चँवर वंश के देव तुल्य सम्राट गुरु रविदास जी।। भाग न।।

चंवर वंश के देव तुल्य सम्राट गुरु रविदास जी।। भाग नौ।। गुरु रविदास जी का नाम:---- गुरु रविदास जी महाराज के नाम का संबंध रवि से अर्थात सूर्य से जोड़ा गया है और शायद उन का जन्म भी रविवार को ही हुआ होगा क्योंकि पूर्व में जब मूलनिवासी लोगों के घर में जो बच्चे पैदा होते थे, तो अक्सर उन का नामकरण उन के जन्म दिन के अधार पर ही कर दिया जाता था। इसी कारण गुरु जी का नाम भी रविदास रखा गया था। कुछ लोग उन के नाम के बारे में संदेहास्पद टिप्पणियां करते रहते हैं और उन में कुछ सच्चाई भी है क्योंकि गुरु रविदास जी को कहीं रैदास कहा जा रहा है, कहीं रामदास कहा जा रहा है, तो कहीं रोहिदास कहा जा रहा है, इस प्रकार ना जाने कितने शब्दों का प्रयोग गुरु रविदास जी महाराज के लिए किया जा रहा है परंतु यह शब्द स्थानीय भाषाओं से लिए गए लगते हैं क्योंकि जब हम गुजरात गए तो वहां गुरु रविदास जी को रोहिदास के नाम से पुकारते सुनें गए, जिस से अनुभव हुआ कि गुरु जी के नाम की विभिन्नता कुछ स्थानीय बोलियों के आधार पर भी हुई है। मनुवादी फितरत:--- भारत के मनुवादी लोग मूलनिवासी अर्थात भारत के आदिवासी लोगों को गुलाम बना कर के रखते आए हैं। मनुस्मृति के काले कानूनों के अनुसार भारत के मूलनिवासी लोग ना तो अच्छा खा-पी सकते थे, ना बोल-सुन सकते थे और ना ही अच्छे नाम रख सकते थे, इसी कारण यदि राजस्व रिकॉर्ड को देखा जाए तो मूलनिवासी लोगों के नाम कीड़े, मकोड़ों, मच्छरों आदि के नामों के अनुसार, तिडू, मकोडू, मछरू, तिखू, मखू, वीरू, धीरू, रामू, मचलू आदि ही मिलते हैं। इन लोगों ने नामों को भी छोटा रखने के लिए विवश कर दिया था। अपने लिए रामलाल, कृष्ण, रामचंद्र और मूल निवासी लोगों के लिए रामू, श्यामू लिखने के लिए विवश कर रखा था, इसलिए गुरु रविदास जी महाराज के साथ भी इन लोगों ने ऐसा ही किया है, कि इन को रैदास, राम दास, रोहिदास आदि नामों से पुकारा गया है। मनुवादी मूलनिवासी महापुरुषों से ईर्षा करते हैं:--- यूरेशिया से आए युरेशियन आर्यों के बीच कोई भी बुद्धिमान महापुरुष आज तक पैदा नहीं हुआ है, इसी कारण इन लोगों ने भारत के बुद्धिमान महाऋषि वाल्मीकि, ऋषि व्यास देव, डाक्टर भीमराव अवेदकर, बाबू जगजीवन राम, साहिब कांशी राम जी जैसे महा पुरुषों से काम ले कर के उस का लाभ खुद लिया है। इसीलिए इन महापुरुषों के इतिहास के बारे में कई प्रकार के संदेश पैदा कर के इतिहास को धूमिल किया जाता आ रहा है। इसी कड़ी में गुरु रविदास जी महाराज के साथ की गई साजिशों, छलों का भी पर्दाफाश होता है। उन के अधिक नाम रखने के कारण लोगों में यह भ्रम जाल फैलाया गया है, कि ये महापुरुष काल्पनिक है। जन्म:---- गुरु रविदास जी महाराज का जन्म माघ सुदी पंद्रास, विक्रमी संवत १४३३ में हुआ है। यह दिन भारत के मूलनिवासी इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया दिन है, क्योंकि इस दिन जन्मे गुरु रविदास जी महाराज ने भारत के गुलामों के गुलाम लोगों को ब्राह्मणों, राजपूतों, वानियों और मुसलमान बादशाहों से आजाद करवाने का ऐतिहासिक काम शुरू किया था। विशेष कर ब्राह्मणों ने जो तीनों वर्णों के ऊपर एकाधिकार जमा कर के शोषण शुरू किया हुआ था, उस से निजात पाने के लिए गुरु रविदास जी महाराज ने सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक क्रांति को जन्म था। मुस्लिम शासकों को नकेल:---- मुसलमान शासकों के सामने भारत के राजाओं और महाराजाओं ने आत्मसमर्पण कर रखा था। भारतीय जनता को मौत के मुंह में धकेल रखा था। इस युग में भोली भाली भारतीय जनता की रक्षा करने वाला कोई नहीं बचा था, ऐसे हालात में गुरु रविदास जी महाराज ने गुलामों को मुक्त करवाने के लिए खूनी क्रांति का शुभारंभ किया था, गुरु रविदास जी ने अपनी रचना में फरमाया था कि--- "सतिसंगत मिली रहियों माधो, जस मधुप मखीरा " जिस के फलस्वरूप मूलनिवासी मधुमक्खियों की तरह मर मिटने और दुश्मन को मारने के लिए युद्ध के मैदान में उतर पड़े थे। खूंखार बादशाह सिकंदर लोधी और बादशाह बाबर को उन के सामने आत्मसमर्पण करना पड़ा था। गुरु रविदास जी महाराज के आदेशानुसार इन खूंखार, कातिल बादशाहों ने आदिवासियों के ऊपर अनाचार, अत्याचार करना बन्द कर के, भारतवर्ष को बेगमपुरा बनाना शुरू कर दिया था। भारत के मनुवादी ब्राह्मणों को गुरु रविदास जी महाराज की क्रांति से मन में बेचैनी बढ़ने लग पड़ी थी क्योंकि वे समझ रहे थे कि अब एक दिन ऐसा भी आएगा जब हमारी हेरा फेरी, छल कपट और बेईमानी समाप्त हो जाएगी और भारत की जनता गुरु रविदास जी के मार्ग पर चल कर क्रांति की ओर अग्रसर होती ही जाएगी और हुआ भी यही। यदि गुरु रविदास जी का जन्म नहीं होता तो आज भी भारत के मूलनिवासी मनुवादी चक्की के नीचे, अशिक्षित रह कर पिसते ही रहते। ब्राह्मणों के वर्णबाद के ही शिकार बने रहते। वे छ: सौ साल पूर्व पचासी प्रतिशत मूलनिवासी जनता को स्वतन्त्र करवा गए मगर आज संसद और विधान सभाओं में बैठे हजारों दल्ले और दलाल स्त्रियों, अनुसूचित जाति, जन जाति, पिछड़ी जाति और मुसलमानों को मनुवादी आतंक से बचा नही पा रहे, जो विचारणीय विषय है। अकेले प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी के नाक में दम कर रखा है, सभी के मौलिक अधिकार खत्म कर रखे हैं, रोजी रोटी खत्म कर रखी है, कोरोना का आतंक फैला कर जनता को भयभीत कर रखा है मगर ये भेड़िये उन लोगों के अधिकारों की रक्षा नहीं कर पा रहे हैं, जिन के लिए गुरु रविदास महाराज ने, खूनी, कातिल राजाओं, महाराजाओं और बादशाहों से आरक्षण जैसे अधिकार ले कर दिलाए थे। रामसिंह आदवंशी। अध्यक्ष, विश्व आदधर्म मंडल। हिमाचल प्रदेश।

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