निजीकरण।।
मेरे 85% मूलनिवासी साथियो,
सोहम, जय गुरुदेव!
सरकारों का काम होता है, देश को का बहुमुखी विकास करना, देश की जनता की रक्षा करना, देश की सीमाओं को सुरक्षित रखना, किसी भी देशवासी से अन्याय ना हो, इसके लिए जरूरी कदम उठाना, किसी का शोषण ना हो उस के लिए शासन प्रशासन को चौकस रखना, परंतु सरकारी क्षेत्र के दुश्मन मनुवादी प्रधानमंत्री नरसिंहा राव, अटल बिहारी बाजपेयी, ने सरकार का मुखिया होते हुए इन जिम्मेदारियों को दूसरों के कंधों पर फैँक खुद बेफिक्र हो कर जनता को बर्बादी, भूखमरी और शोषण के कगार पर ला कर पहुंचा दिया है।
सरकार की परिसम्पतियाँ बेकार पड़ी:--- भारत के गरीबों के दुश्मन नरेंद्र मोदी ने तो कहा है, कि सरकार के पास अनेकों ऐसी संपत्तियां हैं, जिन का पूर्ण रूप से उपयोग नहीं किया गया है और यह बेकार पड़ी हुई हैं। इस प्रकार की सौ परिसंपत्तियों की नीलामी कर के ढाई लाख करोड़ रुपए इकट्ठे कर के गरीबों के पेट में लात मारी जाएगी और कहा है, कि उपक्रमों और कंपनियों को समर्थन देना सरकार का काम है, लेकिन यह जरूरी नहीं है, कि सरकार कंपनियों का मालिकाना हक अपने पास ही रखें। वास्तव में ऐसा वही सोचते हैं, जो अक्षम बुद्धि के मूर्ख मालिक हों या फिर नालायक हों जो अपने बाप, दादा की सम्पति को बेच कर खाना चाहते हों, जिस के लिए वे कई प्रकार के कुतर्क दे कर के लोगों को और अपने सगे सम्ब्धियों को मूर्ख बना सकें।
मोदी के अनुसार सरकार का धंधा:--- व्यापारी जाति से सम्बध रखने वाले मोदी ने गैर रणनीतिक सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण का जोरदार ढंग से समर्थन करते हुए कहा है, कि व्यवसाय करना सरकार का काम नहीं है, उन्होंने कहा है कि सरकार रणनीतिक क्षेत्रों में कुछ सार्वजनिक उपक्रमों को छोड़ कर बाकी क्षेत्रों में सरकारी इकाइयों का निजीकरण करने के लिए प्रतिबद्ध है। मोदी ने आगे कहा है, कि घाटे वाले उपक्रमों को करदाताओं के धन के जरिए चलाने से संसाधन बेकार होते हैं, इन सारे संसाधनों का इस्तेमाल करना हमारी सरकार का प्रयास है।
पहला अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री:--- विश्व में प्रसिद्ध विश्वविद्यालय ऑक्सफोर्ड से अर्थशास्त्र में पारंगत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सारी जिम्मेदारियों को ताक पर रख कर कहा है कि व्यापार करना सरकार का काम नहीं है और जो सरकारी इकाइयां सुचारू रूप से काम नहीं कर रही हैं, उन को प्रयोग करने के लिए सरकार निजीकरण कर के उन का सदुपयोग करेगी और यह अच्छी सरकारों के कार्य होते हैं ताकि लोगों के जीवन स्तर को सुधारने के साथ साथ उन के जीवन में सरकार का अकारण हस्ताक्षेप कम करना है, यानी जीवन में ना सरकार का अभाव हो, ना सरकार का प्रभाव हो। प्रधानमंत्री ने कहा है कि सरकार रणनीतिक क्षेत्रों, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, रक्षा, परिवहन, दूरसंचार, बिजली, पेट्रोलियम, कोयला, खनिज, बैंकिंग, बीमा और वित्तीय सेवाओं को छोड़ कर अन्य सभी क्षेत्रों के सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण के बहाने बेचने लिए प्रतिबध और कटिबद्ध है, अर्थशास्त्री का फरमान है कि इस में सरकार की उपस्थिति को न्यूनतम स्तर पर रखा जाएगा, वास्तव में इन्हीं सेक्टरों में सरकारों को अधिक लाभ होता है, इसीलिए ही इन को सरकार चलाएगी।
सरकार व्यवसाय नहीं करेगी:---- प्रधानमंत्री ने कहा है, कि सरकार कोई भी व्यवसाय नहीं करेगी, सरकार का ध्यान जन कल्याण पर होना चाहिए और हमारा मुख्य लक्ष्य आधुनिकीकरण और निजीकरण है। सरकार इस मंत्र को ले कर आगे बढ़ रही है। जब सरकार निजीकरण करती है, तो उस स्थान को देश का प्राइवेट सेक्टर भरता है। प्राइवेट सेक्टर अपने साथ निवेश भी लाता है और सर्वश्रेष्ठ वैश्विक सम्बन्ध मिलाता है मगर ये नहीं कहा कि निजी सेक्टर कर्मचारियों का खूब शोषण करता है, जिस के बारे में गरीबी की मार झेल चुका प्रधानमन्त्री नहीं जानता है।
प्रधान मंत्री का कथन छलाबा:----- अपनी शोषक नीति के भ्रमजाल में उलझा कर के प्रधानमंत्री देश के मूलनिवासियों को मूर्ख बनाने के लिए ऐसे तर्क दे रहे हैं,जैसे 85% मूलनिवासी इतने महामूर्ख हैं, कि उस के कुतर्कों को कोई भी समझ ही नहीं पा रहे हैं और ना समझ सकेंगे यदि सरकार का काम व्यवसाय करना नहीं है और अपना काम व्यापारियों से करवाना ही सरकार का लक्ष्य है, तो फिर सरकार का गठन चोर बाजारी और घोटाले कर के 85% गरीबों के खून पसीने की कमाई को इकट्ठा कर के हजम करना ही है, तो मोदी ने अपने मेनिफेस्टो में यह क्यों नहीं कहा था, कि हमारी सरकार बनेगी तो हम सारे सरकारी सेक्टर को बेच कर खा जाएंगे और गरीबों के खून को भी बड़ी निर्दयता से पी जाएंगे! यह भी नहीं कहा था कि हम निजीकरण कर के मूलनिवासियों को बेरोजगार करके निजी मालिकों को सौंप देंगे, ताकि वे बारह बारह घण्टे काम ले कर गरीबों का खून चूस कर, गरीबों को गरीब कर के मरने के लिए विवश कर देंगे, तब तो कहा था कि हम दो करोड़ नौकरियां प्रतिवर्ष देंगे मगर जो काम किया जा रहा है, वह तो ठीक इस के विपरीत मेनिफेस्टो को दरकिनार कर के किया जा रहा है। आज तो अंधाधुंध निजीकरण किया जा रहा है। प्रतिदिन सुनने में आता है कि आज अमुक सरकारी सेक्टर बेच दिया गया और निजी हाथों में सौंप दिया गया। रेलबे, एयरलाइन को कौड़ियों के भाव बेच दिया गया है।
धन इकठ्ठा किया जा रहा:--- एलआईसी को बेच कर सरकार अथाह धन इकट्ठा कर रही है। डिजिटल प्रिंट मीडिया का तो बहुत पहले कांग्रेस ने हीं निजीकरण कर दिया था। बेजुवान विवश कर्मचारियों का निजीकरण कर के ठेकेदारों के हवाले कर के सरकार धन उगाही की तरकीबें दिन रात सोच रही हैं। विद्वान ठेकेदार अपने बेईमान चयन आयोग से कर्मचारियों को चुन चुन कर के तैनात कर रहे हैं।
विदेशी जानवर खरीद कर इतिहास रचा गया :--गरीबों की दुश्मन सरकार के प्रधान मंत्री ने 85% मूलनिवासियों के खून पसीने की गाढ़ी कमाई से एकत्रित किये गए धन दौलत से बनाए गए सरकारी सेक्टर को बेच कर अभी अभी 38 करोड़ बर्बाद कर के आठ अफ़्रीकन चीते मंगवा लिए ताकि मुझ से गरीबी तो हटेगी नहीं, मगर इन्हीं चीतों को खुले छोड़ कर गरीबों को ही हटा दूंगा। भारत में गरीबी दूर करने के लिए मंगवाए गए इन चीतों से इतनी आमदन होगी कि भारत की किस्मत बदल जाएगी और जंगलों में चरने वाले मासूम हिरणों, छोटे छोटे वन्य जीवों की जीवन लीला ही खत्म होती जाएगी। जहां पर सरकार, सरकारी सेक्टर को बेच कर के सुख की नींद लेने की तैयारी कर रही है, वहीं विदेशी अफ्रीकन चीतों के रख रखाव के लिए पूरी तरह मुस्तैद (तत्पर) हो गई है। जो समय सरकारी सेक्टर को चलाने के लिए बर्बाद किया जाता था, वह समय अब कांग्रेस और बीजेपी पार्टियां जंगली जानवरों की लीद (गोबर) उठाने के लिए लगाएंगी। जानवरों के रखरखाव, उन के भोजन पानी की व्यवस्था करने के लिए समय की कोई कमी नहीं रहेगी। वास्तव में सरकारें कपटी और बेईमान हों तो ऐसी ही होनी चाहिए।
मनुवादी सरकारें सुख की नींद सोएंगी:--- स्कूटर इंडिया लिमिटेड, एयर इंडिया, सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट इंडिया लिमिटेड, पवन हंस, बी एंड आर, प्रोजेक्ट एंड डेवलपमेंट इंडिया लिमिटेड, सीमेंट कारपोरेशन लिमिटेड, इंडियन मेडिसन एंड फार्मेस्टिकुल सलेम इंडिया, पलांट स्क्रैप निगम लिमिटेड। छत्तीसगढ़ के नगरनार स्टील प्लांट का भी सरकार निजीकरण करने जा रही है। भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड, एचएलएल लाइफ केयर, भारत पैट्रोलियम, शिपिंग कारपोरेशन, कंटेनर कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया, नीलांचल इस्पात लिमिटेड, हिंदुस्तान प्रीफैब लिमिटेड, भारत पंप एंड कंप्रेशर लिमिटेड, हिंदुस्तान न्यूज़ प्रिंट कर्नाटक, हिंदुस्तान एंटीबायोटिक इंडिया, टूरिज्म डेवलपमेंट कारपोरेशन, हिंदुस्तान फ्लोर कार्बन लिमिटेड आदि के सर्वनाश के बाद केंद्र सरकार अपने घोड़ों को बेच कर गहरी नींद सो सकेगी अन्यथा देश को सुचारु रूप से चलाने की खप खप दिन रात सताती रहेगी।
ठेकेदार देश चलाएंगे:--- सारे देश को चलाने की जिम्मेदारी ठेकेदारों की होगी और मंत्री उन्हीं ठेकेदारों से करोड़ों रुपए दक्षिणा स्वरूप घर बैठे प्राप्त करते रहेंगे। 85% मूलनिवासी भूमिहीनों, गरीबों, छोटे कर्मचारियों का खून मिल कर पीते रहेगे। यदि मूलनिवासी नहीं समझे और वहुजन मुक्ति पार्टी की सरकार नहीं बनाते तो धरती पर ही नर्क देखते देखते मिट जाएंगे।
राम सिंह आदवंशी।
महासचिव,
बहुजन मुक्ति पार्टी हिमाचल प्रदेश।
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