प्रशासनिक अधिकारी जिम्मेदारी नहीं समझते।
मेरे 85% मूलनिवासी साथियो,
सोहम, जय गुरुदेव!
न्यायधीशों, आईएएस और आईपीएस, गुप्त चर आदि अधिकारियों को जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए नियुक्त किया जाता है। इन में से कुछ एक ऊंचे पदों पर बैठ कर के खुदा बन कर इतने अहंकारी हो जाते हैं, कि जो दुखी,पीड़ित लोग इन अधिकारियों के पास अपनी समस्याओं को ले कर जाते हैं, तो ये घमंडी लोग जिन लोगों के रहमों करमो के ऊपर अपना और अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं, उन को बैठने के लिए कुर्सी तक उपलब्ध नहीं करवाते हैं और ना ही सीधे मुंह लोगों के साथ बात नहीं करते हैं, कई बार तो जातीय वैमनस्य के कारण फरियाद करने वालों से बदतमीजी तक कर बैठते हैं जिन को कोई भी पूछने वाला नहीं होता है, जिस के कारण जनता का इन अधिकारियों से विश्वास उठता जा रहा है।
न्यायधीशों से विश्वास खत्म:--- संविधान में न्यायपालिका को सब से अधिक शक्तिशाली बनाया गया है, किसी के साथ अन्याय ना हो, इसी कारण संविधान में न्याय व्यवस्था को इतना मजबूत किया गया है, जिस के भय से राष्ट्रपति, उपराष्ट्पति, प्रधानमंत्री, मंत्री, विधायक और बड़े बड़े अधिकारियों, कर्मचारियों को किसी के साथ अन्याय करने की हिम्मत नहीं पड़ती है मगर कुछ मूर्ख राजनेताओं के दबाव में आ कर के मनुवादी न्यायधीश न्याय का गला घोंटते आ रहे हैं, ये भ्रष्ट राजनेता अपने अपराधों को छुपाने के लिए न्यायधीशों को डरा धमका कर अपने और अपने चहेतों चमचों के गुनाहों पर पर्दा डलवाते हैं। ये अपराधियों को बचाने के लिए न्यायाधीशों को अन्याय करने पर विवश करते हैं, इसीलिए लार्ड चेम्सफोर्ड ने कहा था, कि ब्राह्मणों में न्यायिक चरित्र नहीं होता है, जिस के कारण उन्होंने ब्राह्मणों को न्यायधीश नियुक्त करने पर ही प्रतिबंध लगा दिया गया था मगर आजादी के बाद तो न्याय के दुश्मन कुछ ब्राह्मणों ने, लॉर्ड चेम्सफोर्ड के अधिनियम की धज्जियां उड़ा कर ब्राह्मणों को ही सभी सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और राजनीतिक संगठनों के प्रधान बनाने का षड्यंत्र रचा हुआ है, ताकि कोई दूसरी जाति का न्यायवादी, योग्य, ईमानदार व्यक्ति शक्तिशाली नेता बन ही ना सके, यदि कोई बनने का प्रयास करे भी तो उसका चरित्र हनन कर के सदा सदा के लिए मिट्टी में मिला दिया जाता है, जिस प्रकार विश्वामित्र का चरित्र हनन किया गया था। इन लोगों को न्यायपालिका का भय सताता रहता है, जिस के कारण ब्राह्मण समाज की संस्था आर एस एस ने ऐसी साजिश रची हुई है कि बिना किसी लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास किए ही जज नियुक्त किये जाते हैं। दुनियां की नजरों में अपने आप को निर्दोष सिद्ध करने के लिए एक कोलिजियम बनाई गई है, जिस में केवल ब्राह्मण जज ही शामिल है, वह भी सभी जातियों को किनारे कर के अपने ब्राह्मण समाज के ही जज कोर्ट-कचैहरियों में नियुक्त करते हैं। ये लोग ब्राह्मण राज को शाश्वत बनाए रखने के लिए न्याय का गला घोंटते आ रहे हैं, जिस के कारण भारतवासियों को ब्राह्मण न्यायधीशों से न्याय कोई भी अपेक्षा नहीं है। अछूतों के पक्ष में तो ये कभी भी न्याय नहीं करते हैं।
आई ए एस प्रशासनिक अधिकारी:---- वर्तमान ब्राह्मण राज में आईएएस प्रशासनिक अधिकारी केंद्रीय लोकसेवा आयोग द्वारा चुने जाते हैं मगर वहां पर भी जो अधिकारी चयन करते हैं, वे भी ब्राह्मण राजनेताओं के इशारे पर ही चयन करते हैं, जिनमें अधिकतर ब्राह्मणों को ही चुना जाता है, जिस के आंकड़े सारे विश्व के सामने हैं, ये प्रशासक अधिकारी बनने से पूर्व संविधान की शपथ खा कर काम शुरू करते हैं, मगर उसी संविधान की बर्बादी और तबाही करने के लिए ये लोग अपने आकाओं के इशारों पर ही काम करते हैं। इन में से कुछ लोग इतने निरंकुश होते हैं, कि जनता को अपना गुलाम समझते हैं। कुछ लोग इतने अहंकारी होते हैं कि जब भी कोई फरियादी इन के पास जाता है, तो उस गरीब फरियादी को बैठने के लिए कुर्सी तक उपलब्ध नहीं करवाते हैं और ऐसे ट्रीट करते हैं जैसे ये लोग खुदा ही हों। यह तनिक भी एहसास नहीं करते हैं, कि जनता की सेवा और सुरक्षा के लिए ही इन्हें रोजी रोटी मिली हुई है, जिस से ये अपने बच्चों और परिवारों का पालन पोषण करते हैं। अपने सुविधाजनक स्टेशनों के लिए और चोर बाजारी वाले विभागों को प्राप्त करने के लिए राजनेताओं को अपने हाथों से जूते तक पहना कर, उन के लेसिज को बांधने के काम भी कर लेते हैं।
प्रशासनिक अधिकारी चुनावों के ठेकेदार:-- आईएएस कर्मचारी ही दंडाधिकारी होते हैं मगर ये लोग प्रशासनिक पदों पर आरूढ़ हो कर के अपने आप को ही रूलर समझते हैं। इन्हीं लोगों को बड़े-बड़े विभागों के मुखिया बनाया जाता है, जिन विभागों में से एक चुनाव आयोग भी है, जब इन अधिकारियों को चुनाव आयेगा में नियुक्त किया जाता है, यह लोग राजनेताओं के इशारों पर ही काम करते हैं, इसी कारण ये सरकारी नौकर कांग्रेस और भाजपा के इशारों पर वोटिंग मशीन में हेराफेरी कर के राजनीतिक दलों की सरकारें बनाते आ रहे हैं, जिस से भारत का लोकतंत्र खतरे में पड़ चुका है। आप, कांग्रेस और भाजपा पार्टियां मनमाने ढंग से इसीलिए काम कर रही है, कि इन दलों को वोटों के लिए वोटर की आवश्यकता ही नहीं रही है। इसी कारण जनता का खून चूसने के लिए अंधाधुंध टैक्स लगाए जा रहे हैं, जिन करों को गरीब आदमी चुकाने में असमर्थ हो गए हैं। बड़े-बड़े अधिकारी, कर्मचारी और राजनेता तो आपस में मिल कर भ्रष्टाचार कर के धन इकट्ठा कर लेते हैं और उस में से इन लोगों को हजारों रुपए टैक्स देना भी पड़े, तब भी इन को महंगाई की मार से कोई फर्क नहीं पड़ता है। आपस में तालमेल होने के कारण इन भ्रष्ट अधिकारियों को मंहगाई आदि से कोई परेशानी नहीं होती है, परेशानी होती है, तो केवल गरीब मजदूर और कम वेतन लेने वाले तृतीय, चतुर्थ श्रेणि के कर्मचारियों को होती है।
आईपीएस दमनकारी अधिकारी:---- कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए केवल आई पी एस अधिकारी ही उत्तरदायी होते हैं। संविधान की रक्षा कराना इन्हीं अधिकारियों, कर्मचारियों का दायित्व है, मगर बड़े ही अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है, कि यही लोग कानून का गला घोंट कर जनता को न्याय नहीं दिला पा रहे हैं। भ्रष्ट, निर्दयी और अत्याचारी राजनेताओं के इशारों पर ये लोग बिना सोचे समझे अत्याचार ढाते हैं। जनता अपनी आवाज बुलंद करने के लिए जब सड़कों पर उतरती है, तो यही पुलिस अधिकारी और कर्मचारी लोगों पर अमानवीय अत्याचार करते हैं। बड़ी निर्दयता के साथ जनता की पिटाई करते समय हड्डियों तक को तोड़ देते हैं, यदि पुलिस अधिकारी और कर्मचारी समझने का प्रयास करें कि सरकार ने हमें गलत आदेश दिए हैं, हमें न्याय का पक्ष लेते हुए ही अपना कार्य निभाना है, तो ये कभी भी किसी के ऊपर लाठीचार्ज नहीं कर सकते हैं, ना ही करेंगे और ना ही करना चाहिए, मगर न्याय का चरित्र ना होने के कारण ही ये सरकार के गलत आदेशों का पालन करते हैं, यदि आदेश मानवता के विरुद्ध हों तो उन आदेशों का पालन नहीं करना चाहिए। अगर न्यायधीश, आईएएस, आईपीएस अपना चरित्र सुधार लें तो बेईमान, अत्याचारी, आनाचारी लोग सुधर सकते हैं। ये लोग अपना कार्य संविधान के अनुसार सच्चाई के रास्ते पर चलते हुए करें और अपराधी राजनेताओं को भी जेल में बंद करना शुरू कर दें, तो भारत का लोकतंत्र सफल हो सकता है, अन्यथा जिस प्रकार आज संविधान की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, उस से भारत अनारकी की ओर बढ़ता जा रहा है। सारे विश्व को भारत के राजनेताओं के चरित्र से नफरत पैदा हो चुकी है। भारत के राजनेताओं को केवल न्यायाधीश, आईएएस और आईपीएस अधिकारी ही सीधे रास्ते पर ला सकते हैं क्योंकि कानून को सुचारु रुप से लागू करने का सारा उत्तरदायित्व और अधिकार इन्हीं लोगों के पास है, यदि ये लोग अपने अधिकारों का प्रयोग अपने विवेक, ईमान और संविधान के अनुसार करें, तो सभी अपराधी राजनेता जेलों में बंद हो सकते हैं और निकट भविष्य में कोई भी अपराधी चुनाब नहीं लड़ सकेगा और ना ही संविधान से खिलवाड़ होगा।
राम सिंह आदवंशी।
महासचिव,
वहुजन मुक्ति पार्टी हिमाचल प्रदेश।
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