वंश का अंतिम वीर योद्धा।। भाग 14।।

  चँवर वंश का अंतिम वीर योद्धा भाग।।14।। पराजित बादशाह सिकन्दर लोधी और उपस्थित लाखों लोगों ने गुरु रविदास जी महाराज द्वारा तैयार आवेहयात (अमृत जल) को बड़ी श्रद्धा से ग्रहण कर लिया, जिस से उन की आँखों में दिव्य ज्योति प्रकट हो गई। सभी गुरु महाराज की जय जयकार करते हुए बोल रहे थे, रविदास शक्ति जिंदावाद, जिंदावाद, रविदास शक्ति जिंदावाद, जिंदावाद। सारी संगत के मुख पर अलौकिक नूर नजर आ रहा था।                    ।। शब्द।। बेगम शहर को दर्श दिखाया। जित्थे मखलूकात उपजाया। खुल गईयाँ दिव अखियाँ अमीरत पी पी के।१। हिंदू मुसलम लखाँ तारे। जावाँ सतगुरु दे बलिहारे। कीते शत्रु ते उपकारे *सोहम* शब्द दृड़ाया बेगम ही ही के।२। करोपि कार जे डारदे। रंक भूप छिन में मारदे। आई पुन तारदे। करोपि डी डी के।३। बादशाह की दिव्य दृष्टि खुल गई:---जब गुरु रविदास जी महाराज, बादशाह सिकंदर लोधी पर मेहरबान हो गए तब उन्होंने साध संगत के साथ उन को भी बेगमपुरा शहर के दर्शन करवा कर आवेहयात उत्पन्न कर के वहाँ लाखों हिंदूओं मुसलमानों को पिलाया, जिस से सब की आँखों में दिव्य दृष्टि उत्पन्न हो गई, जिस से प्रभावित हो कर बादशाह सिकन्दर लोधी कहता है कि, मैं गुरु रविदास जी महाराज के ऊपर बलिहार हूँ, आज तक धरती पर कोई ऐसा सर्वगुण सम्पन्न पीर, आलिया नहीं आया है, जिस ने दुश्मन का भी उपकार (भला) किया हो। राजे, महाराजे तो अपराधी को उस के अपराध के कारण उसे मार ही देते हैं मगर गुरु रविदास जी महाराज ने तो अपराधियों को भी माफ कर के उन का कल्याण कर दिया।                      ।। शब्द।। बेगमपुरा शहर को नाऊँ। दुख अंदोहूं नहीं तिहि ठाऊँ। ना तसवीस खिराज ना मालू। खउफ खता ना तरस ज्वालु।। अब मोहि खूब वतन राह पाई। ऊहाँ खैरि सदा मेरे भाई।। (रहाउ)।। काईम दाईम सदा पातशाही। दोम सेम एक सो आही। आबादान सदा मसहूर। ऊहाँ गनी बसहि मामूर।। तिऊँ तिऊँ सैल करहि जिऊँ भावे। महिरम महल ना को अटकावे। कहि रविदास खलास चमारा। जउ हम शहिरी सो मीत हमारा। बेगमपुरा में सुख शांति:----गुरु रविदास जी महाराज फरमाते हैं, कि बेगमपुरा शहर में किसी को भी कोई दुख, दर्द, पीड़ा और क्लेश नहीं होगा और ना ही किसी को किसी भी प्रकार की कोई चिंता और समस्या होगी। चारों ओर सुख और शांति का राज होगा। सभी को रोटी, कपड़ा और मकान अवश्य उपलब्ध होगा। जनता को किसी विजेता राजा की घबराहट नहीं होगी।  श्रेष्ठ देश होगा:----गुरु जी फरमाते हैं, कि अब मुझे ऐसा श्रेष्ठ और उत्तम देश मिल गया है, जहां पर सदा खैर अर्थात कुशलता और सुख मिलेगा। बेगमपुरा शहर में परमानंद प्राप्त होगा। वैश्विक सरकार में आदर्श मानतावादी आचरण किया जाएगा, वहां ना कोई बादशाह होगा और ना ही कोई राजा प्रजा का रिश्ता। सभी निवासियों को शाश्वत, सुख, शांति, प्रेम, प्यार, स्नेह, सम्मान और आनंद मिले गा। गुरु रविदास जी महाराज फरमाते हैं, कि इस देश में सभी लोग स्थाई रूप से रहेंगे, इस वैश्विक देश में कोई सीमा नहीं होगी और शाश्वत शक्ति ही बेगमपुरा का लक्ष्य होगा। बेगमपुरा में अध्यात्मिक जनता:--- इस विश्व देश में आध्यात्मिक और दिव्यशक्ति सम्पन्न लोग रहते हैं। सभी अध्यात्म ज्ञान से परिचित और उस के लिए प्रसिद्ध होते हैं। वहां पर सभी संपन्न सुसंस्कृत, सभ्य, अमीर, दूरदर्शी, सदाचारी और आत्मिक शक्तिसंपन्न लोग रहते हैं। जात अभिमानियों को फटकार:------- गुरु रविदास महाराज जाति का घमण्ड करने वालों को सबक सिखाते हुए फटकारते हैं, कि हम तो खलास अर्थात पवित्र चमार हैं। गुरु जी जातियां बनाने वालों को भी सबक सिखाते हुए कहते हैं, कि जिन लोगों को आप ने नीच शूद्र वर्ण कहा है, उन के मन में भी अपना जातीय गौरव और स्वाभिमान जागृत होता है। किसी के अंदर चमार कहने से कोई आत्मग्लानि या घृणा ना हो, उस के लिए गुरु रविदास जी फरमाते हैं, कि जो हमारे बेगमपुरा शहर में निवास करते हैं, वही हमारे श्रेष्ठ मित्र और श्रेष्ठ नागरिक हैं। यही चार शब्दों का *बेगमपुरा शहर कोउ नाऊँ* ही हमारा आदर्श संविधान है। राम सिंह आदवंशी। अध्यक्ष, विश्व आदि धर्म मंडल। हिमाचल प्रदेश।

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