पूना पैकेट की औलादें।

मेरे 85% मूलनिवासी साथियो, सोहम, जय गुरुदेव! आप सभी ये आशा छोड़ दो कि पूना पैक्ट की औलादें कभी आप के अधिकारों के लिए विधान सभाओं और संसद में आप की गुलामी को खत्म करने के लिए कभी मुंह खोल कर मनुवादियों के साथ उलझ सकेंगी। ये औलादें जिस पूना पैक्ट बाप से उत्पन्न हुई हैं और उन्हीं की ही हिमायती हैं। ये उन्हीं के ही बच्चे बन कर के, आप के लिए नागनाथ और सांपनाथ हैं, जिन के कारण आप को प्रतिदिन नए नए दंश मिलते हैं और उन का जहरीला विष आप के बच्चों को डँस मारता जा रहा है। मनुवादी मनुस्मृति के सपूत अपने बच्चों के प्रति चिंतित है:--- मनुवादी अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए हर क्षण क्षण चिंतित रहते हैं। वे अपने बच्चों के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार रहते हैं। आजादी की लड़ाई चल रही थी मगर आप की 85% आबादी का आतंक मोहनदास करमचंद गांधी, जवाहर लाल नेहरू, वाल गंगाधर तिलक, मदन मोहन मालवीय, लाला लाजपत राय आदि को सता रहा था, कि यदि इन मूलवासी लोगों को भी पूर्ण आजादी मिल गई तो फिर हम 85% मूलनिवासियों के गुलाम बन जाएंगे और हमारी आने वाली नस्लें भारत के मूलनिवासियों की गुलाम बनी रहेंगी, इधर हमारे 85% लोग आजादी के यज्ञ में अपने शरीरों को होम कर रहे थे उधर ये मनुवादी अपने बच्चों के भविष्य के बारे में ही सोच रहे थे, इसी कारण उन्होंने मानवता के पुजारी सुभाष चंद्र बोस को आजादी से पहले ही मार दिया, फिर थोड़ा बहुत मानवता की रक्षा के लिए मोहनदास करमचंद गांधी काम कर रहा था, उस को भी गोली मारकर उड़ा दिया गया। वीर भगत सिंह राजगुरु और सुखदेव भी मानवता के पुजारी थे मगर इन को भी इन्होंने फांसी के फंदे पर चढ़ने दिया मगर अपने बच्चों के लिए उन्होंने वे सभी काम किए, जिन से इन के बच्चों को भविष्य में परेशानी होने वाली थी, मगर पूना पैक्ट की औलादों ने केवल अपने बच्चों के लिए ही पूना पैकट का प्रयोग किया। मनुवादी नेताओं की तरह इन पूना पैकट की औलादों ने समूचे मूलनिवासी वच्चों के भविष्य के प्रति तनिक भी चिंता नहीं की, ये तनिक भी नहीं सोचा कि जिन मूलनिवासी रणवांकुरों ने 85% लोगों के लिए अपना सर्वस्व निछावर किया है, उन के वच्चों के लिए भी हमें कुछ करना चाहिए, सोचना तो दूर की बात है, उन के भविष्य को मिट्टी में मिलाने के लिए मनुवादियों के दल्ले और दलाल बन गए जिस से आज हम प्रतिदिन बेमौत मरते जा रहे हैं। पूना पैक्ट की औलादें मूलनिवासियों के बच्चों की दुश्मन है:---पूना पैक्ट नामक बाप की औलादें केवल अपने बच्चों के भविष्य के लिए ही दिन रात सोचती हैं, इसलिए इन स्वार्थी तत्वों का सामाजिक बहिष्कार किया जाना चाहिए, इन के साथ मूलनिवासियों को रोटी बेटी का संबंध तक तोड़ लेना चाहिए। जब ये कौम के गद्दार वोट मांगने आएं तो इन को अपने घर में घुसने ना दिया जाए। पूना पैक्ट की औलादें मनुस्मृति की गुलाम हैं:--- पूना पैक्ट की औलादें पंच, प्रधान, उप प्रधान, बीडीसी, जिला परिषद सदश्य, चेयरमैन विधायक और सांसद बन कर भी मनुवादियों के गुलाम बन कर जीवन बसर कर रहे हैं, छुआछूत के शिकार हो कर ही विधान सभाओं में केवल रोजी रोटी चला रहे हैं, ये इसी से ही संतुष्ट हैं, कि हमें रोजगार मिला हुआ है, इन्हें उन लोगों की कोई चिंता नहीं होती है, जिन के अधिकारों की रक्षा के लिए इन्हें चुना गया है, इसलिए 85% मूलनवासियों को अपनी सरकार बनानी वहुत जरूरी है। मूल निवासियों को अपने बच्चों के लिए लंबी लड़ाई लड़नी होगी, जिस के लिए पूना पैक्ट की औलादों को मिट्टी में मिलाना ही पड़ेगा, तभी चमचा और अंधकार युग समाप्त होगा। राम सिंह आदिवंशी। महासचिव, वहुजन मुक्ति पार्टी हिमाचल प्रदेश।

Comments

Popular posts from this blog

गुरु रविदास जी की क्रांतिकारी वाणी दोधारी है।

क्रांतिकारी शूरवीर गुरु रविदास जी महाराज।।

।।राम बिन संशय गाँठि न छूटे।।