चयन आयोग अन्याय का अड्डा।
मेरे 85% मूलनिवासी साथियो,
सोहम, जय गुरुदेव!
भारत का संविधान देशी विदेशी संविधानों के अच्छे-अच्छे कानूनों की नकल कर के बनाया गया है, ताकि भारत की जनता को न्याय मिल सके और कोई भी अन्याय से त्रस्त ना हो सके मगर मनुवादी सरकारों ने भारतीय संविधान को धत्ता दिखा कर के किनारे कर दिया है और उस में बनाए गए कानूनों को स्वेच्छा से प्रयोग करने के लिए उस को ताक पर रख दिया है, यह जिस उद्देश्य को ले कर के लिए बनाया गया था, उस से भारत के मनुवादी राजनेता भटक गए हैं और भारतवर्ष की जनता नारकीय जीवन जीने के लिए विवश हो चुकी है। भारतीय संविधान में ऐसी व्यवस्था की गई है कि कोई भी व्यक्ति मनमानी कर के संविधान का उल्लंघन नहीं कर सकता है। कोई भी तानाशाह नहीं बन सकता है, सारी शक्तियाँ जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों के हाथ में दी गई है, संसद में बैठे जनप्रतिनिधि ही सर्वोच्च शक्ति के मालिक हैं, यदि कर्मचारी, अधिकारी और राष्ट्रपति संविधान विरोधी काम करता है तो यह जनप्रतिनिधि दो तिहाई बहुमत से मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रपति को भी पदच्युत कर सकते हैं, जब कि प्रधानमंत्री को तो वहुमत में केवल एक वोट की कमी के कारण ही कुर्सी से वेदखल कर दिया जाता है, परंतु वर्तमान संदर्भ में संविधान नाम मात्र का दस्तावेज रह गया है और प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और राष्ट्रपति अपनी मनमानी कर के संविधान की धज्जियां उड़ा कर इस के साथ खिलवाड़ करते आ रहे हैं। अपनी इच्छा के अनुसार ही संविधान को तोड़ मरोड़ कर जनता के अधिकारों का खून किए जा रहे हैं। न्यायाधीशों, आईएएस, आईपीएस अधिकारियों को कानून की रक्षा करने के लिए नियुक्त किया जाता है मगर नेता लोग उन्हीं से कानून का कत्ल करवा रहे हैं, ये लोग अपने निजी स्वार्थों के लिए संविधान की रक्षा के बदले में संविधान की ही धज्जियां उड़ा रहे हैं, जिन को पूछने वाला कोई नहीं है।
चयन आयोग सरकारी कठपुतली:---केंद्रीय और राज्य, अधिकारी, कर्मचारी चयन आयोग इसलिए बनाए गए हैं, ताकि योग्य लोगों को उचित पदों के लिए उचित तरीके से चयन कर के नियुक्त किया जा सके मगर ये आयोग केवल मात्र देश का बजट हजम करने का केवल साधन मात्र बन गए हैं, जो भ्रष्ट राजनेता इन को आदेश करते हैं उसी के अनुसार वे चयन करते आ रहे हैं आजादी के बाद प्रथम आईएएस परीक्षा में टॉप करने वाले बंगाल के अच्छूतानंद को साक्षात्कार में इसलिए कम नंबर दिए गए क्यों कि वे अछूत थे, जब कि किसी शूद्र और सवर्ण के साथ ऐसा भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। चयन आयोग भ्रष्ट सरकारों की कठपुतली बन कर रह गए हैं।
चयन आयोग अन्याय के अड्डे:--- बड़ी हैरानी की बात है कि कई बार जिन युवाओं को चयन आयोग चुने जाने की घोषणा कर भी देते हैं मगर बाद में मनुवादी राजनेताओं के दबाव में आ कर के उन चुने हुए योग्य उम्मीदवारों के नाम गायब कर दिए जाते हैं। चयन आयोग भी बड़ी बेशर्मी के साथ अपना दीन, ईमान बेच कर के योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय करते हैं। इंटरव्यू की आड़ में नालायकों को चुनने के लिए इंटरव्यू में अधिक अंक दे कर सफल घोषित किया जाता है। चयन परीक्षाओं में भी हेराफेरी की जाती है ताकि मनुवादी अपने नालायकों को नौकरी के लिए चुन सकें, इसलिए ये आयोग केवल अन्याय और बेईमानी के अड्डे बन चुके हैं, जिन से किसी को भी न्याय की उम्मीद नहीं है। चयन आयोग के अधिकारी और कर्मचारी अपने दीन, ईमान को बेच कर सत्य को ताक पर रख कर, छल कपट करते जा रहे हैं। ये लोग निरंतर संविधान का अपमान कर रहे हैं।
धाँधलियाँ:--- गत दिनों उतर प्रदेश में कर्मचारी प्रतियोगिता में धांधली का बहुत बड़ा मामला सामने आया था, जिस से ज्ञात हुआ कि अमीरों से धन दौलत ले कर के उन्हें परीक्षा उत्तीर्ण करवाई जा रही थी, जिस में अवैध कागज पत्र और मोबाइल पकड़े गए थे, इस के अतिरिक्त भी अनेकों बार चयन आयोगों की परीक्षाओं में ऐसे कई किस्से हो चुके हैं मगर ये काले किस्से तभी होते हैं, जब मनुवादी राजनेता अपने दल्लों को ऐसा गलत कार्य करने के लिए दबाव डालते हैं मगर कर्मचारी आयोगों के कर्ता-धर्ता भी इतने बेशर्म हैं, कि वे सत्य और ईमान को बेच कर के अयोग्य लोगों को नौकरी पर तैनात करने की संस्तुति करते हैं।
राम सिंह आदवंशी।
महासचिव,
वहुजन मुक्ति पार्टी हिमाचल प्रदेश।
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