गुरु रविदास जी का इतिहास और मनुवादी षड्यंत्र।।

गुरु रविदास जी महाराज का इतिहास और मनुवादी षड्यंत्र।।
गुरु रविदास जी महाराज और सदना कसाई की गोष्ठी स्थल के दर्शन करने के लिए एक तंग गली से गुजरना पड़ता है मगर हम जैसे तैसे वहाँ पहुँचे तो कुछ स्मृतियों के सिवाए वहाँ कुछ नहीं मिला। हम ने सोचा था कि वहां गुरु रविदास जी महाराज और, सदना जी की स्मृति में मूर्तियां स्थापित की गई होंगी, गोष्टी स्थल पर गुरु रविदास जी महाराज और सदना जी के आसन सुशोभित हो रहे होंगे मगर वहां तो केवल कुछ मीटर खाली जगह ही यह बता रही थी, कि कभी यहां गुरु रविदास जी महाराज और भगत सदना कसाई ने शास्त्रार्थ करने के लिए गोष्टी की थी। ठीक इस से संलग्न विशाल विश्व काशी नाथ मन्दिर का निर्माण कर के तेती करोड़ देवी देवताओं की विचित्र मूर्तियों को स्थापित कर के मनुवादी शासन प्रशासन ने दोनों क्रांतिकारियों का इतिहास गंगा नदी में डुबो रखा है।
मनुवादी षडयंत्र:---- दन्त कथाओं, जन श्रुतियों, ऐतिहासिक प्रमाणों और क्यासों से ज्ञात होता है, कि गुरु रविदास जी महाराज के पंच तत्वों में विलीन होते ही मनुवादियों ने गुरु जी के इतिहास को नेस्तनाबूद कर दिया था, उन के साहित्य को ढूंढ ढूंढ कर जला दिया था, उन के द्वारा निर्मित गोल्डन टैंपल को ध्वस्त कर दिया था, ये सारे कयास सत्य सावित हुए हो चुके हैं और मनुवादी फितरत और भेदभाव की पोल खुलती हुई नजर आ रही है।
विश्व काशी नाथ भवन:--- जो सत्य था, जो प्रमाणित था, जो इतिहास में दर्ज है, वह सारे का सारा दफन कर के असत्य की दीवार पर निर्मित तेती करोड़ कल्पित देवी-देवताओं की काल कराल मूर्तियों का भंडार गुरु रविदास जी महाराज और सदना कसाई के धार्मिक गोष्ठी स्थल पर सजा संवार कर पुलिस की देख रेख में सुरक्षित कर के रखा हुआ है ताकि कोई भी अपना अधिपत्य जमाने की हिम्मत ही ना कर सके। दोनों ही अलौकिक महापुरुषों का कोई नामोनिशान तक भी नहीं छोड़ा गया है। गुरु रविदास जी महाराज और सदना कसाई के इतिहास को समाप्त किया जा चुका है। इस भवन को देखने से स्पष्ट होता है, कि वहां गुरु रविदास जी महाराज और साधना नामक कोई भी महापुरुष नहीं आए थे और ना ही वहां किसी किस्म का कोई सबूत और प्रमाण छोड़ा गया है कि कभी ये स्थान गुरु रविदास जी महाराज और सदन कसाई का तीर्थ रहा है।
मनुवादी कुटिल विचारधारा का सामना करना होगा:--- मूलनिवासी जनता को मनुवादी षड्यंत्र को समझना जरूरी है क्योंकि आर्यों के आने के बाद भारत को सोने की चिड़िया के स्थान पर हैवानों का गढ़ बना दिया गया है। आदर्श भारत के मूलनिवासी शासक सत्य और ईमान के मार्ग पर चलने वाले आदर्श शासक हुए हैं जिनको राक्षसों ने छल बल से मार कर सत्ता छीनी हुई है और उन्हीं आदर्श शासकों को इन्हीं विदेशी राक्षसों ने राक्षस सिद्ध कर रखा है, जिस षड्यंत्र को समझना जरूरी है और नए और वास्तविक इतिहास का निर्माण करने के लिए मूलनिवासी साहित्यकारों को आगे आना होगा अन्यथा इसी तरह मनुवादी इतिहास को बंद कर बदल बदल करके काल्पनिक इतिहास की रचना करते रहेंगे और भारत के मूलनिवासी आदर्श शासकों का नामोनिशान तक नहीं रहेगा। भारत के सभी धार्मिक और राजनैतिक नेताओं को मनुवादियों का साथ छोड़ कर के अपने पांव पर खड़ा होकर के अपने खोए हुए स्वर्णिम भारत को पुनः निर्मित करना होगा।
रामसिंह आदवंशी।




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