चौबीस सितम्बर को पूना पैकेट बना था काला दस्तावेज।।
मेरे 85% मूलनिवासी साथियो,
सोहम, जय गुरुदेव!
चौबीस सितम्बर को श्री विद्या प्रकाश कुरील जी राष्ट्रीय अध्यक्ष हिस्सा आंदोलन के निमंत्रण पर मुझे लखनऊ उत्तर प्रदेश के अमृता विद्यालय के समीप एक्शन श्री कालका प्रसाद जी के भवन में आयोजित सम्मेलन में उपस्थित होने का शुभ अवसर मिला है। मैं चंडीगढ़-लखनऊ ट्रेन से दस बजे लखनऊ रेलवे स्टेशन पर पहुंचा, जहां से मुझे तेलीबाग चौक होते हुए अमृता विद्यालय, सेक्टर नंबर 10 होते हुए श्री विद्याप्रकाश कुरील जी श्री कालका प्रसाद एक्शन के भवन में ले गए, जहां पर श्री कालका प्रसाद जी, प्रिंसिपल अरविंद हर जी मध्य प्रदेश, प्रोफेसर डाक्टर दुर्गेश जी बैठे हुए थे। मैंने सभी को अभिवादन किया। श्री कुरील जी ने मेरा सभी महापुरुषों से परिचय करवाया। सभी गणमान्य महापुरुष बड़े खुश हुए कि हिमाचल प्रदेश जैसे दुर्गम प्रदेश से भी आप यहाँ पहुँचे हैं।
अध्यक्षता:---- इस ऐतिहासिक सम्मेलन की अध्यक्षता के लिए पूर्व प्रोफेसर डाक्टर लालती देवी जी बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से आग्रह किया गया, जिसे स्वीकारते हुए उन्होंने अध्यक्ष की कुर्सी को अल्लंकृत किया। सभी उपस्थित विद्वान, स्कालरों ने श्रद्धेय डाक्टर लालती जी का स्वागत किया, जिस के लिए उन्होंने सभी चिंतकों का आभार व्यक्त किया।
सम्मेलन का संचालन :--- हिस्सा आन्दोलन के राष्ट्रीय संचालक श्री विद्या प्रकाश कुरील जी सिकन्द्रावाद ने प्रस्तावित विषय विशेष का विस्तार पूर्वक विवेचन करते हुए सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत की। श्री कुरील जी ने, मंच संचालन के लिए एक्शन कालका प्रसाद जी को आमंत्रित किया।
हिस्सा आंदोलन के सम्मेलन के चिंतक और विचारक:--- दतिया मध्य प्रदेश से श्रीअरविंद कुमार हर, , पूर्व एस डी एम आर के गौतम जी, बी आर विप्लावि जी, मुनि लाल रायबरेली, हर्ष धर्मेंद्र पसेड़िया, बरेली से डा. बी आर बुद्ध प्रिय, प्रयाग से श्री विशाल नाथ, स्वामी अछुतानंद महाराज कानपुर के नाती मोहन सिंह जाटव मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश से मैंने भाग लिया। सभी चिंतकों, विश्लेषकों ने मनुवादी सरकारों की मूलनिवासी समाज की उपेक्षावृत्ति पर गहन चिंतन किया।
मैंने ने अपने वक्तव्य में बताया कि आज के दिन ही "एक बापू और एक बाबा" के द्वारा शूद्रों के साथ छलाबा किया गया था। मोहन दास कर्म चन्द गांधी नामक हिंदुओं के बापू ने कहा था, कि मैं अपने प्राण त्याग दूंगा, किन्तु अछूतों को आजादी देने वाला "कम्युनल अवार्ड" मिलने नहीं दूंगा, जो मनुवादी सोच का घिनौना खेल था। आज उसी के वंशजों ने मूलनिवासी जनता की शिक्षा का स्तर गिरा कर मूलनिवासी वच्चों को कम्पिटिशन से बाहर कर दिया है। अपने वच्चों की मेरिट बनाने के लिए असैसमैंट और प्रेक्टिकल का सहारा लिया जाता है, जिस में हमारे वच्चों को केवल कुआलिफाइंग मार्कस ही दिये जाते हैं और मनुवादी वच्चों को शत प्रति शत अंक दिए जाते हैं, इन्हीं नम्बरों से सवर्ण वच्चों की मैरिट बनाई जाती है, जो हमारे वच्चों के साथ धोखा होता आया है, जिसे रोकने के लिए हमें अपने ही स्कूल खोलने पड़ेंगे और उन में अपने ही स्कॉलर, योग्य अध्यापक, प्राध्यापक प्रिंसिपल और वायस चाँसलर नियुक्त करने पड़ेंगे, तभी हम अपने होनहार बच्चों को उच्च शिक्षा दिला सकेंगे अन्यथा मनुवादी सरकारें हमारे बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करती ही रहेंगी। आईएएस में भी हमारे टॉपर बच्चों को मनुवादी बच्चों की अपेक्षा साक्षात्कार में कम अंक दे कर सिलेक्ट किया जाता हैं।
दूसरे बाबा ने कहा था, कि यदि मैं पूना पैक्ट पर हस्ताक्षर ना करता और अलग देश की मांग पर अड़ा रहता, तो भारत में शूद्रों को कत्ल कर दिया जाता मगर पाकिस्तान भी अलग देश बना ही था, जो उस समय उन के साथ घटना घटी थी, अगर हमारे साथ भी घट जाती तो कोई फर्क नहीं पड़ सकता था मगर यह कह कर कि "पूना पैक्ट" पर हस्ताक्षर कर के मैंने वहुत गलती की है, आज ये बात हमारे गले बिल्कुल भी नहीं उतरती है, क्योंकि हस्ताक्षर करते समय इस गलती का अहसास क्यों नहीं हुआ था और अपनी गलती को छुपाने के लिए फिर कहा, कि मेरे बच्चों ! मेरी इस "भूल" को आप सुधार लेना।
आज हम फिर इस गलती को सुधारने के लिए लखनऊ में इकठ्ठे हुए हैं और इस पर चिंतन कर रहे हैं, कि किस प्रकार पूना पैक्ट को रद्द करवा कर के पुन: दो वोट के अधिकार को बहाल कर के निर्वाचन पद्धति में किस प्रकार सुधार किया जाए। *24 सितंबर 1932* में हुई गलती को हम सुधारने का प्रयास करते हुए आगे बढ़ रहे हैं ? आरक्षण से जो कुछ हमें मिला था, उस को भी छीना जा रहा है।
आधा बजट चोर दरवाजे से खर्च किया जाता है:--- भारतवर्ष का 50% बजट पुलों, भवनों, सड़कों के निर्माण पर खर्च किया जा रहा है, जिस में से 85% मूलनिवासियों को कुछ भी नहीं दिया जा रहा है और यह सारे का सारा धन केवल 15% मनुवादी ठेकेदारों को लुटाया जा रहा है और वही करोड़पति और अरबपति बनाए जा रहे हैं। मूलनिवासी उन के मजदूर और गुलाम बना कर प्रयोग कर के ठगे जा रहे हैं, जो मनुवादियों की एक सोची समझी साजिश ही है, जिस को दूर करने के लिए हमें राष्ट्रीय हिस्सा आंदोलन को सफल बनाने के लिए इकट्ठा होना बहुत जरूरी है, ताकि भारत का 85% बजट खर्च करने के लिए केवल एक मूलनिवासी मंत्री का पद सृजित किया जाए और वही मंत्री हमारे हिस्से के बजट को खर्च करने के लिए हमारे ही निष्काम उद्योगपतियों, ठेकेदारों को उपलब्ध करवाएं, ताकि भारतवर्ष का 50% धन हमारे गरीब लोगों के घरों तक भी पहुंच सके, भारत में उच्च स्तर के भवन, सड़कें और पुल बना सकें क्योंकि मनुवादियों के बनाए हुए पुल, सड़कें और भवन बनाते बनाते ही गिर जाते हैं, जब दोनों समुदायों के नवनिर्माण के परिणाम सामने आएंगे, तो स्वत: ही पता चल जाएगा, कि कौन जिनीयश, नालायक, ईमानदार और बेईमान है, इसलिए आप सभी अपने अपने प्रदेशों में हिस्सा आंदोलन को सफल बनाने के लिए विशेष अभियान शुरू करें, ताकि हम अपने लक्ष्य को पूर्ण कर सकें।
मैं आभारी हूं हिस्सा आंदोलन के दूरदर्शी प्रबुद्ध, संयोजक एवं अन्वेषणकर्ता श्री विद्या प्रकाश कुरील जी सिकंदराबाद का, जिन्होंने अपने मन मस्तिष्क से यह खोज की है, कि 85% लोग इस आंदोलन से आत्मनिर्भर बन सकेंगे। मैं आशा करूंगा कि आप सभी इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अपने समाज को जागृत करने का पूर्ण प्रयास करेंगे।
राम सिंह आदवंशी।
महासचिव,
वहुजन मुक्ति पार्टी हिमाचल प्रदेश।
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