43 भाग।। चँवर वंश के देव तुल्य सम्राट गुरु रविदास।।
कामवासना के शिकार राजा ने मरने की तैयारी:--- राजा विजयपाल सिंह ने अपने मंत्रियों और फौज को भेज कर के अपनी मौत की तैयारी कर ली। मूर्ख राजा नहीं समझ रहा था कि कुटिया में मेरी मौत पहुंच चुकी है। वह काम वासना का शिकार हो कर के केवल सुंदरी को ही देख रहा था
राजा की बुरी नीयत का गुरु जी को आभास:---- कुटिया में बैठे गुरु रविदास जी महाराज कामी, क्रोधी, विलासी राजा विजय पाल सिंह के इरादों को समझ गए थे, कि राजा कोई अनिष्ठ कार्य करने जा रहा है। सचमुच उसी समय मंत्री अपने सेनापति और सेना को लेकर चल पड़े। गुरु जी कुछ चिंतित इसीलिए हो गए कि कहीं कुंवारी कन्या गंगा के साथ कोई अभद्र व्यवहार ना कर दे, गुरु जी की इस दुविधा को गंगा पहले ही भांप गई क्योंकि वह भी दिव्य शक्ति संपन्न शक्ति थी। गंगा गुरु जी की दुविधा को खत्म करती हुई, उन्हें स्वामी ईशर दास जी महाराज के शब्दों में बयाँन करती हुई फरमाती है, जिस का वर्णन गुरु आदि प्रगास ग्रंथ में किया गया है -----
भनहे भागिरथी गुरु रविदास से फिकर करत ना तोहे।
ऐसे जुलमि कामी पाप भूप जउ मुग्ध लीन जल करोहे।
गंगा गुरु रविदास की मानसिक चिंता को समझ गई:--- गुरु रविदास जी महाराज की मानसिक चिंताओं को समझते हुए गंगा, गुरु रविदास जी महाराज से वार्तालाप करते हुए कहती है, कि श्री गुरु जी आप को किसी प्रकार की कोई भी चिंता करने की जरूरत नहीं है। आप कोई भी फिकर मत कीजिए। मैं इस जुल्मी पापी, कामी राजा को ऐसा सबक सिखाऊंगी, कि इस का नामोनिशान मिट जाएगा। ये राजा विजयपाल सिंह बुरी तरह धरती के बीच जलमग्न हो कर के मर जाएगा।
मालाबाड़ दिहात में सेना करै पकड़ हथियार।
घेरा पाया जाय के करदे चारों ओर मारो मार।
सेना मालाबाड़ में मारो मार करने लगी:---- राजा विजयपाल सिंह के मंत्री और उस की सेना गांव मालाबाड़ में हथियारों को हाथों में पकड़ कर लहराते हुए पहुँच गई। हत्थियारों से लैस हो कर के फौज ने गुरु रविदास जी महाराज और कन्या गंगा को चारों तरफ से घेर लिया और बड़ी क्रूरता के साथ मारो मार करने लगे।
भूप मंत्री आश्रम अंदर दाखल जावत होई।
गुरु रविदास दिव्य देवाधुन गोष्ट दर्शन दोई।
राजा के मंत्री कुटिया में घुस गए:----राजा के मंत्री अपनी सेना और सेनानायकों के साथ गुरु रविदास जी महाराज की कुटिया में जबरन घुस गए, जिस से सारी कुटिया में आतंक फैल गया मगर अकेले गुरु रविदास जी महाराज और कुंवारी कन्या गंगा की सुरक्षा में कोई भी हिंदू आगे नहीं आया, इस के बाबजूद भी दोनों का मनोबल तनिक भी नहीं डगमगाया। इसी बीच उन को कुटिया में आकाशवाणी हुई, जिस में उन्हें दैवी शक्तियों की एक विचार गोष्ठी के दर्शन हुए।
भूप मंत्री वेख के अदभुत भये हैरान।
हवालात दिये डारि आगाड़ी बैठे आन।
राजा के मंत्री कुटिया में कौतुक देख कर हैरान:---- अत्याचारी राजा के मंत्री कुटिया में हो रही अलौकिक गोष्टी को देख कर के बड़े हैरान हो गए और देखते ही देखते कुटिया में सभी कैद हो गए, जिस से राजा के मंत्रियों और सेना को अपने प्राणों की के लाले पड़ गए।
ऐह तों अघम की बात है जा सेहर किआ इन्हें।
निवल तोड़ के आ गए किआ जाने किआ तिन्हे।
कुटिया में अलौकिक चमत्कार:---- गुरु रविदास जी महाराज की कुटिया को चारों तरफ से राजा की सेना ने घेर रखा था। सेना और सेनापतियों ने कुटिया के तालों को तोड़ कर के अंदर ना जाने क्या-क्या करना शुरू कर दिया, उस समय उन की रक्षा के लिए आदि पुरुष के सिवाय कोई नहीं था, ऐसे हालातों में वहां एक अलौकिक घटना घट गई, जिस के कारण राजा के मंत्री, सेनापति और काँप उठे। आदि पुरुष की दिव्य सेना के दर्शन करते ही सभी कांप उठे। मंत्री और सेना को इतना भय लग रहा था कि वे सभी मारे जाएंगे।
रामसिंह आदवंशी।
अध्यक्ष,
विश्व आदि धर्म मंडल, हिमाचल प्रदेश।
Comments
Post a Comment