भारत में अंधा युग चल रहा है।

मेरे 85% मूलनिवासी साथियो, सोहम, जय गुरुदेव! भारत के इतिहास में 2014 से ले कर एक ऐसा युग शुरू हुआ है, जिस में खूनी खेल खेलने वाले कुछ राजा, महाराजा और पुलिस हिस्ट्रीशीटर राज कर रहे हैं, जिन लोगों के नाम पर कत्ल के केस चल रहे हैं, मर्डर और खून खराबे के केस चल रहे हैं, वे लोग भारत का शासन, प्रशासन चला रहे हैं, जिन के शासन में सारे भारतवासी जानों से तंग आ चुके हैं, इसी तरह का खेल एक बार पहले भी हुआ है, जब मुस्लिम तानाशाह तैमूरलंग मारोमार करता हुआ भारत आया था, उस ने इतने कत्लेआम और अत्याचार शुरू कर दिए थे, कि भारत के सभी लोग कहने लग पड़े थे कि:----- तैतारियों को लेकर तैमूर लंग आए। दिल्ली के रहने वाले जानों से तंग आए। कातिल तैमूरलंग ने भारतवर्ष के लोगों का जीना मुहाल कर दिया था। भारतवासियों को अंधाधुंध मौत के कुएं में फैँकता जा रहा था, कहीं किसी की कोई दलील अपील नहीं चलती थी, बस मौत का तांडव नृत्य करता जा रहा था, अब यही हाल 2014 से शुरू हुआ है। माबलिंचिंग की खुली छूट देकर अछूतों और मुसलमानों को दिनदहाड़े दस, बीस गुंडे पशुओं की तरह पीटते हैं और वे अंततः मार दिये जा रहे हैं। आप ने देखा होगा कि एक अमीर बाप का अछूत बेटा अपनी सुंदर डिजाइनदार नई गाड़ी में बैठ कर के सड़क पर जा रहा था, तो एक विधायक ने उस गाड़ी को रुकवा कर उस इकलौते बेटे की अपने गुंडों द्वारा बड़ी निर्दयता से पिटाई करवा दी थी, मगर खूनी मनुवादियों की सरकार ने उस विधायक के ऊपर कोई कार्यवाही नहीं की और ना ही उस जालिम विधायक को कारावास में डाला। इसी तरह कई मुसलमानों को भी माबलिंचिंग करवा कर मार दिया गया, मगर भारत की गूंगी, बहरी सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही हैं, जिस रक्षक पुलिस को खूनियों, कातिलों को पकड़ कर जेल में डालना चाहिए, वही पुलिस अपराधियों को शरण दे कर उन को बचाती आ रही है, जिन न्यायाधीशों को निष्पक्ष हो कर न्याय करना चाहिए, वे न्यायाधीश भी अंधे बन कर कानून का कत्ल होते हुए देख रहे हैं, जिस का प्रमाण गुरु रविदास मंदिर तुगलकाबाद दिल्ली है। सात सौ साल  पुराने इस ऐतिहासिक धार्मिक स्थल को तोड़ने के आदेश जिस जज ने दिये हैं, उस अन्यायी व्यक्ति को राज्यसभा का सांसद बना दिया गया। जिस संविधान की रक्षा के लिए इन न्यायाधीशों को नियुक्त किया गया है, उन्हों ने ही मुसलमानों की धार्मिक आस्था को कत्ल करने के लिए बाबरी मस्जिद को गिराने के आदेश दिये हैं और उस के एवज में राज्यसभा का सांसद बनने के लिए न्याय का गला घोट दिया हैं। इसी तरह कुछ और न्यायाधीश राज्यपाल बनने के लालच में आ कर संविधान को मौत के घाट उतार रहे हैं। यह काम तब चल रहा है, जब भारत की राजसत्ता ही ऐसे लोगों को गुनाह करने के लिए समर्थन दे रही है। मुख्यमंत्री ही बलात्कारों के ठेकेदारों को बचाने के लिए बलात्कार से शहीद हुई कन्याओं को रात के अंधेरे में ही जला कर अत्याचारियों को सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं। निर्मम राजसत्ता:--- आजादी के बाद ऐसी निर्मम राजसत्ता पहली बार दिल्ली से शासन कर रही है, जिस ने असहाय गरीबों का खून सड़कों पर बहाना शुरू कर रखा है। गरीबों को नंगे भूखे मार कर के काला इतिहास रचा जा रहा है। ऐसा पहली बार हुआ, कि भारत में लुटेरे दिन दहाड़े लूट रहे हैं और सरकार लुटेरों को, 85% गरीबों का कमाया हुआ धन लुटाती ही जा रही है। गरीबों का खून निचोड़ कर अमीरों के पेट में भरा जा रहा है। किसानों के खून पसीने की कमाई अमीर ठगों, लुटेरों को लुटाई जा रही है। किसान सड़कों पर मर रहा है मगर उस की कोई सुनने वाला नहीं है। गरीब मजदूर भूखे नंगे पांव मजदूरी कर के मजदूरी प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं।अपने बच्चों को भर पेट खाना तक नसीब नहीं कर पा रहे हैं। शिक्षा का पतन:--- मनुवादियों ने शिक्षा का स्तर इतना गिरा दिया, कि अंधाधुंध बच्चों को बिना परीक्षा लिए ही, पास कर के डिग्रियां बांटी जा रही हैं। अध्यापक वर्ग का मान सम्मान इतना गिरा दिया गया है, कि विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के मालिक और स्वयंभू वायस चांसलर अनपढ़ धन्ना सेठ ही हैं। ये गँवार अनपढ़ लोग अध्यापकों से मजदूरों की तरह काम ले रहे हैं। स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए अध्यापकों को ही गांव-गांव में जा कर के बच्चे ढूँढने पड़ रहे हैं। अध्यापकों को भी अपना और अपने वच्चों का पालन पोषण करने के लिए ऐसा मजबूरी में करना पड़ रहा है। बैंक कर्मियों की दुर्दशा:--- बैंकों की इतनी दुर्दशा कर दी गई है, कि बैंक कर्मचारियों को ही ग्राहकों को बढ़ाने के लिए गाँवों, शहरों में भेजा जा रहा है। इन्हें घर घर जा कर के लोगों को खाता खोलने के लिए मोटिवेट करना पड़ रहा है और मजदूरों की तरह काम करना पड़ रहा है। सरकार जिन लक्ष्यों को ले कर के काम कर रही है, उन से कोई भी आर्थिक प्रगति नहीं हो रही है, अपितु उस से और राजकोषीय घाटा बढ़ता ही जा रहा है। घुंघट, पर्दा प्रथा, मुस्लिम तीन तलाक, हिजाब, मदरसे, अछूत मंदिरों, मस्जिदों को गिराना, नमाज को बंद करना और कराना वर्तमान सरकार के टारगेट हैं, जिन से किसी को रोजगार नहीं मिल रहा है। इन कामों से सरकार को कोई आय नहीं हो रही है। भारतवर्ष में चारों ओर धार्मिक उन्माद पैदा कर के हिन्दू-मुस्लिम, सिख-ईसाई, शूद्रों और अछूतों को आपस में लड़ा कर मरवाया जा रहा है। भारत की जनता सड़कों पर:--- सन 2014 से लेकर के आज तक भारत की जनता सड़कों पर खूब धमाल मचा रही है। बेरोजगारों, छात्र छात्राओं को सड़कों पर उतरने के लिए विवश किया जा रहा, कभी हिंदुओं को भड़का कर मुसलमानों के साथ लड़ाया मरवाया जा रहा है, कहीं किसानों को सड़कों पर शहीद होने के लिए नए-नए नुक्ते निकाले जा रहे हैं। अमीरों, धन्ना सेठों के नालायक बच्चों को प्राइवेट संस्थानों से डॉक्टर, इंजीनियर, एडवोकेट, विधायक, सांसद बनाया जा रहा है। सरकारी संस्थानों को बन्द कर के निजी शिक्षा संस्थानों को खोलने की खुली छूट दे कर छात्रों और उन के माता-पिता को आर्थिक दृष्टि से कमजोर करने के लिए फ्रजी डिग्रियां बांटी जा रही है, मगर उन को नौकरी मांगने के बाद कहा जा रहा है, कि पकोड़े बना कर के रोजी रोटी पैदा कर लो, जिस से आहत हो कर युवा सड़कों के ऊपर मारे मारे घूम रहे हैं। बेकारी से तंग आ कर के लड़के और लड़कियां पुलिस के हाथों मरबाए जा रहे हैं। मूलनिवासी राजनेताओं को इकठ्ठा होना पड़ेगा:--- वर्तमान मनुवादी शासकों, प्रशासकों के कुशासन का अंत करने के लिए मूलनिवासी राजनेताओं को तत्काल एक मंच पर इकठ्ठे हो जाना चाहिए, यदि नहीं हुए तो भारतवर्ष में होने वाली खूनी क्रांति को कोई भी रोक नहीं पाएगा। यदि इन लुटेरे शासकों को सत्ता से च्युत नहीं किया गया, तो भारतवर्ष के 85% मूलनिवासियों का जीना हराम हो जाएगा, इसलिए मूलनिवासी वोटरों को केवल मूलनिवासियों की राजनीतिक पार्टी बहुजन मुक्ति पार्टी को ही वोट डाल कर के सत्ता में लाना चाहिए, तभी नृशंस मनुवादियों की गुंडागर्दी और अत्याचार खत्म हो सकेंगे। राम सिंह आदवंशी। महासचिव, बहुजन मुक्ति पार्टी हिमाचल प्रदेश।

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