चँवर वंश के देव तुल्य सम्राट गुरु रविदास जी।। भाग 18।।

चँवर वंश के देव तुल्य सम्राट गुरु रविदास जी।।भाग 18।। गुरु रविदास जी महाराज ने जिन शूद्रों के लिए दिन रात अपने प्राणों की बाजी लगा कर क्रांतिकारी आंदोलन शुरू किया था उन शूद्रों ने गुरु रविदास जी महाराज को नहीं पहचाना और उन को एक साधारण व्यक्ति समझ कर के उन का सहयोग तक नहीं किया था। मगर गुरु जी अपनी धुन के पक्के थे। अपने लक्ष्य को सामने रख कर के अग्निपथ के ऊपर आगे से आगे बढ़ते ही जा जाते थे। उन की अलौकिक शक्तियों को देख कर के मनुवाद की चूलें हिल गई थी और मनुवादी ये भी समझ रहे थे, कि बालक रविदास कोई आम साधारण बालक नहीं है, इसलिए तत्कालीन बड़े-बड़े प्रसिद्ध प्रकांड पंडित उन के दर्शन करने के लिए बाबा कालू दास के निवास पर आते थे। ये लोग बालक रविदास जी के बारे में अनुमान लगाते रहे, कि वास्तव में ही बालक रविदास आध्यात्मिक शक्ति के पुंज है! जिन के बारे में तत्कालीन प्रकांड पंडित परमानंद स्वामी ईश्वर दास जी महाराज के शब्दों में बालक रविदास के बारे में विचार व्यक्त करते हुए कहते हैं, कि-- ।।शलोक।। मछ कच्छ वराह हयग्रीव ते नरसिंह कृष्ण राम। सब अवितारों से गुर दीर्घ परमानंद कहे आम। अपने किये दा शब्द उचारिआ ते नर किआ प्रणाम सुन कीना। अन भावनी भगत ना उपजी भूखे दान ना दीना। परमानंद दा सुन उपदेश कश्मीर दा देवादास। सैंण भी परमानंद दे सेवक प्रचार करन रविदास। श्री गुरु रविदास उपमा होई सुआई। सुनकर कांशी बामन दवैश ने अग भड़काई। कांशी तउ कालू माजरा डेढ़ मील सी बाट। मशबरा करदे करदे आई के बैठे उपर घाट। इक ने आई के दसिआ ब्याह रखिआ रविदास। कुज कु दिन लंघन दिउ फेर करांगे गल बात। परमानंद की अध्यक्षा में मीटिंग:---- बालक रविदास जी के दर्शन करने के उपरांत तत्कालीन सर्वश्रेष्ठ प्रकांड पंडित परमानंद मस्तक की रेखाओं को देख कर और ज्योतिष विचार कर कहता है, कि बालक रविदास मत्स्य, कश्यप, वराह, हयग्रीव, नरसिंह, कृष्ण और राम आदि अवतारों से बहुत बड़े अवतार हैं। ज्योतिष और शास्त्रों के ज्ञाता परमानंद ब्राह्मण, बालक रविदास जी के जीवन चरित्र को पढ़ कर के पहचान जाता है, कि यह बालक सभी अवतारों से श्रेष्ठ, सर्वोच्च अवतार हैं, क्योंकि जब पंडित परमानंद कहता है कि मत्स्य, कश्यप, हयग्रीव, नरसिंह, कृष्ण और राम उन के सामने बौने हैं और सब से बड़े अवतार हैं, तो इस से समस्त शूद्र वर्ग को अनुमान लगा लेना चाहिए कि गुरु रविदास जी महाराज कितने दैवीय शक्ति संपन्न अवतार और क्रांतिकारी योद्धा हुए हैं। परमानंद द्वारा बालक रविदास को प्रणाम:---- प्रकांड शास्त्र ज्ञाता परमानंद बालक रविदास जी के तेज और अध्यात्मिक ज्ञान को समझ कर, उन के दर्शन करने के उपरांत उन्हें प्रणाम करता हुआ ब्राह्मणों से कहता हैं कि अनैच्छिक भक्ति से कोई लाभ नहीं होता और दान दक्षिणा लेने वालों को भी भक्ति करने से कुछ नहीं मिलता है। भूखे मरने वाले भी दान नहीं दे सकते अर्थात बालक रविदास जी पूर्णरूपेण आर्थिक, धार्मिक रूप से पूर्ण संपन्न हैं। वे सर्वज्ञ, सम्पूर्ण ज्ञान विज्ञान के अथाह भंडार हैं। परमानंद के इस उपदेश को सुन कर उन के सेवक काश्मीर का सेवादास और सैंन भी बालक रविदास जी के ज्ञान का प्रचार प्रसार करने के लिए घर से निकल पड़े। परमानंद के प्रचार से पण्डित परेशान:---- जब परमानंद ने भी बालक रविदास जी से प्रभावित हो कर उन का प्रचार प्रसार शुरू कर दिया और उस के कारण बालक रविदास की शोभा दिनों दिन बढ़ती ही गई जिस से आहत हो कर सारा तिलकधारी समाज पागल हो गया और ईर्षा और द्वैष् से जलने लग पड़ा। सारे पण्डित कांशी में इकठ्ठे हो कर विचार विमर्श करने लग पड़े कि किस प्रकार बालक रविदास से मुक्ति पाई जाए? तिलकधारी गढ़ा घाट पर:---- कालू माजरा से कांशी गढ़ा घाट डेढ़ मील की दूरी पर था, जहां सभी ब्राह्मण इकठ्ठे हो कर मीटिंग करने लगे। सभी अपनी रोज रोटी पर पड़ रहे डाके से व्यथित हो कर आप बीती बताने लगे। कोई कहता यदि ये बालक इसी तरह जजमानों को भड़काता रहा तो हमें रोटी के भी लाले पड़ेंगे। कोई कहता भाई भले ही ये बालक ही है मगर उस की बातें तर्कपूर्ण होती हैं, भक्ति करने का अधिकार सभी को है, हम किसी को भक्ति करने से रोकने वाले कौन होते हैं? उस की करामातें देख कर सारे लोग उस के कायल हो चुके हैं। मूर्ख लोग सत्य को उस समय समझते हैं, जब मौत सिरहाने आकर हिसाब किताब करने बैठ जाती है, इसीलिए कुछ सिरफिरे तर्क संगत बातों पर ध्यान ना देकर अपने एकाधिकार को बचाने के लिए मरने और मारने की बातें करते जा रहे थे। विवाह के बाद निर्णय करो:---- मीटिंग के दौरान किसी ने आ कर कहा, कि भाई रविदास के विवाह को कुछ ही दिन बाकी हैं, इसीलिए उस का विवाह होने दो, कुछ दिन प्रतीक्षा कर लो फिर उस से निपट लेंगे। बालक रविदास के विवाह की बात सुन कर सभी उतेजित तिलकधारी ठण्डे पड़ गए और गुंडागर्दी की योजना कुछ समय के लिए स्थगित कर दी गई। विवाह के बाद दुबारा मीटिंग होगी इस आशय से सभी ब्राह्मण घरों को वापस चले गए। मनुवादी गुंडागर्दी करते आए हैं:----- मनुवादी आरम्भ से ही गुंडागर्दी करते आए हैं, जो आज भी जारी है। आज भी ये लोग गुंडागर्दी के स्थान पर माबलिंचिंग करते जा रहे हैं। बालक रविदास को भी इसी गुंडागर्दी से डराने धमकाने की योजना बनाई जा रही थी मगर जो खुद ही गुंडों का मालिक हो उस से कोई भी गुंडागर्दी नहीं कर सकता। बालक रविदास जी से तो कोई भी, किसी भी क्षेत्र में, किसी भी प्रकार का मुकाबला कर ही नहीं सकता था, फिर इन ब्राह्मणों की क्या औकात थी। रामसिंह आदवंशी। अध्यक्ष, विश्व आद धर्म मण्डल, हिमाचल प्रदेश।

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