, यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है, कि यह जीव आत्मा विकारों से मुक्त हुई आत्मा नहीं है, बल्कि ये जीवात्मा तो अभी विकारों के प्रभावों के बीच आई ही नहीं। अभी तक यह कंज कवारी जीव आत्मा है, इसी कारण स्थान बदली संभव हो सका है।
      "तोही मोही, मोही तोही" (93)
ऊपर दिए गए हवाले से स्पष्ट है कि निर्गुण तोही से ही सगुण मोही की रचना हुई है, वह गुप्त से ही प्रकट होती है। शूक्ष्म से स्थूल के बीच परिवर्तन का सिद्धांत (तोही से मोही के स्थान परिवर्तन का सिद्धांत) गुरु ग्रँथ साहिब में दर्ज है।वैज्ञानिक आइंस्टाइन ने प्रयोगों के आधार पर इसी सिद्धांत को हिसाब के फार्मूले द्वारा लोगों के आगे पेश किया गया है, E=MC वर्ग, भाव कि जितनी भी उतपत्ति हुई है, वह सारी शक्ति से ही हुई है और शक्ति गुप्त है। ये शक्ति हर कण कण में समाई हुई है। (एक ही से एक अनेक होई बिस्थारियो आन रे आन भरपूरि सोऊ।।)
साईंस का हवाला देखो 21 और 2j"
(नोट:--बरैक्ट वाले शब्द के पीछे पाए गए हैं--लालसिंह।)
हवाला 2।
Materialization means generally speaking transformation of energy in to particales with a rest mass. Materialiazation played a vital role in the every period of the universe (The Big Bang) about 10,000 million years.
__________________________________
1गुरवाणी और विज्ञान, प्रोफेसर त्रिलोचन सिंह, फिजिक्स विभाग, खालसा कालेज पटियाला, पृष्ठ नंबर-26।
भाव:---भौतिकीकरण साफ शब्दों के बीच शक्ति से पदार्थ के बीच बदलाब की क्रिया है।भौतिकीकरण की ब्रह्मण्ड के पहले के समय तकरीबन 10, 000 लाख साल पहले (बड़े धमाके के समय) बड़ी महत्त्वपूर्ण भूमिका है।By: Josip kieczek and Peter Jakes
From:The universe and planet Earth. Page-43
हबाला 2j
By Einstein Equation E=mc वर्ग (Where E is Energy, M is mass and c is velocity of light ) energy is proportional to mass.
भाव: वैज्ञानिक Einstein के फार्मूले के अनुसार
शक्ति= पुंज ×(रोशनी की गति) वर्ग
शक्ति और पुंज का आपस में परस्पर संबंध है।
By Stephen W Hawking
From: A Brief History of time from the Big Bang to black Holes. Page:-- 114" वर्ग
कर के गिआनी ब्रह्म विचार।
जोती अंतरि धरिआ पसारू।।
(972) गुरु कबीर जी।
                   ।।और।।
एक ही से एक अनेक होई बिस्थारियो ।
आन रे आन भरपूरि सोऊ।। रहाउ।।
(1293) गुरु रविदास जी।
सारा प्रसार ज्योति से ही हुआ है, ज्योति से भाव है, शक्ति प्रभु या बेअंत।  विज्ञान के मुताबिक भी यही है कि पदार्थ की रचना शक्ति से हुई है। यदि हम किसी वस्तु के पुंज को M के साथ लिख लें, तब यह देखने के लिए कि इसके बीच कितनी शक्ति है, इस पुंज को c2  के साथ गुना किया जाता है, c से भाव रोशनी की रफ्तार है।
M c वर्ग मादा =E शक्ति
Universe is created from energy.
Mc =E3
नोट:बरैक्ट वाले शब्द के पीछे पाए गए हैं-लालसिंह।
इस सिद्धांत (E= mc) वर्ग को हम और स्पष्ट करते हैं। शक्ति से पदार्थ पैदा हुआ है। मनुष्य भी पदार्थ ही है, इसलिए मनुष्य ही शक्ति है। जब मनुष्य अपने भौतिक शरीर को शक्ति (energy) के बीच बदलने की सामर्थ्य पैदा कर लेता है, तो उस में समूचे ब्रह्मण्ड की शक्ति (Energy) पैदा हो जाती है। जब गुरु रविदास जी "संत अनंतहि अंतर नाही" कहते हैं तब वे उपरोक्त सिद्धांत की ही परिपक्वता करते हैं। साइंस के अनुसार ब्रह्मांड की रचना भी शक्ति से ही हुई है। शक्ति गैसों के ठोस रूप में तबदील होने के कारण एक बहुत बड़ा आग का गोला अस्तित्व में आया है। इस शक्ति के कारण ही इस आग के गोले में बड़ा धमाका (Big Bang) हुआ है। इस गोले के अनेकों टुकड़े बन गए और ब्रह्मांड अस्तित्व में आया है, इसलिए शक्ति से पदार्थ की ही उत्पत्ति हुई है। इस उत्पत्ति के बीच मनुष्य भी शामिल है। स्पष्ट है कि शक्ति से ही मनुष्य की उत्पत्ति हुई है।
इसलिए मनुष्य ही शक्ति है। जो मनुष्य अपने शरीर (पदार्थ) को शक्ति के रूप में तबदील कर लेते हैं, तभी वह सारे का सारा शक्ति बन जाता है। गुरु रविदास जी ने इसी शक्ति को पारब्रह्म (प्रभु) कहा है, जिससे सारी सृष्टि की रचना (सृजन) हुआ है, इसी कारण गुरु रविदास जी स्पष्ट करते हैं, कि संत जन अपने शरीर (पदार्थ) को शक्ति में ही तबदील कर लेते हैं और वह शक्ति ही बन जाते हैं। क्रमशः।
अनुवादक।
राम सिंह आदवंशी।
हिमाचल प्रदेश।

Comments

Popular posts from this blog

गुरु रविदास जी की क्रांतिकारी वाणी दोधारी है।

क्रांतिकारी शूरवीर गुरु रविदास जी महाराज।।

।।राम बिन संशय गाँठि न छूटे।।