चँवर वंश के देव तुल्य सम्राट गुरु रविदास।। भाग 21।।
चँवर वंश के देव तुल्य सम्राट गुरु रविदास जी ।।भाग 21।।
बालक रविदास जी की शादी हुए कुछ ही दिन हुए थे कि आग बबूले तिलकधारी फिर पागल हो उठे और फिर पंचायत करने की तैयारी करने लग पड़े। मरासी अलिया को बुला कर सभी पण्डे, पुजारियों तिलकधारियों और मनुवादियों को गढ़ा घाट पर इकठ्ठे करने के लिए कहा गया। अलिया भी तुरन्त गाँव में चला गया और डांऊडी पीट कर लोगों को मीटिंग की सूचना देदी, जिस के अनुसार सभी गुंडे वहाँ इकत्रित हो गए। गढ़ा घाट पर ब्राह्मणों की पंचायत के बारे में स्वामी ईशर दास जी महाराज, गुरु आदि प्रगास ग्रंथ में फरमाते हैं कि------
।।शलोक।।
चारे वरन आ सेमदे बामण ते भूपाल। सुन सुन के हो गए अग तोऊँ लाल। पूजा साड़ी ले गिआ जाति दा चमिआर। शंख घड़िआल बजामदा वर्ण बामन लिआ धार। सारे इकट्ठे होई के मसबरा ऐह करवाया। जिस समय नूं सी उड़ीकदे बकत हुंण आया। ब्राह्मण करदे गलां ऐह किथे डूब मरिए जाई। सुण सुण गलां रविदास दिआं शर्म बड़ी है आई। परमानंद रविदास दा सेवक इक कैंहदा सुनिआ यार। मर जाऊ निघर जाऊ बामण सिर साडे धिरगार। इक कहे वेद बनाया नईया नवीना नाम उस का गामण। ब्रह्मा ते और उह उचा बण बैठा जात चमार कहांमण। ऐह गलां सभ खोटियां बामण जात ना रही। रविदास दे हटामण नूं बात करो कोई सही।
चारों वर्णों की चौपाल पर बैठक:---- बालक रविदास जी के विवाह होते ही चारों वर्णों के हैवाँन ही नहीं राक्षस भी, मनुवादी तिलकधारी, राजे, महाराजे भी एक बालक के खिलाफ इकठ्ठे हो कर उस को डराने धमकाने के लिए उग्र रूप धारण कर आपस में सलाह मशबरे करने लग पड़े। बालक रविदास की सामाजिक, धार्मिक, राजनैतिक क्रांतिकारी के आग़ाज की बातें सुन सुन कर आग के अंगारों से भी अधिक लाल होने लगे। तिलकधारी और पण्डित पुजारी, पुरोहित रो रो कर अपने दुखड़े एक दूसरे को बताने लगे, कि चर्मकर्म और कपड़े का व्यापारी हमारा पूजा पाठ का काम छीन रहा है। शंख, घण्टे, घंटियाँ और घड़ियाल बजाता है, जिन की अलौकिक ध्वनि सुन कर हमारे कलेजे पर सांप लोटते हैं। हम जिंदा ही मर जाते है। धोती और तिलक लगा कर ब्राह्मण बन गया है।
उचित समय आ गया:---- सभी मनुवादी एक स्वर में बोल रहे थे, कि जिस समय की हम प्रतीक्षा कर रहे थे, वह आज आ गया है। ब्राह्मण अपने एकाधिकार के छीने जाने के कारण इतने व्यथित थे, कि राजपूतों और वैश्यों को भी बालक रविदास के खिलाफ भड़काने और उकसा रहे थे। राजपूत तो कभी भी दिमाग से काम ही नहीं लेते कि क्या उचित है, क्या अनुचित, जिस प्रकार इन्हें उकसाया और भड़काया जाता है, वैसे ही भड़क जाते हैं, ये मण्डल कमीशन के खिलाफ हुए आंदोलन से हम ने भी अपनी आँखों से देखा और सुना है कि एक गोस्वामी नामक ब्राह्मण ने दिल्ली में नाम मात्र का आत्मदाह करने का नाटक रचा था मगर सारे भारत के राजपूत भड़क उठे और सारे देश में खून खराबे पर उतर आए थे, अपने राजपूत प्रधानमन्त्री विश्व नाथ सिंह को प्रधानमन्त्री पद से उखाड़ फैँका और ब्राह्मण भी यही चाहते थे, कि राजपूत प्रधानमन्त्री को उखाड़ कर किसी ब्राह्मण को ही प्रधानमन्त्री बनाया जाए, क्योंकि ब्राह्मण किसी भी अन्य जाति के लोगों को सेनाध्यक्ष, मुख्य न्यायधीश बनते हुए देखना ही नहीं चाहते, जिस नीति का शिकार राजपूत विश्व नाथ प्रताप सिंह हो गया, इस से सिद्ध होता है कि, बालक रविदास जी के खिलाफ जो ब्राह्मणों ने कुचक्र चलाया, षडयंत्र रचने के लिए ढोंग रचा था, वह सत्य ही था मगर ब्राह्मण चँवर वंश के इतिहास को नहीं जानते कि इस वंश के लोग सत्य के मार्ग पर चलते हैं और आदपुरुष अपने जांवाज वीरों का साथ देता आया है। इस वंश के सपूतों ने कोरे गाँव में अपनी कमर मे बंधे झाड़ू और कुजे में थूकने का हिसाब किताब चुकाया था, इंग्लैंड में जा कर पार्लियामेंट में घुस कर जलियांवाला कांड का प्रतिशोध लेलिया था। साहिब कांशी राम और उन के अनुयायी वीरों ने मनुवाद का अंधा धन्धा चौपट कर के चँवरवंश का शासन बहाल करना शुरू कर दिया है।
पण्डित परमानंद का पागल शिष्य:---- पंडित परमानंद का एक शिष्य आपे से बाहर हो कर कह रहा था कि बालक रविदास ने हमारे नाक में दम कर रखा है, हमारा सारा मान सम्मान छीन कर खुद ही ब्राह्मण बन बैठा है, हमारा सारा रोजगार छीन लिया मगर हम चुपचाप बर्दास्त करते आ रहे, हमारे धिक्कार छीने जा रहे हैं। हमें कुछ करना चाहिए अन्यथा हमें हाथ मलने पड़ेंगे।
बालक रविदास का नया नवीना वेद:---- पगलाया ब्राह्मण कह रहा था कि, बालक रविदास ने तो एक नया नवीना वेद भी बना लिया है, उस के अनुसार वह लोगों को पूजा पाठ करना सिखा रहा है। यदि शूद्र भी भक्ति करने लगे तो फिर हमारा क्या हाल होगा, ये बात आज भी घट रही है, जब पंजाब के अछूतों ने नेहरू से मुसलमानों द्वारा छोड़ी गई चार लाख एकड़ जमीन मांगी थी, तब पंजाब के सवर्णों ने तत्काल अपने प्रदेश के केंद्रीय कानून मंत्री प्रताप सिंह कैरों को बुला कर कहा था कि, यदि शूद्र जमीन के मालिक बना दिए तो हम चोरी डाके मारने पर विवश हो जाएंगे, हमारे खेतों में कौन काम करेगा, कौन हमारी गुलामी करेगा, जिसे सुन कर कानून मंत्री कैरों ने नेहरू को ज़मीन बाँटने से रोक दिया था।
बालक रविदास ब्रह्मा से भी बड़ा बन बैठा:--- कोई कह रहा था, कि बालक रविदास जी तो ब्रह्मा से बड़ा बन बैठा है और वह कोई अनूठा बेगमपुरा बताता है, कि हम वहाँ के निवासी हैं। ये सारी बातें अच्छी नहीं हैं, इसलिए कोई ऐसा निर्णय लो जिस से उस की हरकतों पर लगाम लगाई जाए। यदि उस को रोका टोका नहीं गया, तो ब्राह्मण जाति का मान सम्मान और औकात नहीं बचेगी, सब कुछ मिट्टी में मिल जाएगा। रविदास को पर्दे से हटाने का कोई ढंग निकालो।
रामसिंह आदिवंशी।
अध्यक्ष,
विश्व आदि धर्म मण्डल, हिमाचल प्रदेश।
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