संविधान बदलने वालों को वोट मत दो

मेरे 85% मूलनिवासी साथियो, सोहम, जय गुरुदेव! पन्द्रह प्रतिशत विदेशी मनुवादियों ने भारत के 85% मूलनिवासियों को चार हजार सालों से अपना गुलाम बना कर के रखा हुआ था और बड़ी बेरहमी के साथ 85% मूलनिवासियों के साथ अमानवीय व्यवहार कर के मानसिक और शारीरिक शोषण करते आ रहे हैं, यहां तक कि सारा सारा दिन काम लेने के बाद भरपेट भोजन तक नहीं दिया जाता था, जो कुछ दिया जाता था, वह भी बासी मक्की और मँढल की रोटी के ऊपर दो-चार दिन का पड़ा हुआ बासी साग ही खाने को दिया जाता था। मूलनिवासी मौलिक अधिकार हीन:--किसी भी मूलनिवासी को कोई मौलिक अधिकार नहीं थे, बस केवल पशुओं की तरह काम करते करते मरने का ही अधिकार था, जिस को खत्म करने के लिए निरंकार आदपुरुष ने सातवीं शताब्दी में मुसलमानों को भारतवर्ष में भेजा था, परंतु भारत में आ कर मुसलमान भी अपनी राजसत्ता को बचाए रखने के लिए ब्राह्मणों के साथ आंतरिक समझौता कर के भारत की जनता को लूटते रहे, उस के बाद सोहलवीं शताब्दी में अंग्रेजों ने भारत में आ कर भारत की राजसत्ता पर कब्जा करना शुरू किया था, वे भी भारतवर्ष को लूट लूट कर के सारा धन दौलत अपने देश इंग्लैंड ले जाते रहे मगर इन विदेशी लोगों के मन में कुछ मानवता थी, जिस के कारण वे 85% मूलनिवासियों की दोहरी गुलामी और दुर्दशा को देख कर के मानवीय अधिकार देने लग पड़े थे। उन्होंने ही मनुवादियों के काले कानूनों को समाप्त कर के समानता का अधिकार दे कर के मूलनिवासियों को मनुवादियों के शोषण से बचा कर सुरक्षा प्रदान की थी। मूलनिवासियों ने आजादी की लड़ाई में अपने 85% युवाओं की स्वतंत्रता के यज्ञ में आहुति दी थी मगर संविधान को बदलने की बात करने वालों के पूर्वजों ने जेलों में बैठ कर अपनी जान ही बचाई थी, कुछ ने तो अंग्रेजों के साथ नाक रगड़ कर समझौता कर के, हल्फनामें दे कर के अपना प्राणों की रक्षा कर ली थी, उन की ही गद्दार और स्वार्थी संताने आज संविधान बदलने की बातें कर रही हैं। ये 15% मनुवादी यूरेशियन दोबारा मनुस्मृति के हैवानियत से भरे हुए कानूनों को लागू कर के भारतवर्ष के 85% मूलनिवासियों को अपना गुलाम बनाना चाहते हैं। दल्ले दलाल मूलनिवासी नेता:-कुछ मूलवासी स्वार्थी नेता मनुवादी लोगों के साथ मिल कर के, 85% लोगों के अधिकारों को बेच कर अपने परिवारों का पालन पोषण कर रहे हैं। पूर्व उपप्रधानमंत्री जगजीवन राम, डॉ राजेंद्र प्रसाद, ज्ञानी जैल सिंह, फखरुद्दीन अली अहमद, रामविलास पासवान, मीरा कुमार, मुलायम सिंह यादव, लालू प्रसाद यादव, एच डी देवगौड़ा, शरद यादव, अखिलेश यादव, मायावती, रामदास अठावले और कांग्रेस, भाजपा आदि मनुवादी राजनीतिक दलों में कार्यरत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ी जाति और अल्प अल्पसंख्यक् मुस्लिम राजनेता शामिल है, जिन के कारण भारत के 85% मूल निवासियों का शोषण हो रहा है। इन्हीं गद्दार लोगों के सहयोग और मूर्खता के कारण आज फिर 15% मनुवादी मनुस्मृति लागू करना चाहते हैं, इसलिए मनुस्मृति लागू करने और कराने बाले यूरेशियन और मूलनिवासियों को किक मारो, इन का सामाजिक बहिष्कार करो, इन के साथ रोटी बेटी का रिश्ता खत्म करो, सामाजिक बहिस्कार करो, मूलनिवासियों के वोटों को बेचने वाले मूलनिवासी नेताओं को मिट्टी में मिला दो, आप के अधिकारों का सौदा करने वालों को धूल चटा दो। मनुवादियों की अर्थी को कंधा देने वालों को बुरी तरह फटकारो, दुत्कारो। मूलनिवासी जनता की लड़ाई लड़ने वालों का साथ दो:--85% मूलनिवासियों की गुलामी खत्म करने के लिए जो मूलनिवासी वीर योद्धा आजादी का संग्राम लड़ रहे हैं, उन के साथ कंधे से कंधा मिला कर चलो। साहिब काशीराम की विचारधारा को बढ़ाने के लिए उन का तन, मन और धन से सहयोग करो। उन का अनुसरण, अनुगमन कर के 85% जनता का मूलनिवासी शासन स्थापित करने वालों को सहयोग दो, तभी संविधान बदलने वालों को आप सबक सिखा सकोगे और पूर्ण आजादी के साथ आप जीवन बिता सकोगे अन्यथा इसी तरह घुट घुट कर के मरते रहोगे। मनुवादियों के घोर अन्याय, अनाचार और अत्याचार सहन करते रहोगे, वहु बेटियों को ब्लात्कात्कारियों की हवस का शिकार होने दोगे। इसलिए आप सभी 85% प्रतिशत लोग उन गद्दारों को वोट देना बंद कर दो, जो संविधान बदलने वालों का समर्थन करते हैं या संविधान बदलने का साथ दे रहे हैं। राम सिंह आदवंशी। महासचिव, बहुजन मुक्ति पार्टी हिमाचल प्रदेश।

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