चँवर वंश के देव तुल्य सम्राट गुरु रविदास।। भाग्ग 22।।

चँवर वंश के देव तुल्य सम्राट गुरु रविदास जी।। भाग 22।। कांशी के समीप गड़ा घाट के ऊपर ब्राह्मणों, राजपूतों और वैश्यों की गरमा गरम बहस के बाद निर्णय लिया गया, कि बालक रविदास को भक्ति मार्ग से हटाने के लिए तत्काल कोई कार्रवाई की जाए। सभी उग्र स्वभाव वाले लोगों ने मानवता को त्याग कर हैवानियत का रास्ता तैयार कर के बालक रविदास को पूजा पाठ से हटाने के लिए, मारने का भी सुझाव दे दिया, जिस को सभी ने स्वीकार कर लिया और जिस के लिए नृशंस कातिलाना योजना भी बनाई जाने लगी, जिस के बारे में गुरु आदि प्रगास ग्रंथ के रचयिता स्वामी ईशर दास जी महाराज ने फरमाया है कि:--- ।।त्रिभंगी छंद।। कर दे बामण मशवरा आई के बैठ गए। घाट पर सभी जाई के। भेजो कोई आदमी उन्हां समझाऊँण नूं। शंख ते घड़िआल पूजा जी हटाऊँण नूं। जा छड के चमार साडे विच आ लऐ। वेद ते पुराण शास्त्र पढ़ाआ लऐ। मन्ने जे ना कैहणा जानों दईऐ मार। जेहड़ा होवे साथी छडौ ना चमार जी। नहीं ता अगे वांगू अग लावो चल के। बैठ गए चमार साडी पूजा मल के। समझाबो कोई जा के जान नूं बचा लऐ। मंगू दा भतीजा अलिया मरासी ऐ। ऐस नूं तां भेजो गल जा के दसी ऐ। अलिया तूं जामी चल बडे बेहड़े नूं। दसीं जा के उह छड देन झेड़े नूं। दस सानू झट जो उह सुणा लऐ। मंन के तां अलिया सी आ लिआ। आई के चमारां नूं कठे करा लिआ। कांशी विच होई है पंचैत भारी सी। बैठ के तां सुणा के गल दसां सारी जी। कैहणा मनो नहीं दिन माड़े आ लऐ। पंचायत का संदेश वाहक भेजने का निर्णय:---- गर्म दल के उग्र स्वभाव वाले वक्ताओं के सुझावों के अनुसार सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया, कि किसी संदेशवाहक को कालू माजरा में भेजा जाए और बालक रविदास और उस के परिवार को अपने निर्णय से अवगत करवाया जाए, कि पंचायत ने आप सभी को सोचने समझने का अवसर दिया है, इसलिए आप पूजा पाठ और सत्संग करना तत्काल बंद कर दो, शंख और घड़ियां बजाना बंद कर दो क्योंकि यह काम केवल और केवल तिलकधारी पुरोहितों का ही है, जिस को दूसरा कोई वर्ण नहीं कर सकता है। कोई ब्राह्मण नहीं बन सकता:---- संदेशवाहक, चँवरवंशियों को यह संदेश दे दो, कि कोई भी दूसरे वर्ण का व्यक्ति अर्थात किसी भी जाति का कोई भी व्यक्ति ब्राह्मणों का काम ही नहीं सकता है और ना ही कोई ब्राह्मण बनने की कोशिश कर सकता है। कोई दूसरी जाति का व्यक्ति ब्राह्मणों के समाज में घुस नहीं सकता है, ना ही कोई वेद, पुराण पढ़ सकता है और ना ही किसी को पढ़ा सकता है। निर्णय को ना मानने पर मौत की सजा:---उपस्थित ब्राह्मणों ने संदेशवाहक को कहा, कि जा कर के बालक रविदास और उस के परिवार को पंचायत का निर्णय सुना दे साथ यह भी बता दें, कि यदि पंचायत के निर्णय के अनुसार पूजा पाठ करना, शंख और घंटियां बजाना और ब्राह्मण भेष बना कर यदि धर्म कर्म का काम बंद नहीं किया गया तो फिर मार दिया जाएगा। यदि कोई छोटा, बड़ा और निकट सम्बन्धी भी सहायता करेगा, तो उस को भी जान से खत्म कर दिया जाएगा। आदेश का पालन नहीं हुआ तो घर जला दो:---सभी ब्राह्मण आग बबूला हो कर कह रहे थे, कि ये चँवरवंशी हमारी पूजा पर अधिकार कर के बैठ गए हैं, इसी अनाधिकार चेष्टा के परिणाम भुगतने ही पड़ेंगे। बालक रविदास और उस के गांववासियों को भी यह बता दिया जाए यदि आप ने पंचायत के निर्णय को नहीं माना, तो जिस प्रकार पहले भी गांव को आग के हवाले कर के जला दिया गया था, वैसे ही इस बार भी सारे गांव में आग लगा कर के जला दिया जाएगा। मंगू का भतीजा अलिया:---मंगू का भतीजा अलिया मरासी था। पंचायत ने अलिया मरासी को कहा, अलिया तूं जा और बड़े बेहड़े में जा कर समझा बुझा दे, कि इन गल बातों और झेड़ों को त्याग दो। झट चला जा और आ कर हमें बता कि वे क्या जबाब देते हैं। बात मान कर अलिया चला गया:---- पंचायत की बात मान कर अलिया बडे बेहड़े की ओर चल पड़ा। अलिये ने जाते ही गाँव के सभी लोगों को इकठ्ठे कर लिया और बताने लगा, कि कांशी में मनुवादियों की एक बड़ी पंचायत हुई है, जिस के बारे में सुन लो और मेरी बात मान लो अन्यथा आप के बुरे दिन आने वाले हैं। बडे बेहड़े का प्रमाण:-----गुरु रविदास जी महाराज के बेहड़े को बड़ा बेहड़ा कहा गया है, जिस से स्पष्ट होता है कि गुरु जी का परिवार और गाँव संपन्न चँवर वंशी शासक वर्ग का था। रामसिंह आदि वंशी। अध्यक्ष, विश्व आदि धर्म मण्डल, हिमाचल प्रदेश।

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