कंपनियों को बंद करना भारत को बर्बाद करना है

 

मेरे 85% मूलनिवासी साथियो,
सोहम, जय गुरुदेव!
15 अगस्त 1947 को जब भारत आजाद हुआ तो उस समय भारत की अर्थव्यवस्था छिन्न-भिन्न हो चुकी थी मगर फिर भी देश में 70 कंपनियां चल रही थी, जब कि भारतवासियों को उस समय रोजी-रोटी के भी लाले पढ़ रहे थे। विदेशों से घटिया किस्म का अनाज लेकर के भारतीयों का पेट भरा जा रहा था। 1914 तक आते आते लाखों कंपनियां रजिस्टर्ड हो करके भारतीयों को रोजगार के अवसर उपलब्ध करवा रही थी मगर सुप्रसिद्ध अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री मोदी ने अनुभव किया कि कंपनी जगत में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है! कंपनी के मालिक टैक्स चोरी कर रहे हैं! कुछ कंपनियों के रिकार्ड से ज्ञात हो रहा था कि वे सरकार को अरबों खरबों रुपए का चूना लग रहा है! इसीलिए 2016-17 में 7943 कंपनियों को रजिस्ट्र से हटा दिया गया। 2018-19 में 234 371 को रजिस्टर से हटाया गया। 2018-19 में 138446 थी! इस प्रकार केंद्र सरकार ने 5 सालों में 3.96 लाख कंपनियों को बंद कर दिया और सरकारी रिकॉर्ड से हटा दिया गया! सरकार ने इन कंपनियों को बंद करने की जानकारी देते हुए राज्यसभा में बताया था' कि इन कंपनियों में अनुपालन में कमी हो रही थी, जिस के कारण इन को बंद किया गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है, कि सरकार ने ऐसी रजिस्टर्ड कंपनियों की पहचान करने और उन्हें बंद करने के लिए स्पेशल ड्राइव शुरू किया है, जिन्होंने पिछले 2 वर्षों से अपने फाइनेंसियल स्टेटमेंट के सालाना रिटर्न फाइल नहीं की हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अभी तक 6.8 लाख से अधिक कंपनियों को बंद किया जा चुका है, जिस की जानकारी भी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा को दी है, इस का कारण फाइनेंसियल स्टेटमेंट ही बताया है, इस प्रकार कुल 1894116 रजिस्टर कंपनियों में से 36.07% कंपनियां बंद हो चुकी है। कुल बंद कंपनियां 683317 में से:----
महाराष्ट्र में 1.4 2 लाख, दिल्ली में 1.25 लाख, बंगाल में 67000 घाटे में चल रही थी। 19 बड़ी कंपनियों को बंद करने के भी आदेश दिए जा चुके हैं। सरकार 28 और कंपनियों को बेचने जा रही है।
सरकार कहती है कंपनियों को बेचने से भले ही कोई लाभ हो या ना हो, मगर भाजपा सरकार का कहना है कि हम इन कंपनियों को अवश्य बेचेंगे। सरकार कहती है कि 1.75 लाख फर्जी कंपनियां थी, जिन को बंद कर दिया गया है, जिन से काला धन बढ़ रहा था। प्रधान मंत्री ने कहा है कि हम जनता का धन लूटने नहीं देंगे, डूबने नही देंगे। क्योंकि एक ही पते पर 400- 400 कंपनियों रजिस्टर्ड हुई है।
मैं मानता हूं 1914 तक कंपनियों की रजिस्ट्रेशन में गड़बड़ होती रही होगी, सरकार को भी कर चोरी से चूना लगता रहा होगा, मगर इतना तो जरूर था! कि जिन जिन कंपनियों को जबरन बंद किया गया, उन में लाखों लोग काम कर के अपने परिवारों का पालन पोषण कर रहे थे और भारतवर्ष को बेकारी, बेरोजगारी के कारण होने वाली अराजकता से भी भारत को बचाया जा रहा था, मगर मोदी सरकार ने इन कंपनियों में चल रहे भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए, बस इस भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए, सरकारी खजाने को चूना लगाए जाने के लिए, केवल एक ही उपाय देखा, कि इन कंपनियों को ही बंद कर दिया जाए मगर भाजपा सरकार ने यह भी नहीं देखा कि इन कंपनियों के बंद होने से कितने घरों में चुहला नहीं जलेगा? कितने लोग सड़कों पर बेरोजगार होकर के घूमेंगे? जबकि सरकार को चाहिए था कि जहां-जहां घोटाले चल रहे थे, जहां-जहां टैक्स चोरी हो रही थी, उन को बंद करने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए और कंपनियों को अगर आर्थिक सहायता की जरूरत होती तो उन को आर्थिक सहायता देकर के उन के मालिकों का मनोबल बढ़ाना चाहिए था और उन का उत्पाद भी बढ़ाना चाहिए था। जो बेकारी के कारण भारत की अर्थव्यवस्था चरमरा जाने वाली थी, उस को भी समझना चाहिए था मगर ऐसा नहीं किया गया, अदानी, अंबानी को अरबों रुपये कर्ज देकर लुटाए गए और माफ भी किये गए क्योंकि सरकार का जन्म ही बर्बादी के लिए हुआ था, मनुवादी सरकार का लक्ष्य ही गरीबों को नंगे भूखे रख कर के सड़कों पर मरने के लिए मजबूर करना था, जो आज भी जारी है मगर भारत की 85% मूलनिवासी जनता भी इतनी अंधी है कि कांग्रेस और भाजपा की लूट को नजर अंदाज करती आ रही है। कांग्रेस ने अरबों रुपए के कई घोटाले किए हुए हैं, जिन की नकल भाजपा ने कर के उन से भी अधिक खरबों रुपयों के घोटाले कर चुकी है। यह जनता जातिवाद में उलझी हुई है, यह जनता धर्म बाद में उलझी हुई है, जो 85% मूल निवासियों की राजनीतिक पार्टियां हैं वे इस के खिलाफ संघर्ष कर रही हैं, कि लूट खसूट करने वाले कांग्रेसी और भाजपा सरकारों को किनारे कर के गरीबों के कल्याण और उत्थान के लिए, ऐसी नीतियां बनाई जाएं, जिस से धरती का दोहन हो सके और सभी आर्थिक दृष्टि से बराबर हो कर के सुखमय जीवन जी सके। यह तभी हो सकता है, जब देश में बहुजन मुक्ति पार्टी की सरकार बने और हर परिवार में से एक व्यक्ति को रोजगार अवश्य दें, बहुजन मुक्ति पार्टी का लक्ष्य यही है कि हर परिवार को कम से कम एक आदमी को नौकरी अवश्य दी जाए या रोजगार का साधन उपलब्ध करवाया जाए इस प्रकार के कड़े नियम मनुवादी सरकारें कभी नहीं बनाएंगी, इसलिए भारत की 85% जनता को अपने मूलनिवासी लोगों की सरकार बनानी चाहिए तभी भारतवर्ष में समाजवाद आएगा।
राम सिंह आदवंशी,
महासचिव।
बहुजन मुक्ति पार्टी हिमाचल प्रदेश।

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