चँवर वंश का अंतिम वीर योद्धा भाग 12।।

।। चँवर वंश का अंतिम वीर योद्धा।।भाग12।। बादशाह सिकन्दर लोधी, जेल में गुरु रविदास जी महाराज के विराट स्वरूप को देख कर के चकित और भयाक्रांत हो गया था। उस को इन दृश्यों को देख कर सिहरन हो रही थी मगर फिर भी गुरु रविदास जी महाराज, बादशाह सिकन्दर लोधी का हिरदय परिवर्तन करने के लिए अपने  शब्द रूपी बाणों से लोधी को घायल करते ही जा रहे थे, गुरु जी ने फरमाया कि, हे सिकन्दर! आप तो बादशाह हो और हम गरीब आदमी हैं, आप के सामने हमारा कोई जोर नहीं चलता अर्थात हम गरीब लोग आप के साथ कोई भी किसी प्रकार कर लोहा नहीं ले सकते हैं। आप के हाथ में देश की बागडोर है, आप चाहे जिंदा रखो, चाहे देश से बाहर निकाल दो। आप के पास चौदह हजार गुना शक्ति है, जिस के आगे हम कंगाल गरीबों की पुकार कौन सुनेगा? आप हमें चाहे जेल में डाल दो, चाहे फांसी के फंदे पर लटका दो, चाहे तलवार से घायल कर दो। ।                             ।।श्री रविदास जी।। तुसीं पातशाह असीं गरीब बन्दे की जोर है तुसां दे नाल राजा।१। तेरे हथ है हुकूमत डोर मुल्की चाहे रख तां चाहे निकाल राजा।२। सती बीहीं सौ जोरावरां दा ऐ की उजर गरीब कंगाल राजा।३। चाहे जेल देवें चाहे सूली चके चाहे करे शमशीरी घायल राजा।४।       गुरु रविदास जी महाराज, बादशाह सिकन्दर लोधी के शरीर को अपने शब्द बाणों से छलनी छलनी करते ही जा रहे थे और बादशाह घायल होता जा रहा था। गुरु जी का निरंतर बाण वर्षा से उस का अंग अंग टूटता ही जा रहा था। वह सोच रहा था कि, कहीं समीप नदी हो तो उस में डूब मरूँ। गुरु जी निहत्थे होते हुए भी बादशाह सिकन्दर लोधी को पराजित करते ही जा रहे थे मगर वह मुँह से आह तक नहीं कर पा रहा था। राजाओं, महाराजाओं और बादशाहों के पास तो बड़े बड़े सेनापति, कमांडर और पलटनें होतीं हैं जिन के बल पर वे युद्ध लड़ कर अपने दुश्मन को पराजित कर के जीत हासिल करते हैं मगर गुरु रविदास जी महाराज के पास तो केवल सत्सङ्ग रूपी सेना थी, जिस से वे सिकन्दर लोधी जैसे निरंकुश, क्रूर बादशाहों को पराजित कर के अपने गुलाम बना लेते थे मगर भारत के हिंदुओं और सिखों ने तो गुरु रविदास जी महाराज की खूनी और क्रांतिकारी वाणी को आज तक दबा कर रखा था, कभी भी उन की वाणी को छात्रों को पढ़ाने का जोखिम मोल नहीं लिया। यहाँ तक कि सिख भी अमृत छकाते समय सिखी का गुरु मंत्र देते समय गुरु रविदास का नाम ना लेने की हिदायत देते हैं। राम सिंह आदवंशी। अध्यक्ष। विश्व आदि धर्म मंडल। हिमाचल प्रदेश।  

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