मूलनिवासियो पा का खून अमीर पी रहे।
मेरे 85% मूलनिवासी साथियो,
सोहम, जय गुरुदेव!
वर्तमान राजा और प्रजा के संबंधों के बारे में आप लोग तनिक भी गंभीरता से सोच विचार नहीं कर रहे हैं। आज 85% लोग दिन रात मजदूरी करते हुए पुलों, सड़कों, बांधों, बड़े-बड़े आलीशान बंगलों, विश्राम गृहों, विशाल भवनों को बनाते समय अपना खून पसीना बहा रहे हैं, दिन-रात कोल्हू के बैल की तरह काम करते जा रहे हैं। काम करते समय आप लोग दीवारों से गिर कर बेमौत मर रहे हैं, बांधों में काम करते करते डूब कर मर रहे हैं, सड़कों पर काम करते करते चट्टानों से गिर कर, चट्टानों की स्लाइडिंग से, बिजली के खंभों से गिर कर, बिजली की तारों को बिछाते समय कई मजदूर शहीद हो जाते हैं। नदियों, नालों और समुद्रों में पुल बनाते समय ना जाने कितने मजदूर खडडों के बीच दब कर मर जाते हैं, ना जाने कितने ही चालक (ड्राईवर) दूरदराज, अति दुर्गम स्थानों, पहाड़ों के ऊपर गाड़ियां चलाते समय दुर्घटनाग्रस्त हो कर के मारे जाते हैं। सीमाओं के ऊपर इन्हीं मजदूरों के बच्चे अंधाधुंध मरवाए जाते हैं, जिन के नाम पर गन्दी राजनीति कर के चुनाव जीते जाते हैं। भारत के मनुवादी शासकों और प्रशासकों के दिल इतने पत्थर हैं, कि वे मजदूर की मृत्यु पर आंसू बहाना तो क्या, उन के नाम पर जो ग्रेच्युटी मिलती है, उसे भी ये हैवान पीड़ित परिवारों को नहीं देते हैं। कारगिल युद्ध के समय शहीदों के ताबूतों में भी कमीशन खा कर के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी और उस के साथियों ने अपनी बर्बरता सारी दुनिया को दिखाई थी मगर एक आप हो कि आप इन खूनी शासकों और प्रशासकों को अपना खून चूसने देते हैं। आप यह तनिक भी एहसास नहीं करते हैं कि ये विधायक और सांसद मिल कर अपने अधिकारियों को उन का हिस्सा दे कर, आप मजदूरों का खून चूसते जा रहे हैं। आप अंधाधुंध इन आदमखोरों को अपना शोषण करने देते हैं, आप यह नहीं देखते हैं, कि ये लोग आप की मेहनत मजदूरी से कमाए गए धन को चुरा कर करोड़पति बनते हैं, जिस के खिलाफ आप कभी विद्रोह नहीं करते हैं और अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं दिला पाते हैं। अपने बच्चों को अच्छा कपड़ा पहना नहीं पाते हैं, अच्छा खाना नहीं खिला पाते हैं, अच्छा मकान तक बना नहीं पाते हैं, झुग्गी झोपड़ियों में रह कर छप्पड़ों का पानी पी कर प्यास बुझा कर, रूखा - सूखा खा कर गुजारा करते हुए मर जाते हैं, जब कि यह अफसर, मंत्री और संत्री लाखों रुपए पेंशन के रूप में ले कर घर में रह कर भी मौज मस्ती की जिंदगी जीते हैं। जब कि पति पत्नी का पचास हजार पेंशन से बहुत अच्छा गुजारा हो जाता है, मगर ये लुटेरे डाकू लाख-लाख दो लाख पेंशन ले कर आप का खून पसीना पी जाते हैं और आप के लिए नौकरी, रोजगार तक उपलब्ध नहीं करवाते हैं। आज कल तो शासक प्रशासक खुद भी काम नहीं करते हैं। ठेकेदारों से काम लिया जा रहा है और ठेकेदार ठेके पर मजदूर उपलब्ध करवा कर के सभी सरकारी, अर्ध सरकारी काम करवा रहे हैं। ये बेईमान ठेकेदार, ठेके पर काम कर रहे कर्मचारियों का खून चूस रहे हैं और उन को पूरी मजदूरी तक नहीं देते हैं, इसलिए आप सभी एक सूत्र में लामबंद हो कर के इन लुटेरों के खिलाफ उठ खड़े हो जाओ। अपने अधिकारों को प्राप्त करने के लिए सामूहिक संघर्ष करते हुए वहुजन मुक्ति पार्टी को जिताओ।
राम सिंह आदवंशी।
महासचिव,
बहुजन मुक्ति पार्टी हिमाचल प्रदेश।
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