चँवर वंश क देव तुल्य सम्राट गुरु रविदास जी।। भाग 12।।

चंवरवंश के देवतुल्य सम्राट गुरु रविदास जी।।भाग12।। बालक रविदास का शंख बजाना:----बालक रविदास जी की आध्यात्मिकता तो जन्म से ही दिखाई देने लग पड़ी थी। चार साल की उम्र में उन्होंने पूजा पाठ आदि शुरू कर दिया था, इसी समय उन्होंने धोती, तिलक लगा कर शंख बजाना भी शुरू कर दिया था, उन के शंख बजाने का अंदाज ऐसा अद्वितीय था कि कांशी के सारे लोग हैरान होने लगे। माता पिता की खुशी का ठिकाना नहीं रहा:---अपने होनहार बालक की अदाओं को देख कर परिवार के सदश्यों की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा था। पंडित गोपाल ने जो कहा था कि ये बालक चारों वर्णों का गुरु कहलागा और जाति-पाती, छुआछूत को खत्म कर के एक ही पंगत में सभी को खाना खिलाएगा, उस भविष्यवाणी का अनुमान लगाया जाने लगा। अपने ही घर में वे प्रतिदिन धार्मिक सत्संग करने लग पड़े थे। उन के सत्संग की धूंम चारों ओर फैलती ही जा रही थी। सभी शूद्र उन के प्रवचन सुनने के लिए उन के घर पर इकठ्ठे हो जाते थे। उन के सत्संग को सुन कर लोगों के मन में आत्म बल पैदा होने लगा। गुलामों के अंदर धार्मिक और सामाजिक ज्ञान की ज्योति जलने लगी। तिलकधारी आपा खो बैठे:----सुवह चार बजे उठ कर बालक शंख बजाता तो शूद्रों के मन में उल्लास और तिलकधारी और धोतिधारी ब्राह्मणों के दिलों पर सांप लोटने लग पड़ते। उन की तरह ब्राह्मण शंख नाद नहीं कर पाते थे। कहाँ सतपुरुष के शंख की ध्वनि और कहाँ लोगों के खून पसीने की हराम की कमाई खाने वाले तिलकधारियों के शंखों की आवाज। चार साल तक ब्राह्मण लोग बालक रविदास के पत्थरों को छाती पर बर्दास्त करते रहे, उन के सत्संग से आहत होते रहे मगर जब बालक आठ वर्ष का हो गया और शूद्र सत्संग सुन कर ईश्वर के प्रति समझ रखने लग पड़े तब ब्राह्मण, बालक रविदास जी के साथ दो दो हाथ करने पर उतारू हो गए। गढ़ा धाट पर तिलकधारी इकठ्ठे हो गए:---- जब ब्राह्मणों की बर्दास्त करने की शक्ति समाप्त हो गई, प्रतिशोध की अग्नि चर्म सीमा पर पहुँच गई, ईर्षा का पानी सिर से भी ऊपर बहने लगा तब सभी तिलकधारी गढ़ा घाट पर इकतृत हो गए। सभी ने अपने अपने विचार रखे। कुछ ने कहा कि रविदास अभी बालक है, इसीलिए उस को चारों वर्णों के अधिकारों की जानकारी नहीं है इसीलिए उस समझाने का प्रयास करना चाहिए। किसी ने इन विचारों का समर्थन किया, तो किसी ने विरोध किया, किसी ने कहा कि यदि बालक को ज्ञान नहीं है तो उन के बाबा कालू दास और पिता संतोष दास तो वच्चे नहीं हैं, वे भी कपड़े, खिलौने और चमड़े के कारखानों के मालिक हैं, वे तो चारों वर्णों की सीमाओं के बारे में अच्छी तरह से अवगत हैं, क्या वे अपने बालक को समझा नहीं सकते? इसीलिए हमें कोई कड़ा निर्णय करना ही होगा। ब्राह्मण पंचायत का फरमान:----- सभा में उपस्थित ब्राह्मणों ने निर्णय लिया कि पहले बालक रविदास के परिवार को हिदायत दी जाए कि वे बालक को धोती, पहनना बन्द करवाएं, मात्थे पर तिलक लगाने से रोक दें और शंख बजा कर सत्संग करना छुड़वा दें अन्यथा यदि ऐसा करने का अपराध जारी रहा तो हम कड़ी कार्यवाही करने पर विवश हो जाएंगे। कथा, प्रवचन करना हमारा जन्म सिद्ध अधिकार हैं और चँवरवंशियों का चर्म कर्म ही है, वे वही अपना कर्म करें, इसलिए रविदास और उस के समूचे परिवार को, ब्राह्मण पंचायत के फैसले की जानकारी देने के लिए आलिया मरासी को भेजा जाए। ये निर्णय सर्व सम्मति से पास हो गया और मरासी अलिये को संदेश देने के लिए भेज दिया गया। मरासी अलिया का संदेश देना:---- गुस्से में तमतमाता हुआ मूर्ख मरासी अलिया बालक रविदास की बस्ती में पहुँच गया और जोर से चिल्लाता हुआ बाबा कालू दास जी को आवाजें मारने लगा। बाबा कालू जी अपने कपड़े के कारखाने में कर्मचारियों के साथ बातचीत करने गए हुए थे। जब मूर्ख मुआ मरासी अलिया चिल्ला- चिल्ला कर थक गया, तब वह बालक के पिता संतोष दास को आवाजें लगाने लगा मगर वे भी आज चंमड़ा फैक्ट्री के कार्य का जायजा लेने के लिए कारखाने में गए हुए थे, तब हार कर बालक रविदास को ही अपना संदेश देता हुआ कहता है, कि हे बालक! कल से आप धोती, तिलक लगा कर शंख बजाना बन्द कर देना और सत्संग करना भी बन्द कर देना, ये निर्णय ब्राह्मण पंचायत ने लिया और हाँ! ये भी कहा है, कि पूजा पाठ करना केवल और केवल ब्राह्मणों का कार्य और अधिकार है, इसीलिए दूसरा कोई भी ये काम नहीं कर सकता, अगर ऐसा करने का किसी ने दुःसाहस् किया तो अंजाम बुरा होगा। बालक रविदास का मरासी को जबाब:--- बालक रविदास ने मरासी अलिये को कहा, मरासी सुन! जा तूं अपनी पंचायत को बता दे कि पूजा पाठ करना सभी का हक है और हां! ये भी बता देना कि हम किसी के बाप के गुलाम नहीं हैं और ना ही शंख भी किसी के बाप से लिया हुआ है, ना ही हम किसी के घर पर शंख बजाते हैं, हम अपने घर पर शंख बजाते हैं, हम किसी के बाप का सत्संग चुरा कर लोगों को नहीं सुनाते हैं, हम तो अपनी वाणी से अपने लोगों को सत्संग करते हैं और सुनाते हैं। जा कर अपनी पंचायत को बता दो, कि हमारा पहरावा पहनना जारी रहेगा और हमारा सत्संग भी चलता रहेगा। जलता भुनता मरासी वापस चला गया:--- बालक रविदास की जली कटी बातों को सुन कर मुआ मरासी घर वापस चला गया और पंचायत को आपबीती सुना दी, जिस से आहत हो कर सारे ब्राह्मण परेशान हो गए। बालक की तीखी, ओजस्वी और क्रांतिकारी बातों से मनुवादी समाज के घास फूस के बने मकान में आग भड़क उठी। बालक का ही नहीं सारे चँवरवंशी लोगों को सबक सिखाने के लिए आगामी बैठक करने का निर्णय ले लिया गया। रामसिंह आदवंशी। अध्यक्ष। विश्व आदधर्म मण्डल, हिमाचल प्रदेश।

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