स्वाति मिश्रा का अनर्गल विलाप।
मेरे 85% मूलनिवासी साथियो,
सोहम, जय गुरुदेव!
मैंने स्वाति मिश्रा नामक ब्राह्मण लड़की की एक पोस्ट मोबाइल पर देखी, जिस को पढ़ कर के बड़ी हैरानी हुई, कि ब्राह्मण जिन राजपूतों के कंधों के ऊपर अपनी तलवारें रख करके अछूतों और मुसलमानों को बड़ी निर्दयता और गुंडागर्दी से माबलिंचिंग द्वारा मरवा कर अपनी श्रेष्ठता को बरकरार रखते हैं और खुद कभी भी किसी से नहीं टकराते हैं। गुजरात में गाय के नाम चार चमार युवाओं की पिटाई का किस्सा अच्छे इंसानों के रोंगटे खड़े कर देता है। इस कांड को एक ब्राह्मण युवा, चार शूद्र (ओबीसी) युवाओं से करवाता है और खुद दूर खड़ा हो कर तमाशा देखता रहा। ये हैवान गरीबों की निर्मम पिटाई देख कर खुश हो कर जश्न मनाता रहा। ये पत्थर ब्राह्मण खुद ऐशो आराम की जिंदगी जीते हुए, मौज मस्ती करते हुए आराम से खाना खाते हैं। जिन राजपूतों की करणी सेना, बजरंग दल, दुर्गा वाहिनी, शिव सेना और शूद्रों (ओबीसी) से अछूतों और मुसलमानों को आए दिन दुख दिलाते रहते हैं, उन्हीं राजपूतों को संबोधित करती हुई, वे लिखती हैं कि:---
1 हम वह ब्राह्मण हैं जिसने तीन पग में तीनो लोक नाप डाले।
2 हम वह ब्राह्मण हैं जिसने 21 बार पृथ्वी को अधर्मी क्षत्रियों के रक्त का सरोवर बना दिया।
3 हम वह ब्राह्मण हैं जिनका देश की आजादी में 90% बलिदान रहा।
4 हम वह ब्राह्मण हैं जिसने यदुवंश का नाश किया। *जय परशुराम*
स्वाति मिश्रा जी, आप ने चार वाक्यों में जो कुछ लिखा है, उसे तर्क की कसौटी पर कसा जाए तो बुद्धिमान आदमी भी समझ सकता है, कि इन चार कथनों में कितनी तर्कसंगत सच्चाई क्या है? अंध भक्त बन कर अंधाधुंध लिखना बहुत बड़ी मूर्खता है, यदि किसी ने आप की मनुस्मृति, वेद, पुराण आदि पुस्तकों में कुछ लिखा भी है, तो कम से कम तर्क की कसौटी पर कस कर के ही उस पर विश्वास करना चाहिए और बुद्धिमानों को ऐसी किताबों में वर्णित कथनों, विचारों को विश्लेषणात्मक दृष्टि से देख कर के आलोचना करनी चाहिए। उस की गहराई में जा कर के यह देखना चाहिए है, कि जो कुछ लेखक ने लिखा है, वह कहां तक प्रमाणिक और तर्क संगत लगता है, यदि किसी का कथन तर्क की कसौटी पर कस कर तर्कसंगत और स्वाभाविक नहीं लगता है, तो फिर उस पर विश्वास नहीं करना चाहिए। वेदों, पुराणों और मनुस्मृतियों में ऐसे ऐसे महाउपद्रव भरे लेख लिखे गए हैं, जिन के ऊपर विश्वास नहीं किया जा सकता है। अगर आप के कथनों का पोस्टमार्टम किया जाए तो यह साफ विदित होता है, कि विश्व में कोई ऐसा देश नहीं है, जहां आप के बौने बामन के समान कोई और आदमी भी धरती पर पैदा हुआ हो। मूर्ख भी इतना अनुमान तो लगा ही सकता है, कि क्या कोई ठिगना व्यक्ति 12756 किलोमीटर व्यास वाली धरती को तीन कदमों में नाप सकता था? वह ठिगना व्यक्ति अपनी पत्नी के सहयोग से राजा बलि को छल बल से मार कर उस के सारे साम्राज्य को छीन लेता है, उस की कायरता को छुपाने के लिए यह महाझूठ तैयार कर के लिखा गया है, यदि दो कदमों में उस ने सारी धरती को नाप लिया था और तीसरे कदम के लिए राजा बलि को समुंदर में लेटना पड़ा था, तो क्या ये संभव लगता है? अगर ये सत्य है तो फिर अमेरिका, इंग्लैंड, अरब देशों में उस की टांगे क्यों नहीं पहुंच गई थी। उन देशों में उस का शासन क्यों नहीं हो गया था। आप कहती हैं, कि ब्राह्मणों ने 21 बार धरती को अधर्मी क्षत्रियों के रक्त का सरोवर बना दिया था मगर मुझे लगता है, कि यह कथन भी आप को सोच समझ कर के ही जनता से पूछना चाहिए था, क्योंकि जब अकेला आदमी युद्ध लड़ता हो और वह अकेला ही अपने फरसे से राजपूत जैसे वीर योद्धाओं को निर्वीज कर दे, तो यह बात भी हास्यस्पद ही लगती है। अकेला ब्राह्मण आदमी राजपूतों के खून से धरती के ऊपर कोई खून का सरोवर नहीं बना सकता था मगर आप अच्छी तरह जानती हैं, कि राजपूत लोग इस देश के मूल निवासी हैं, जिन का जन्म ही राजाओं के घर हुआ था। राजाओं के कई कई राजकुमार होते थे मगर राजा केवल एक ही बनता था और बाकी सारे राजा के पुत्र ही राजपूत कहलाये हैं। आदिकाल से इस देश में चंवर वंश का ही राज था। यही राजशाही वंश विशाल भारत में शासन करता था, चँवर् सेन जी महाराज इस वंश के अंतिम साम्राट थे, जिस के बाद आप लोगों ने छल बल से अपनी औरतों से यहां के राजाओं का कत्ल करवा कर राजसत्ता अपने हाथ में ले ली थी, इसलिए इतिहास में जा कर के आप को सत्य ढूंढने चाहिए।
आप ये भी कहती हैं, कि आजादी की लड़ाई में 90% ब्राह्मणों ने ही बलिदान किया है, जो बिल्कुल सत्य से परे की बात है, मन को बहलाने का अच्छा ख्याल है। मोहनदास करमचंद गांधी वैश्य था, जिस को आप के भाई ने ही मार दिया था। नेहरू मुसलमान परिवार का कनवर्टर पंडित था, तो फिर आप का कौन सा योद्धा था, जिस ने अंग्रेजों के साथ लोहा लिया था। अंतिम कथन आप का बिल्कुल सत्य है कि आप के वंशजों ने यदुवंश (यादव वंश) का नाश किया था। आप के पुरखों ने राजाओं को आपस में लड़ा लड़ा कर मारा था, उसी कड़ी में आप ने महाराजा कंस को उस के भांनजे यदुवंशी कृष्ण के साथ गृह युद्ध करवा कर कर मरवाया था, जिस के कारण यदुवंश का नाश हो गया था। यही नहीं आप के पूर्वजों ने मूलनिवासी सूर्यवंशी रामराज्य का भी इसी तरीके से अंत किया था, उस में भी महात्मा रावण को इसलिए रामचन्द्र से मरवाया था, कि रावण आप के ब्राह्मण ऋषियों, मुनियों को लंका की सीमा में घुसने तक नहीं देता था, इसलिए अच्छा होगा कि आप समाज को भड़काने वाली बातें ना कर के, भारत में समरसता पैदा करने के लिए काम करें, अन्यथा भारत देश फिर बर्बाद हो जाएगा, जिस की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हमें जातियों को खत्म कर के, एक मानव जाति को तैयार करना पड़ेगा, तभी हम इस देश में सुखी रहते हुए, समृद्ध हो सकते हैं।
राम सिंह आदवंशी।
महासचिव,
बहुजन मुक्ति पार्टी हिमाचल प्रदेश।
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