लैंड सीलिंग एक्ट लागू क्यों नहीं हुआ
85% मूलनिवासी साथियो,
सोहम, जय गुरुदेव!
लैंड सीलिंग भूमि क्या है? स्वतंत्रता के बाद राजाओं, महाराजाओं, जागीरदारों, जैलदारों और बड़े बड़े जमींदारों की भूमि को अधिग्रहण किया गया था उसी भूमि को लैंड सीलिंग भूमि कहा गया है| ये भूमि शासन के अधीन रहती है और इस जमीन का पट्टा जरूरतमंदों को दिया जाता है, ताकि वे उस पर खेती कर सकें, इस भूमि को बेचा नहीं जा सकता है, किसी तरह के भवन नहीं बनाए जा सकते हैं और ना ही किसी तरह का कोई व्यवसाय किया जा सकता है| जमीदारी प्रथा के उन्मूलन के बाद लैंड सीलिंग एक्ट लागू किया गया था, जिस के अनुसार एक व्यक्ति 16 एकड़ से ज्यादा सिंचाई योग्य भूमि नहीं रख सकता था और असिंचित भूमि अठारह एकड़ तक रखी जा सकती थी, लेकिन कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आते ही लैंड सीलिंग एक्ट की परिभाषा में परिवर्तन कर के कंपनी शब्द को निकाल दिया, जिस के अनुसार एक व्यक्ति अधिक से अधिक भूमि 95.95 एकड़ जमीन खरीद सकता है, इस से अधिक खरीदने पर एक्ट प्रतिबंध लगाता है, यदि परिवार के 5 सदस्य हों तो इसकी सीमा छतीस एकड़ तक हो सकती है|
लैंड सीलिंग एक्ट लागू क्यों नहीं हुआ? 1947 से पूर्व भारत में 562 रियासतें थी, जिन के मालिक राजा थे, यही राजा अपना शासन, प्रशासन और जमीन छोड़ना नहीं चाहते थे, मगर सरदार वल्लभभाई पटेल ने जब इन राजाओं को भारत संघ में शामिल करने के लिए विवश कर दिया, तब ये लोग अपनी रियासतों को भंग करने के लिए राजी हुए थे, परंतु इधर सारे भारत के राजाओं ने अपनी जमीनों को बचाने के लिए आपस में एकता स्थापित कर ली और सक्रिय रूप से राजनीति में आ कर के इन्होंने अपनी भूमि को बचाने के लिए अंधाधुध चुनावों में धन खर्च कर के मुख्यमंत्री बन कर इस एक्ट को लागू नहीं होने दिया, जिस के कारण आज तक यह लैंड सीलिंग एक्ट पंगु बन कर के रह गया|
कांग्रेस पार्टी की मजबूरी:---- कांग्रेस पार्टी मनुवाद की रूलिंग पार्टी रही है, ये अपना वजूद बचाने के लिए किसी भी राजा उर्फ मुख्यमन्त्री के साथ सख्ती से पेश नहीं आई और ना ही आ सकती थी, क्योंकि राजसत्ता तो वास्तव में इन्हीं कपटी राजाओं के हाथ में चली गई थी, यही राजा मुख्यमंत्री बन कर के गरीबों के अधिकारों को छीन कर के अपना उल्लू सीधा करने में लगे रहे| जब कभी जनता ने लैंड सीलिंग एक्ट को लागू करने के लिए सरकार पर दबाव बनाया, भूमिहीनों को भूमि बाँटने के लिए संघर्ष किया, तब तब इन्हीं राजा लोगों ने जिन्हें आजादी के बाद मुख्यमंत्री कहा जाने लगा, लैंड सीलिंग एक्ट को हाईजैक कर के उन की आवाज को दबा दिया, शायद 1976 में तत्कालीन स्वर्गीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने एमरजेंसी लगा कर के भूमिहीनों को भूमि बांटने के लिए प्रयास किया था मगर उस में भी केवल वहीं जमीन लोगों को बांटी गई, जो शामलात भूमि पंचायतों के अंडर थी मगर छल कपट करने वाले बेईमान मन्त्रियों, विधायकों, प्रधानों, कर्मचारियों और मनुवादी अधिकारियों ने तब भी पात्र लोगों को जमीन बांटने नहीं दी| कुछ लोगों को जो जमीन दी गई वह भी ऐसी जमीन दी गई जो बहुत कम कृषि योग्य थी मगर जिन लोगों को यह जमीन मिली थी, उन्होंने उस जमीन को भी समतल कर के कृषि योग्य बना लिया था मगर 80% लोग इस लाभ से वंचित रखे गए जो आज भी ये आस लगाए बैठे हैं कि हमें सरकारी जमीन मिलेगी मगर ब्राह्मणवादी भाजपा और कांग्रेस पार्टियां अंदर से एक जैसी ही है, इसलिए वे किसी भी मूलनिवासी को अपने पांव पर खड़ा होने के लिए कभी भी भूमि बांटने का प्रयास नहीं करेंगी| ये भूमिहीन इन निर्दयी लैंड लार्डों के शोषण का शिकार होते आ रहे हैं और होते ही रहेंगे, इन को भरपेट भोजन तक नसीब नहीं करवाया जाएगा| धरती का भी दोहन सुचारू रूप से नहीं हो रहा है, जो लोग अपने हाथों से कड़ी मेहनत कर के कृषि करते हैं, उन्हें जमीन से मैंहरूम कर के रखा गया है| वे भी पराई जमीन के ऊपर कड़ी मेहनत कर के इमानदारी से कृषि नहीं कर पाते, करें भी क्यों ? क्योंकि भूमि के मालिक उन्हें उन की मेहनत की मजदूरी भी पूरी नहीं देते हैं, इसलिए आज जरूरत है कि लैंड सीलिंग एक्ट को शक्ति के साथ लागू किया जाए और जमीन उन लोगों को दी जाए जो अपने हाथों से खेती-बाड़ी करते हैं, जो मजदूरों से खेती-बाड़ी करवाते हैं, उनकी सारी जमीन का राष्ट्रीयकरण करके भूमिहीनों को ही बांट दिया जाना चाहिए, तभी भारतवर्ष की राष्ट्रीय आय बढ़ेगी और इससे भारत आत्मनिर्भर भी बनेगा यदि ऐसा नहीं किया गया तो भूखे मरने वाले भूमिहीन लोग खूनी क्रांति करने के लिए विवश हो जाएंगे, जिस के कारण भारत में अराजकता फैल सकती है, जिस को रोकने के लिए सरकार भूमि बांटने के लिए कोई ना कोई कड़ा कदम उठाए ताकि गरीबों का शोषण खत्म हो सके|
अमीरों, पूंजी पतियों को जमीन देना बंद की जाए:--- भारत की मनुवादी सरकारें अमीरों, पूंजीपतियों, सन्तों, बाबों और उद्योग पतियों को जमीन उपलब्ध करवाने में व्यस्त है, जिस को समतल करने के लिए भी मजदूरों का खून बहाया जा रहा है और वहां उनके उद्योग लगाए जा रहे हैं| गरीब लोगों का शोषण किया जा रहा है, भविष्य में इस अन्याय के क्या परिणाम निकल सकते हैं, यह मनुवादी सरकारों को नजर नहीं आ रहा है मगर कोई भी किसी को बड़ी देर तक मूर्ख बना कर के शोषण नहीं कर सकता है और एक दिन गरीब लोग खूनी क्रांति करने पर उतर आते हैं, फिर राजसत्ता के मालिक उन के खूनी हाथों का शिकार बन जाते हैं|
राम सिंह आदवंशी
महासचिव,
बहुजन मुक्ति पार्टी हिमाचल प्रदेश|
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