चँवर वंश के देव तुल्य सम्राट गुरु रविदास जी।। भाग दस।।

चँवर वंश के देव तुल्य सम्राट गुरु रविदास जी।। भाग दस।। बालक रविदास का जन्म उत्सव:--- गुरु रविदास जी अलौकिक शक्ति के स्वामी हुए हैं। जब जन्म लेते समय दाई भानी ने गुरु जी को स्पर्श करते समय उन के मुख के आभा मंडल के दर्शन किये थे, तब उस की आँखों की लुप्त रोशनी वापस आ गई थी, जिस से विस्मित हो कर दाई भानी ने स्वामी ईशर दास जी महाराज के शब्दों में कहा था कि----- पैदा होया बालक रविदास जी "जोत प्रगटी आकाश"। दाई कैहंदी इह होया खास। इह तां रब दा नूर कोई आया। जोत प्रगटी अपर अपारे जी। होया चानंन जगत सारे जी।। दाई भानी ने फरमाया, कि बालक रविदास जी के प्रकाश होने से समूचे आकाश में ज्योति प्रकट हो गई। सारे संसार में रोशनी ही रोशनी हो गई। भानी दाई जो गल सुनाए। कई वाल तां मैं जमाए। ऐसा वाल ना कहाए। मैं तां अघम रूप देख पाया।। ये कोई साधारण बालक नहीं जन्मा है, ये सभी अंधों को रोशनी, गूँगों को जुबान, नंगों को वस्त्र, भूखों को भोजन और बेसहारों को सहारा और गुलामों को गुलामी से मुक्त करेगा। बाद में भानी के ये वचन सत्य सिद्ध हुए। बाबा कालू दास की खुशियाँ:----पिता संतोष दास जी, माता दिआरी जी, बाबा कालू दास, दादी अपने लाल को देख कर के फूले नहीं समा रहे थे । बाबा कालू दास जी ने अपने खजाने की सारी तिजोरियां खोल कर के गरीब लोगों को दान देना शुरू कर दिया--- बाबा कालू जी थैलियां लिआँउदे हैं। दान लखां ते हजाराँ दा कराउँदे हैं।।बाल जन्मे दिया खुशियां मनाऊँदे हैं। बिच जामे दे फूले ना समांऊँदे हैं। राम नाम नूं तां बैठ के धिआँऊँदे हैं। बधाई देन नूं लोक चा नाल आऊँदे हैं। सब खुशियां मनाउँन। नाले बाजे हैं बजाऊँन। नारां मीठे गीत गांऊँन। सोहणा सत्संग राम दा महल बिच लगया। बधाइयां देवन सामियां हैं। बाबे कालू ने वहियाँ कढवाइयाँ है। ब्याज मूल ते माफ करवाया है। धन धन कैंहदे जनमिया साईयां है। जन्म दे सार तां बंधन तुड़वाइयां हैं। लखां दान कीते मंझां ते गाईयां है। अहंकारी परमानंद का षड्यंत्र:----जब गुरु रविदास जी महाराज की चमत्कारी खबर पाखण्डी तिलकधारी परमानंद के कानों में पड़ी तो वह गुस्से से तमतमा उठा और लाल पीला हो गया। वह बुड़बुड़ाता हुआ कहता है कि मैं बालक रविदास को अपने तन्त्र मंत्र के जाल में उलझा लूँगा और हीरे-मोती बना कर दिखाऊंगा। जिस से वह लालची मेरा शागिर्द बनने के लिए विवश हो जाएगा, इस प्रकार उस की सारी चमत्कारी को भी रफ्फु चक्कर कर के ही दम लूंगा----- सुन के करामात गुरु की परमानंद चल आया। वेखां जा के करामात नूं कि ऐमे ई शोर मचाया।। जब ब्राह्मण परमानंद बालक रविदास जी के पास पहुँच गया तो फिर कहने लगा कि----- जोड़ के सुनामाँ त्रिभंगी छन्द जी। वेखण गुरां नूं आया परमानंद जी। सीता राम कह के बैठ गया आई के। दसो रविदास केहड़ा जी धाई के। गुरु रविदास आया साधुआँ पास सी। वाल उमर सात साल रविदास सी। श्री रविदास ने सी आदेश बोलिआ पंडत परमानंद अपना सी पोल खोलिआ। दस करामात शक्ति विखाए के। तां ही चल आए सुन तां सुनाई के। शक्ति वेखण आए दे गल खास सी।। राम नाम बिन होर केहड़ी शक्ति। श्री रविदास दसे सच्ची भगती। परमानंद हसे लोकी दुहाई पाई आ। झूठ मूठ खंभ ते डार बनाई आ। एह की जाने शक्ति ते करामतां जी। तूंबी च बनावे परमा हीरे लाल जी। आह लै रविदास अमीर आए काल जी। रिद्धि सिद्धि दस के मैं मगर ला लवाँ। श्री रविदास नूं शागिर्द बना लमाँ।। सोहणा रंग ढंग सदा रहू दास जी।। जीवन दास दी कुंडी पई साहमने। सारा ब्राह्मांड गुर दिखाया बाहमने। मान ते अहंकार कीता दूर जी। होया शर्मिंदा ना रही कसूर जी। हरि हीरा छड ना रख होर आस सी। परमानंद डिगिआ गुर चरनी आई के। बाणिआ गुर का सेवक भेटा नूं रखाई के। सच्चा नाम दसिआ गुरां ने जब जी। पहुँच गया बेगम शहर तब जी। बिन मुख जपना सी नाम आ गया। सच्ची ते समाधि दा सी भेद पा लिआ। गुरां दा उपदेश करै दिन रात सी। बालक रविदास की अपरंपार शक्ति:----गुरु रविदास जी महाराज की अपरंपार शक्ति को देख कर के केवल ब्राह्मण समाज ही नहीं अपितु सारा मनुवाद ही उन का बैरी बन गया था और इसीलिए उन्होंने गुरु रविदास जी महाराज को अपमानित करने के लिए कहीं जूते बनाते हुए, कहीं जूते मरम्मत करते हुए, भीख मांगते हुए लिख डाला। ऐसे ही उन के कई प्रकार के चित्र और तस्वीरें बना कर, कई प्रकार की छोटी छोटी भद्दी, फुहड़ फिल्में बनाकर के अपना गुस्सा निकाला है मगर यह घटना तब होती रही है, जब गुरु रविदास जी से पहले मूलनिवासियों के पास लिखने की के लिए कोई लिपि नहीं थी मगर जब से गुरु रविदास जी महाराज ने गुरुमुखी लिपि तैयार की है, तब से उन के सेवक उन की सच्ची और क्रांतिकारी वाणी को जन जन तक पहुंचा कर सत्य को उजागर कर रहे हैं और मनुवाद को नंगा कर के समाज के सामने प्रस्तुत कर रहे हैं। अब वह दिन दूर नहीं जब गुरु रविदास जी महाराज की महाक्रांति जन जन तक फैल कर भारतवर्ष में समाजवाद ले आएगी और तिलकधारियों का सारा आडंबर, पाखंड और ढोंग मिट्टी में मिल जाएगा, मगर गुरु रविदास जी के अनुयायियों को दिन-रात प्रयत्न कर के उन की क्रांतिकारी वाणी को जन-जन तक, क्रांतिकारी ढंग से प्रस्तुत करना होगा और मनुवादियों की लिखी हुई मनगढ़ंत, काल्पनिक कथाओं को त्याग कर के सत्य को सामने लाना होगा। ब्राह्मणों द्वारा लिखी अमनोवैज्ञानिक कथाओं को नकार कर, तर्कसंगत ढंग से प्रस्तुत करना होगा। राम सिंह आदवंशी। अध्यक्ष, विश्व आदधर्म मंडल, हिमाचल प्रदेश।

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