अंधा युग समाप्त होने के आसार

 मेरे 85% मूलनिवासी साथियो,

सोहम, जय गुरुदेव!

वैसे तो 2004 से ही मौनी बाबा और धृतराष्ट्री अंधायुग शुरू हो गया था, जिस में देश का नेतृत्व ऐसे व्यक्ति के हाथ में आ गया था, जो केवल सोनिया गांधी और राहुल गांधी का गूंगा बहरा युग था, इस युग में डॉ मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठाया तो अवश्य गया था, मगर ये प्रधानमंत्री मुंह से कुछ बोल नहीं सकता था, अपना कोई भी निर्णय नहीं ले सकता था। केवल माँ-बेटे की कठपुतली बन कर के समय काट रहा था और समय काटना भी चाहिए था, क्योंकि मनमोहन सिंह जी अत्यंत मेधावी और तीव्र बुद्धि वाले व्यक्ति हुए हैं, शायद उन्होंने यह समझा होगा कि यदि मैं मुंह से बोला तो मुझे प्रधानमंत्री की कुर्सी से उतार कर के किसी नए गूँगे मौनी बाबे को सोनिया गांधी कुर्सी पर बैठा देगी, तो इस से यही बेहतर है कि मैं ही चुपचाप बैठ कर के प्रधानमंत्री की कुर्सी पर विराजमान हो कर के अपने मजे लूटता रहूँ मगर बेचारे मनमोहन सिंह जी नहीं जानते थे, कि सोनिया गांधी और नरेंद्र मोदी की आपस में सांठगांठ हो चुकी है और दोनों ने ही दस दस साल वोटिंग मशीन को गुलाम बना कर के भारत के 85% मूलनिवासियों को अंधेरे में रख कर के राज करने का निर्णय ले लिया था, जिस के अनुसार कांग्रेस पार्टी ने ईमानदारी के साथ दस साल के बाद राज सत्ता नरेंद्र मोदी को सौंप दी थी मगर सोनिया गांधी ये नहीं जानती थी, कि नरेंद्र मोदी जब सत्ता पर स्थापित हो जाएगा, तो कांग्रेस की क्या दुर्गति कर देगा। आज जो कांग्रेस की दुर्गति नजर आ रही है, उस को देख कर तो मां और बेटा हाथ मलते हुए नजर आ रहे हैं। सोनिया गांधी ने सोचा था कि दस साल में मेरा बेटा जो आटे को बाईस रुपए लीटर बोल रहा है, राज करने लायक हो जाएगा और उस के लिए मोदी राज गद्दी छोड़ कर राजगद्दी पर बैठा देगा मगर जिस व्यक्ति को मानव और मानवता के साथ कोई हमदर्दी ना हो, उस व्यक्ति से समझौते का पालन करना या करवाना मूर्खता से कम नहीं हो सकता था, मगर इन दस सालों में देश की जो दुर्दशा हो चुकी है, उस से भारत की जनता को कांग्रेस और बीजेपी से कोई उम्मीद नहीं बची है। केवल जनता ही नहीं भाजपा के बुद्धिमान राजनेता भी समझ गए हैं कि सोनिया और मोदी भारत की बिगड़ी हुई अर्थव्यवस्था को दोबारा पटरी पर नहीं ला सकते। बीजेपी की कैबिनेट भी समझ गई है कि जिन लोगों के हाथ में वर्तमान राजसत्ता की चाबी आ चुकी है, वे कितने बारीकी से देखने और समझने वाले दूरद्रष्टा और बुद्धिमान हैं, वे जानते हैं कि अब सोनिया और मोदी भारत की बर्बादी को रोक नहीं पाएंगे और हमारा नाम भी इतिहास के पन्नों में काले अक्षरों से लिखा जाएगा, इसी कारण बुद्धिमान परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने मोदी सरकार से विद्रोह कर दिया है और आज मोदी सरकार के बुद्धिमान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जी ने भी खुलेआम अपने मन की भड़ास निकालने के लिए कह दिया है, बीजेपी जहरीली पार्टी है! चोर पार्टी है! भारत की जनता वर्तमान सरकार को अब माफ नहीं करेगी, ना ही बार-बार कर सकती है। जिस के शासन काल में विदेशी कर्जा दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। रुपया धड़ाम से गिर चुका है और निरंतर रुपए की कीमत गिरती ही जा रही है। रुपया खोखला होता जा रहा है। कमजोर होता जा रहा है। चालू खाता बढ़ता जा रहा है। विदेशी कर्जा बढ़ता जा रहा है। गरीबी निरंतर बढ़ती जा रही है। भ्रष्टाचार निरंतर बढ़ता जा रहा है। बेरोजगारी बढ़ती जा रही है। सौ दिन तो क्या हजारों दिन गुजर जाने के बाद भी महंगाई कम नहीं हो पा रही है और ना ही होगी। बढ़ती हुई महंगाई के कारण सिलेंडर की कीमत आसमान को छू रही है और सभी औरतों के घरों में चूल्हा ठंडा होता जा रहा है। 

जिन किसानों को आज अपने खेतों, खलिहानो में होना चाहिए था, वे सभी खेतों और खलिहानों को छोड़ कर के सड़कों पर आ बैठे हैं। उन का शोषण करने के लिए और अपने यारों के खजाने भरने के लिए किसानों की कृषि को बर्बाद किया जा रहा है। आज तक एमएसपी का वायदा पूरा नहीं किया गया है। चावल, कपास, सोयाबीन का न्यूनतम मूल्य कभी निश्चित नहीं किया गया है और खाद्य पदार्थों की कीमत दिनों दिन बढ़ती ही जा रही है। बढ़ती बेरोजगारी से देश के युवा सड़कों पर बेकार घूम रहे हैं।

अब लगता है कि योग्य, मेधावी और जीनियस सांसदों को कुछ होश आ गई है और भारतवर्ष की दुर्दशा का एहसास हो गया है, समझ गए हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था पटरी से उतर चुकी है। ये समझ चुके हैं कि मोदी, शाह की जोड़ी केवल धार्मिक उन्माद पैदा कर के, धार्मिक दंगे फसाद ही करवा सकती है, जिस के सिवाय ये जोड़ी कुछ कर ही नहीं सकती हैं, इसलिए शायद ये लोग एक मंच पर इकट्ठा हो कर के भारत को नर्क बनने से रोकने के लिए एकजुट हो कर कोई नया योग्य प्रधानमंत्री अवश्य चुनेंगे। राम सिंह आदवंशी। 

महासचिव,

बहुजन मुक्ति पार्टी हिमाचल प्रदेश। 


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