मनुवादियों को मूलनिवासी नारी प्यारी क्यों लगती है

 

मेरे 85% मूलनिवासियो,
सोहम, जय गुरुदेव!
भारत की जाति व्यवस्था ऐसी है जिसमें नारी के साथ किसी को भी तनिक भी छुआछूत नहीं है और मनुवादी नारी को भी ब्राह्मण, राजपूत, वैश्य और शूद्रों से कोई छुआछूत नहीं होती है, मगर मनुवादी ब्राह्मण, राजपूत और वैश्य पुरुष ही अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ी जाति और अल्पसंख्यक मर्दों के साथ ही छुआछूत करते हैं, केवल मर्दों को ही अछूत समझते हैं, इन के छूने से ये मनुवादी मर्द अपवित्र हो जाते हैं, इन के साथ खाने पीने से अपवित्र हो जाते हैं, शूद्र मर्दों के साथ ये लोग स्पर्श करने तक अछूत हो जाते हैं मगर अछूत औरत ब्राह्मणों, राजपूतों, वैश्यों को प्यारी लगती है, क्यों?
मनुवादी संविधान:-----मनुस्मृति मनुवादी संविधान है जो केवल और केवल मनुवादी लोगों की मौज-मस्ती, विलासिता, ऐश्वर्या के लिए पूर्ण रूप से स्वतंत्रता देता है। नारी शक्ति को केवल अपने भोग विलास की वस्तु समझ कर उस के शरीर के साथ खिलवाड़ करने की पूर्ण इजाजत देता है। नारी चाहे मनुवादी ही क्यों ना हो, वह भी मनुवादी पुरुष के लिए मनोरंजन और भोग की वस्तु है। मनुवादी संविधान के अनुसार नारी जाति कठिन दिनों में अछूत होती है, जिस के कारण मनुवादी पुरुष उसे अपने चूल्हे चौके से भी बाहर कर देते, ऐसी हालत में मंदिरों में भी नारी का प्रवेश अपवित्र मानते हैं, मगर समस्त शूद्र नारी को निर्वस्त्र रहने की पूर्ण स्वतंत्रता देता है, यहां तक कि शूद्र नारी अपने स्तन तक ढकने का हक अधिकार नहीं रखती थी, अगर ऐसा करती तो उस को मनुस्मृति में कठोर शारीरिक यातनाओं की व्यवस्था की गई है। यदि मनुवादी पुरुष सुंदर शूद्र नारी के शरीर का शोषण करना चाहे तो कर सकते हैं। अपवित्र होने से बचने के लिए इन के काले संविधान में व्यवस्था कर दी गई है, कि बलात्कार करते समय ब्राह्मण अपने जनेऊ को कान के ऊपर टांग कर शूद्र नारी के साथ अनाचार करने के उपरांत उस को कोई पाप नहीं लगता है। वह अपवित्र भी नहीं होता है।
शूद्र पुरुष पवित्र नहीं हो सकता:--- शूद्र पुरुष तो केवल मनुवादियों की गुलामी ही कर सकता है। मनुवादी पुरुष जनेऊ को कान के ऊपर टांग कर के भी शूद्र पुरुष के साथ स्पर्श करे तब भी मनुवादी अपवित्र और भ्रष्ट हो जाता है, कान पर टँगा जनेऊ तक उस को भ्रष्ट होने से बचा नहीं सकता है। यदि मूलनिवासी पुरुष, मनुवादी को स्पर्श करने की हिमाकत करता है, तो उस के लिए कड़े से कड़े दण्ड की व्यवस्था की हुई है। मनुवादी संविधान में दण्ड व्यवस्था ऐसी की गई है, जिसे सुन कर जानवरों की रूह भी कांप जाती है। यह व्यवस्था आज स्वतंत्रता के बाद भी खत्म नहीं की गई है। मनुवादी कांग्रेस और भाजपा सरकारों ने ऐसा करने वाले लोगों को पूर्ण संरक्षण देकर के मूलवासी लोगों के ऊपर अत्याचार ढाने का पूर्ण अधिकार दिया हुआ है।
आजाद भारत में भी मनुस्मृति लागू है :--- अब तो भारत आजाद हो चुका है। सभी को संविधान में बराबर मौलिक अधिकार दिए गए हैं। छुआछूत समाप्त हो गई है। छुआछूत करने पर कड़ी से कड़ी दण्ड व्यवस्था की गई है मगर इस के बावजूद भी आज मूलनिवासियों को मॉबलिंचिंग द्वारा मनुवादी बड़ी निर्दयता से मार रहे हैं। मूलनिवासी दूल्हे को घोड़ी पर चढ़ने नहीं दिया जा रहा है अगर कोई ऐसा करता है तो उसे गोली मारी जा रही है। अंतरजातीय विवाह करने पर गोली से भूना जा रहा है। मूलवासी लड़कियों के साथ बलात्कार कर के उन के साथ जानवरों जैसा व्यवहार कर के मारा जा रहा है। प्रधान मंत्री, मुख्यमंत्री, मंत्री तक ऐसे बलात्कारियों को संरक्षण देते आ रहे हैं। बलात्कार की शिकार लड़कियों को रात के अंधेरे में ही पुलिस के द्वारा जला दिया जा रहा है, ताकि कोई सबूत तक ना रहे। कोर्ट कचहरी में कोई न्याय नहीं मिल रहा है। मूलनिवासी अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट तक जाते हैं अगर सुप्रीम कोर्ट में भी मनुवादी न्यायाधीश मूलनिवासियों को न्याय नहीं देते हैं, बल्कि और ज्यादा न्याय का गला घोंटा जाता है, इतने अत्याचार होने के बाद भी मूलनिवासी राजनेता विधायक, सांसद और बड़े-बड़े अधिकारी मनुवादियों के चमचे बन कर उन की जूतियां चाट कर, उन का साथ देते आ रहे हैं, जिन लोगों ने इन के अधिकारों की रक्षा के लिए अपना सारा जीवन संघर्षों में गुजार कर अपना लहू वहा दिया था, उन वीर प्रवानों के बलिदानों और खून को ये अमीर मूलनिवासी पानी की तरह समझ कर पी रहे हैं और अपने समाज के साथ धोखा कर रहे हैं। ना जाने इन स्वार्थी और लालची लोगों की मरी हुई आत्मा कब जागेगी और अपने पांव पर खड़ा हो कर के जीवन जीने की बुद्धि पैदा होगी।
राम सिंह आदवंशी।
महासचिव,
बहुजन मुक्ति पार्टी हिमाचल प्रदेश।

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