मूलनिवासियों अपने मूलनिवासी राजनेताओं को इकट्ठा करो

 मेरे 85% मूलनिवासी साथियो,

सोहम, जय गुरुदेव!

प्रकृति ने सभी प्राणियों को अपनी सुरक्षा करने के लिए कोई ना कोई अस्त्र शस्त्र और हथियार दिया है जिससे वे आत्मरक्षा कर सकते हैं और दुश्मन को मौत के घाट उतार सकते हैं भले ही जानवरों को आदमी के बराबर सोचने की शक्ति और दिमाग नहीं दिया गया है परंतु फिर भी जब कोई उनका शोषण करता है, जब कोई इन के ऊपर आक्रमण करता है, जब भी कोई उन की अस्मिता के ऊपर हल्ला बोलता है, तब ये सभी जंगली जानवर भी इकट्ठे होकर के आत्मरक्षा के लिए युद्ध के मैदान में उतर आते हैं। शेर सब से अधिक शक्तिशाली जानवर है मगर जब वह भी अकेला बड़े-बड़े विशालकाय हाथी, जेबरों जैसे जानवरों से हार खाने लगा तो दूसरे शेर भी शिकार के ऊपर टूट पड़ते हैं, कोई उस के गले को दबाता है, कोई उन की टांगों को अपने नुकीले दांतों से कस कर पकड़ लेता है, जिस से वह शिकार भाग ही नहीं पाता है और अंततः उस को गिरा कर अपना भोजन बना लेते हैं। जंगली जानवर भी अपने सींगों से बड़े-बड़े शेर चीते को भी मौत के घाट उतार देते हैं, मगर भारत के 85% मूलनिवासी, मुट्ठी भर 15% मनुवादियों की गुलामी के शिकार बने हुए हैं, जब कि भारत में मूलनिवासी जनता की जनसंख्या एक अरब से भी अधिक है, परन्तु फिर भी 85% मूलनिवासी होते हुए भी प्रतिदिन मनुवादियों की हिंसा के शिकार होते रहते हैं। कभी मूंछ रखने पर मनुवादी मूलनिवासियों की जान ले लेते हैं, कभी घोड़ी पर चढ़ कर बारात ले जाने पर दूल्हे और बारात की पिटाई कर देते हैं, कभी सामान्य कुएं और नल से पानी भरते समय ही उन की पिटाई कर देते हैं, कभी कभी अकारण ही मनुवादी मूलनिवासियों की हत्या और बलात्कार कर देते हैं मगर मूलनिवासी कभी नहीं सोचते हैं, कि यदि कोई किसी की हत्या करता है, किसी के साथ बलात्कार करता है तो उस का बदला लेने का अधिकार उसे भी है। 85% जनसंख्या होने के बावजूद भी ये लोग हिंसा का शिकार होते रहते हैं और अत्याचार, अनाचार, व्यभिचार, बलात्कार, शोषण और मॉबलिंचिंग सब कुछ सहन करते रहते हैं मगर जिस प्रकार शेरों के समूह ईकट्ठा हो कर के बड़े-बड़े जानवरों का मुकाबला करते हैं और अपने शिकार को मार गिरा कर खाते हैं, वैसे मूलनिवासी कभी आपस में इकठ्ठे नहीं होते हैं और एक-एक करके मनुवादियों की हिंसा का शिकार होते रहते हैं, इस का कारण केवल एक ही लगता है, कि इन लोगों की जो जातियां बना कर के टुकड़े-टुकड़े किए गए हैं, उन्हीं के कारण ये लोग कभी इकट्ठा हो कर के अपने अत्याचार का बदला लेने में असमर्थ है। एक जाति दूसरी जाति को देखती रहती है कि यह अत्याचार तो उस जाति से हुआ है, हमारा तो अभी हुआ ही नहीं, जब उन के साथ होता है तो फिर तीसरा, चौथा, पांचवा, छटा इसी प्रकार सोचते सोचते सभी मनुवादियों की हिंसा का शिकार होते जाते हैं। मनुवादी शेरों की तरह झुंड बना कर के रह रहे और 85% मूलनिवासियों को अपना गुलाम बना कर के उन का शोषण करते आ रहे हैं। मनुवादी लोग अपना एक नेता चुन लेते हैं और उसी के नेतृत्व में अपना शिकार करते हैं और उस में वे सफल भी होते आ रहे हैं, इन लोगों ने सत्ता पक्ष तो अपना बना ही लिया है, परन्तु विपक्ष भी अपना ही बना रखा है और दोनों ही सत्ता और विपक्ष बारी बारी राज करते हुए भारत के 85% मूल निवासियों को निचोड़ कर के खून पीते जा रहे हैं। खुद ये लोग कभी कोई मजदूरी नहीं करते हैं, कोई निम्न स्तर का काम नहीं करते हैं मगर जिंदगी ऐश्वर्याशाली व्यतीत करते हैं और जो लोग दिन रात काम करते हैं, उन को नारकीय जीवन जीने के लिए विवश किया हुआ है। इस नारकीय जीवन के लिए उत्तरदायी 85% मूलनिवासियों के राजनेता ही हैं क्योंकि ये लोग इतने मंदबुद्धि हैं कि ये कभी भी किसी एक व्यक्ति को अपना नेता नहीं मानते हैं और अपने अपने जातियों के नेता को मान कर के दूसरी जाति के नेता को और उस के नेतृत्व को कभी स्वीकार नहीं करते हैं। इसी कारण आज 85% मूलनिवासियों की लगभग सौ के करीब निर्जीव राजनीतिक पार्टियां हैं मगर ये राजनीतिक पार्टियां कोई एक विधायक या सांसद जिताने में असमर्थ हैं। ये मूलनिवासी राजनेता अपना पेट भरने के लिए, अपने बच्चों को सत्ता दिलाने के लिए मनुवादियों को समर्थन देकर के अपना उल्लू सीधा करते आए हैं, जिस से इन मूर्ख नेताओं के कारण 85% मूलनिवासी मनुवादियों की गुलामी का शिकार है, यदि ये दम्भी राजनेता एक मंच पर इकट्ठे हो जाएं और यूपीए, एनडीए की तरह मूलनिवासी फ्रंट बना लें तो एक भी मनुवादी विधायक और सांसद जीत नहीं सकता है। बहुजन आंदोलन के क्रांतिकारी नेता साहिब कांशीराम जी के नेतृत्व में मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, मुलायम सिंह यादव, नीतीश कुमार यादव, एच डी देवगौड़ा मिल जाते तो उसी समय वहुजन राज स्थापित हो सकता था मगर यह तीनों ही यादव अपने अहंकार में खोए रहे और अपने बच्चों को प्रमोट करते रहे, जिस के बुरे परिणाम आज ये लोग भी भुगत रहे हैं, इसलिए मेरा सभी 85% मूलनिवासियों से आग्रह है कि आप सभी अपने अपने विधायकों और सांसदों को विवश कर दो, कि आप सभी एक मंच पर इकट्ठे हो जाओ, नहीं तो तुम्हारे खिलाफ सारे देश में जन आंदोलन शुरू किया जाएगा और आप का जीना दुश्वार कर दिया जाएगा। यदि आप इन स्वार्थी मूलनिवासी राज नेताओं को एक मंच पर इकट्ठा कर लेते हैं, तो प्रधानमंत्री भी आपका होगा, राष्ट्रपति भी आप का होगा, वित्त मंत्री, रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री और शिक्षा मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद भी आप के पास होंगे और 85 % मूल निवासियों को ही नहीं 15% सवर्णों में से 10% गरीब सवर्णों का भी आप कल्याण कर सकते हैं। 

राम सिंह आदवंशी।

महासचिव,

बहुजन मुक्ति पार्टी हिमाचल प्रदेश। 


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