सुप्रीम कोर्ट का अन्याय पूर्ण व्यवहार

 मेरे 85% मूलनिवासी साथियो, 

सोहम, जय गुरुदेव!

मुंशी प्रेमचंद जी ने अपनी प्रसिद्ध कहानी "पंच परमेश्वर" मैं लिखा है कि पंचों के दिलों में ही "परमेश्वर" निवास करते हैं और इस पंच परमेश्वर कहानी के माध्यम से उस ने अधिकारियों, न्याय विद्धों, शिक्षा शास्त्रियों, कर्मचारियों को मार्ग दर्शन करने के लिए ही यह कहानी लिखी थी, जिस को पढ़ कर के अन्याय करने वाले लोग भी मित्रता और शत्रुता को तिलांजलि देकर न्याय करने के लिए विवश हो जाते हैं और वास्तव में जो व्यक्ति न्याय की कुर्सी पर बैठता है, वह सचमुच परमपिता परमेश्वर, आदि पुरुष ही होता है। उस के मुख से निकली हुई आवाज सत्पुरुष की आवाज होती है, क्योंकि आदि पुरुष कभी भी किसी के साथ अन्याय नहीं करता है, जिस का आभास हम ने साक्षात किया हुआ है, जिन जिन लोगों ने हमारे साथ अन्याय, अत्याचार किया है, ईश्वर ने उन को कड़ी से कड़ी सजा दी है। विदेशी शासक अंग्रेजों ने भारत के सभी वर्गों को पूर्ण न्याय दिया है। बेदर्द राक्षसों ने सती प्रथा, बलि प्रथा, बाल विवाह और छुआछूत आदि प्रथाएं बना रखी थी, जिन के खिलाफ अंग्रेजों ने ही कानून बना कर के इन राक्षसी बुराइयों का अंत किया था मगर स्वतंत्रता के बाद भारत के बहुत ही कम मूलनिवासी लोगों को सुप्रीमकोर्ट से न्याय मिला है, जब कि लोगों को अंत में सुप्रीम कोर्ट से ही न्याय की आशा होती है। यदि यहां पर भी कोई न्याय प्राप्त ना हो, तो सुप्रीम कोर्ट के बाद राष्ट्रपति से ही आशा होती है, मगर महामहिम राष्ट्रपति तो केवल मात्र सरकार द्वारा लिए गए निर्णय के ऊपर अपनी मोहर लगा कर के साइन ही करता है, जिस से भी आज तक किसी को कोई न्याय नहीं मिल सका है, क्योंकि हम ने देखा है कि सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना में स्थित गाँव संतोषगढ़, 2019 में भी 600 साल पुराने गुरु रविदास जी के दिल्ली स्थित तुगलकाबाद मंदिर को गिराने के आदेश दिए थे, तुगलकाबाद स्थित गुरु रविदास जी के मंदिर, सिकंदर लोधी और गुरु रविदास जी के इतिहास का नामोनिशान मिटाने के लिए विध्वंस करवाने के बाद 600 साल पुरानी बाबरी मस्जिद को भी सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार ही गिराया गया, यही नहीं कई और भी सतगुरु कबीर के मंदिर गिराए गए चर्च गिराए गए, अब कई मस्जिदों को गिराने का भी काम चल रहा है मगर सुप्रीम कोर्ट संविधान के अनुसार 1947 से पूर्व की स्थिति के अनुसार अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ी जाति और अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों को बचाने के लिए कोई निर्णय नहीं दे रहा है, बल्कि उन के खिलाफ ही निर्णय दे रहा है,अपने ही न्यायधीश जस्टिस लोया, जस्टिस कर्णन तक को न्याय नहीं दिया। ईवीएम ने सारे देश में अराजकता फैला रखी है, विजय माल्या जैसे लोग अरबों खरबों के घोटाले कर के बड़ी शानौ शौकत के साथ जी रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने बीपी सिंह के आदेश के अनुसार ओबीसी को आरक्षण लागू करने के लिए भी दो वर्ष तक देरी की। कई वर्षों तक अनुसूचित जाति, जनजाति के कर्मचारी पचासिवां संविधान संशोधन लागू करने के लिए अपने लाखों रुपए वकीलों को बर्बाद करते रहे मगर सुप्रीम कोर्ट ने कोई न्याय संगत निर्णय नहीं किया, जबकि सवर्ण लोगों को अन्याय पूर्ण 10% आरक्षण दिया गया, उस पर सुप्रीम कोर्ट ने कोई कड़ा संज्ञान नहीं लिया और ना ही उसे रद्द किया। 1970,1971 में देश में बंजर पड़ी खाली जमीन को कुछ लोगों को बांटा गया था, जिस के कई केस सुप्रीम कोर्ट में चल रहे हैं मगर 50 साल बीत जाने के बाद भी सुप्रीम कोर्ट भूमिहीनों को न्याय नहीं दे पा रहा है। यहां तक सुप्रीम कोर्ट ही, कार्यपालिका, विधानपालिका के खिलाफ मुकदमे सुनता है, जिन का चयन भी लोक सेवा आयोग द्वारा कठिन से कठिन परीक्षा द्वारा ही होना चाहिए ताकि योग्य और ईमानदार लोग न्यायधीश बन सकें मगर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश लोक सेवा आयोग के माध्यम से चयन के आदेश नहीं देता।आईएएस, आईपीएस आदि परीक्षाओं के इंटरब्यु में अनुसूचित, जाति जनजाति, पिछड़ी जाति के टॉपर्स को भी लोक सेवा आयोग के सदस्य कम अंक लेने वाले सवर्ण केंडिडेट्स से इंटरव्यू में कम अंक देते है, मगर कभी भी सुप्रीमकोर्ट ने इस अन्याय का संज्ञान नहीं लिया, जबकि देश में कहीं भी कोई अन्याय होता है, उस की केवल सूचना उच्चतम न्यायालय को चाहे अखबारों से ही मिले, उस के अनुसार ही सुप्रीम कोर्ट को संज्ञान लेना चाहिए। तो क्या यह छल कपट "पंच परमेश्वर" की जय मानी जा सकती है।

मेरा सभी 85% मूल निवासियों से अनुरोध है कि आप को कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधान पालिका में तभी न्याय मिलेगा, जब आप 85% लोगों की सरकार बनाओगे, तभी गरीब ब्राह्मण, राजपूत, वानियों और 85% अछूत मूल निवासियों को न्याय मिल सकेगा। इसलिए सभी मूलनिवासी, गुरु रविदास जी महाराज, सतगुरु कबीर, सतगुरु नामदेव, सतगुरु सेंन जी, महा ऋषि वाल्मीकि, बाह्ती, कोली, बंगाली, घुमन्तु आदि सभाएँ और सभी मूलनिवासी राजनीतिक पार्टियां ये निर्णय लेलें कि अब हम कभी कांग्रेस, भाजपा को समर्थन नहीं देंगे और ना ही हम वोट देंगे, सभी को ऐसा कर के तत्काल बहुजन मुक्ति पार्टी के झंडे के नीचे इकट्ठा हो कर अपनी 85% मूलनिवासी जनता की सरकार बनाने का प्रयास करें अन्यथा मनुवाद के गुलाम ही रहोगे।

राम सिंह आदवंशी।

महासचिव।

बहुजन मुक्ति पार्टी हिमाचल प्रदेश


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