चँवर वंश के देवतुल्य सम्राट।। भाग 02।।

चँवर वंश के देव तुल्य सम्राट।।भाग 02।। पिछले अंक में यह बताया गया था कि यूरेशिया से आए हुए लोगों ने भारत की देवतुल्य जनता को 33 करोड़ देवता घोषित कर रखा है और उन के शासकों को यूरेशियन के अवतार लिख डाला है मगर इन के इतिहास को भले ही बदल दिया गया है मगर उन की मौलिकता को कोई बदल नहीं सका है और ना ही कोई कभी बदल सकेगा क्योंकि भारतवर्ष के सभी मूल मंत्रों में आद और जुगाद का नाम सब से पहले आता है, जो आज तक नहीं बदल सका है और शायद यूरेशियन लेखकों को यह ध्यान में नहीं आया है, कि यह आद और जुगाद कल को हमारे झूठ के लिए, हमारे ही गले में फास बन जाएगी। आद और जुगाद सत्य ही हैं और सत्य ही रहेगा, तो फिर उन के भावी वंशज और शासकों के नाम भी सत्य ही हैं। मच्छ अवतार:--- चार हजार छ: सौ वर्ष पूर्व भारत के मूलनिवासियों को यूरेशियन आर्यों ने गुलाम बना कर शिक्षा के अधिकार से वंचित कर के सोचने, समझने की शक्ति पूरी तरह से समाप्त कर दी थी, जिस के कारण इन मनुवादी लेखकों की तर्कहीन कथाओं को पूर्ण रूप से सत्य और प्रमाणिक मानने लग पड़े थे। आर्य लोगों ने जनता को मूर्ख और अंधविश्वासी बनाने के लिए देवी देवताओं की खोज कर डाली और ये देवी देवता भी मानव ना हो कर अति मानव हैं और इन को अति मानवों के काम करते हुए दिखाया है। सब से पहले तो मच्छ नामक अवतार की खोज की गई और उस का मुँह आदमी और शरीर मछली का बनाया गया है ताकि अनपढ़ जनता इस विस्मयकारी प्राणी को सत्य मान सकें, बाद में विष्णु का मुँह बना कर इस मछ को विष्णु का अवतार घोषित कर दिया गया। जब कि आदि मूल मंत्रों में आद का वर्णन मिलता है, जिस का इतिहास सत्य जान पड़ता है। आद वह अदृश्य निराकार शक्ति है, जिस ने सारी कायनात की रचना की हुई है, जिस प्रकार वर्तमान जिनीयश वैज्ञानिकों ने टेस्ट ट्यूब से लड़के-लड़कियां पैदा कर लिए हैं, यदि मानव बिना जननी के ही वच्चे पैदा कर रहा है तो आद पुरुष तो वैज्ञानिकों को जन्म दे चुका है, उस ने भी अपने अंश से आदिकाल में वच्चे जन्में हुए हैं, इसी पद्धति से जुगाद का जन्म हुआ है, जो मच्छ अवतार से अधिक स्टीक और प्रमाणिक ज्ञात होता है। कूर्म/कच्छ:--- गप्प मार मनुवादियों ने दूसरे कूर्म उर्फ कच्छ नामक अति मानव की खोज की हुई है, जिस का मुँह आदमी का दिखाया हुआ है और शरीर कच्छुए का घड़ा हुआ है। जिस को भी बाद में विष्णु का अवतार घोषित किया गया है, जिस अति मानव को भी अनपढ़ जनता से सत्य मान लिया है, क्योंकि मनुवादी शासक मूलनिवासी जनता को अनपढ़ रखते थे, जो आज भी जारी है, आज तक राजा लोग जनता को अनपढ़ रख कर बड़े मजे से राज करते देखे जा रहे हैं, जब से विदेशी अंग्रेजों ने भारत की सारी जनता को  पढ़ने लिखने के लिए शिक्षा के दरवाजे खोल दिए हैं, तब से भारतवर्ष के भोले भाले लोग सत्य और असत्य, अच्छे और बुरे को समझने लग पड़े हैं, ये निर्णय करने लग पड़े हैं कि कूर्म उर्फ कछूए की कथा सत्य पर आधारित नहीं है, ये कथा सत्य की नींव पर आधारित और तर्कसंगत नहीं है, केवल मात्र झूठ का पुलिंदा है। आज मनुवादी अवतारों के ऊपर संदेह किया जा रहा है, क्योंकि कच्छुआ कभी भी अपने मुँह से किसी से बार्ता नहीं कर सकता है इसलिए आदि पुरुष के बेटे जुगाद का जन्म सत्य और प्रमाणित प्रतीत होता है। वराह/उर्फ सुअर अवतार:---तीसरा अतिमानव वराह नामक अवतार है, जिस का मुँह आदमी का बना कर शरीर सुअर का घड़ा हुआ है, जिस को भी बाद में विष्णु का ही पर्यायवाची घोषित किया गया है, जिस को भी भारत की आर्य और आनार्य मूलनिवासी जनता ने सत्य स्वीकार कर रखा है। थोड़ा सा भी हम तर्क और गहराई से सोचें कि क्या कोई भी ऐसा व्यक्ति माँ से गर्भ से जन्म ले सकता है? क्या कोई  जंगल में निवास करने वाला सुअर नामक जानवर के मुँह वाला प्राणी आदमी की तरह बोल सकता है? प्रत्येक तार्किक, बुद्धिजीवी यही कहेगा कि ये कथा तो बिल्कुल काल्पनिक है मगर युरेश्या से आए हुए आर्यों को इन आरोपों का आभास खुद भी नहीं था और जो चाहा वह लिखते गए। इन का एक ही लक्ष्य था कि, विशाल भारत के मूलनिवासी बुद्धिजीवियों के वास्तविक, प्रमाणिक इतिहास को निर्मूल सिद्ध कर के अपने छल प्रपंच को विष्णु का आवरण चढ़ा कर जनता को मूर्ख बना कर रखना। भारतवर्ष के आदर्श मानव *जुगाद* का इतिहास सत्य की दहलीज पर खड़ा और प्रमाणिक अनुभव लगता है, जिसे मूलनिवासी स्कालरों को समझ कर सत्य की खोज करनी चाहिए। क्रमश: राम सिंह आदवंशी। अध्यक्ष, विश्व आदि धर्म मंडल। हिमाचल प्रदेश।

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