डाकुओं के अरबों खरबों रुपए क्यों माफ किए जाते हैं
मेरे 85% मूलनिवासी साथियो,
सोहम, जय गुरुदेव!
आप जरा गहराई से सोचो! कि कितने प्रतिशत ब्राह्मण, राजपूत, वानियें और जाट मजदूरी करते हैं। आंख खोल कर देखो, कि जहां कहीं भी पुल बन रहे हैं, बिल्डिंगें बन रही हैं, सड़कें बन रही हैं, बाटर टैंक बन रहे हैं, फ्लाईओवर बन रहे हैं, ओवरहेड टैंक बन रही है, हवाई अड्डे बन रहे हैं, बन्दरगाहें बन रही हैं, दीवारों को रंग किया जा रहा है, इन सभी स्थानों पर 85% मूलनिवासी ही मजदूर दिखाई देंगे, जिन में मुझे नहीं लगता है, कि 1% भी जाट ब्राह्मण, राजपूत और वैश्य मजदूर, मजदूरी कर रहे हों, जितने मूलनिवासी स्त्री और पुरुष मजदूरी करते हैं, उन के शरीर के ऊपर हड्डियां ही हड्डियां नजर आती हैं, शरीर के ऊपर गले सड़े कपड़े नजर आते हैं, सभी झुग्गी झोपड़ियों में रात काट कर के, रूखी सूखी खा कर के मजदूरी करने के लिए जाते हैं। मजदूरी करने के बाद जब ये मजदूर ठेकेदार से अपनी मजदूरी मांगते हैं, तो सभी मजदूर खून के घूंट पीकर रह जाते हैं। मालिक इन्हें मजदूरी देने से भी इनकार कर देते हैं, यदि ये गरीब लोग अपनी कोई चाय पान की दुकान भी खोलना चाहें तो इन को बैंक भी कर्ज देने के लिए 36 कंडीशन लगा देता है, जिन को वे पूरा नहीं कर पाते हैं और अंततः वे कर्ज भी नहीं ले पाते हैं मगर ठीक इस के विपरीत बड़े-बड़े डाकुओं को सरकार खुद कर्ज दिलाती है। मंत्री और संतरी फोन कर के बैंक मैनेजर को अपने आकाओं को कर्ज देने के लिए विवश कर देते हैं, क्योंकि ये आका ही इन राजनेताओं को चुनाव लड़ने के लिए धन उपलब्ध करवाते हैं, जिस के बदले में ये विधायक, सांसद और मंत्री अपने आकाओं को हजारों, लाखों में नहीं करोड़ों, अरबों रुपए ऋण दिलाते हैं, फिर वे कर्ज भी चुकाते नहीं हैं और अपने गुलाम राज नेताओं को विवश कर देते हैं कि उन का कर्जा माफ किया जाए, इसी कारण इन के साथी नीरव मोदी 30,000 करोड़, विजय माल्या 10 हजार करोड़, ललित मोदी 3000 करोड़, नितिन संदेरा 11 लाख करोड़ लेकर भाग गए। भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन बड़े बड़े ऋण दातों का 11 लाख करोड़ माफ कर दिया। एक मित्र का तो ढाई लाख करोड़ अकेले का ही माफ कर दिया।
शिपयार्ड कंपनी की धोखाधड़ी में एसबीआई 2925 करोड़, आईसीआईसीआई 7089 करोड़, आईडीबीआई 3634 करोड़, बैंक ऑफ बड़ौदा 1614 करोड़, पीएनबी 1244 करोड़, ओवरसीज बैंक 1228 करोड़, कुल घोटाला 22842 करोड़ सरकार ने गरीबों की खून पसीने की कमाई डुबो दी।
ये सारे गबन सरकारों के आशीर्वाद से ही किए और करवाए जाते हैं। गरीबों को तो पहले कर्ज ही नहीं मिलता है और अगर थोड़ा बहुत मिल भी जाए तो बैंक उन के नाक में दम कर के उन के कर्ज को वापस ले लेते हैं मगर जिस प्रकार इन बड़े बड़े डाकुओं का धन ये बैंक वापस लेने के लिए इन को कभी विवश नहीं करते हैं। ये आप लोगों के लिए चिंतनीय विषय है! जिस को आप लोग समझ नहीं पा रहे हैं और अपना वोट इन डकैतों की सरकारें बनाने के लिए दे देते हैं। जो बड़े-बड़े ठगों को राहत देने के लिए उन का सारा ही कर्जा माफ कर देते हैं मगर आप गरीब मजदूरों को यह लाभ नहीं देते हैं, इस भेदभाव का मुख्य कारण है, आप को गरीब और लाचार बना करके रखना, ताकि आप इन लोगों को अपना मालिक समझ कर के, इन के निर्देश के अनुसार वोटिंग करते रहें, इसलिए अब समय आ चुका है, कि आप अपना वोट अपने 85% मूलनिवासी लोगों के दलों को ही दें और जो लोग झूठे इकरार कर के, झूठी गारांटियाँ देते हैं, मुफ्त का बिजली, पानी, राशन, सौलर लाइटें दे कर के वोट लेते हैं, उन सभी का आप बहिष्कार करें और 85% मूल निवासियों की राजनीतिक पार्टी बहुजन मुक्ति पार्टी को ही वोटिंग करें तभी आप को मनुवादियों की गुलामी से मुक्ति मिल सकती है। इसलिए आप सभी संयुक्त मोर्चा के अधीन इकट्ठे होकर के सभी राज्यों में अपनी संयुक्त मोर्चे की ही सरकार बनाएं, तब फिर केंद्र सरकार भी आप की ही बन सकेगी।
रामसिंह आदवंशी,
महासचिव,
बहुजन मुक्ति पार्टी हिमाचल प्रदेश।
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