मोदी राज में भारत अंधेर नगरी बन गया
मेरे 85% मूलनिवासियो,
सोहम, जय गुरुदेव!
जब से मोदी सत्ता में आया है, तब से संविधान को दरकिनार करके असंवैधानिक निर्णय लिए जा रहे हैं, जबकि उनसे पहले 2014 तक 50% काम संविधान के अनुसार होता था मगर मोदी के आने के बाद सारे संविधान को सस्पेंड कर दिया गया है और मनमाने ढंग से, संविधान की धज्जियां उड़ा कर निर्णय लिए जा रहे हैं। लोगों का शोषण जोरों पर हो रहा है। कर्मचारियों और अधिकारियों की भर्ती के लिए केंद्रीय लोकसेवा आयोग, सबार्डिनेट सर्विस कमिशन केंद्र और सभी राज्य सरकारों ने बनाए हुए हैं, जिन के माध्यम से उम्मीदवारों के प्रिलिमनरी टेस्ट होते थे, उस के बाद फाइनल टेस्ट होता था। फाइनल टेस्ट के बाद फिर साक्षात्कार होता था, तब जा कर के फाइनल सिलेक्शन सूची जारी होती थी। चयन लिस्ट मेरिट के आधार पर ही बनती थी, मगर कांग्रेस सरकार के मुख्यमन्त्री वीरभद्र सिंह ने अपने सवर्णों को चोर दरवाजे से भर्ती करना शुरू कर दिया है। मूलनिवासी लोगों को चकमा देने के लिए पार्ट टाइम और अस्थाई आदि कच्चे कर्मी नियुक्त कर अपने कांग्रेसियों को ही भर्ती किया गया है, भर्ती के 5 साल के बाद फिर तीन साल के बाद उन सभी को रेगुलर कर दिया जाने लगा। जिस से कांग्रेस ने गरीब मूलनिवासी लोगों के साथ बहुत बड़ा धक्का किया है। गरीब लोगों का शोषण करने के लिए, उन्हें रोजगार ही देना बंद कर दिए गए, आशा बर्कर जैसे कच्चे कर्मी भर्ती कर के गरीबों का असन्तोष दबाने के लिए, खूनी क्रांति रोकने के लिए बेकार की नौकरियाँ देकर हिमाचल प्रदेश के युवाओं को मूर्ख बनाया जा रहा है। हिमाचल प्रदेश सबार्डिंनेट सर्विस कमिशन बेकार कर दिया गया। कमीशन की सारी कर्मचारी मशीनरी अपंग कर के निठ्ठली कर दी गई। योग्यता के आधार पर नाम मात्र कर्मचारियों का चयन किया जा रहा है। सभी विभागों में आउट सोर्सज अयोग्य कर्मी भर्ती किये जाने से अपराजकता फैलती जा रही है। बजट बचाने के लिए सरकारें हजारों पदों को खाली रख कर जनता को परेशानी में डालती जा रही है, विशेष कर शिक्षा विभाग में ही 2008 में तो बारह सौ प्रधानाचार्य के पद खाली रखे गए थे, लेक्चरर और टीजीटी के खाली पदों की तो गिनती ही नहीं, जानबूझ कर खाली पद भरे ही नहीं जाते, जिस से बच्चों का ज्ञान अधूरा रह जाता है और सरकारी स्कूलों, कालेजों विश्विद्यालयों से परेशान हो कर के वच्चे प्राइवेट स्कूलों में जाते हैं, जहां पर टीचर सिलेक्शन का कोई उचित मापदण्ड नहीं है, जो बच्चों के जीवन को बर्बाद करने का सरकारी षडयंत्र ही हैं, भारतीय जनता पार्टी ने भी इसी फार्मूले को अपनाया हुआ है, ये गरीब विरोधी सरकार तो शिक्षा का स्तर गिराने में कांग्रेस सरकार से भी कई गुना आगे निकल गई है। चोर दरवाजे से कर्मचारियों और अधिकारियों की भर्ती शुरू की हुई है, जिस से सारा शासन और प्रशासन अपंग हो गया है। शिक्षा का कोई महत्व ही नहीं रहा है। जो मनुवादी अमीर लोग प्राइवेट विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों से डिग्री ले रहे हैं, उन्हीं को ही मनुवादी सरकारें नौकरियां दे रही है। अभी-अभी इन प्राइवेट संस्थानों की पोल उस समय खुल गई जब हिमाचल प्रदेश के भूतपूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के विधायक राजकुमार विक्रमादित्य सिंह से पत्रकारों ने पूछा कि जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी का आजादी में क्या रोल था ? उन्होंने राजनीति में क्या भूमिका निभाई है, तब योग्य विधायक विक्रमादित्य सिंह ने उन को जवाब देते ही कहा, कि जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी ने आजादी की लड़ाई में बाईस साल जेल काटी थी और वे पहले राष्ट्रपति हुए हैं, जिस से स्पष्ट होता है कि कसौली जैसे रिंनाउंड विद्यालय में पढ़ा विक्रमादित्य कितने उच्च स्तर की शिक्षा ग्रहण करके आया है और पैसे के बल पर डिग्री ले कर हिमाचल प्रदेश में विधायक बन गया है। जब ऐसे ऐसे नालायक लोग राजसत्ता पर कायम रहेंगे तो उस देश की अर्थव्यवस्था का क्या हाल होगा, सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। राजकुमार विक्रमादित्य सिंह आरक्षण का सब से अधिक विरोध करके राजपूत युवाओं को भड़का कर आरक्षण खत्म कराने का षड्यंत्र रच रहा है। इसलिए सभी 85% मूलनिवासियों को तुरंत एक मंच पर इकट्ठा हो कर के इन नालायक लोगों से सत्ता छीनने के लिए तत्काल प्रयास करना चाहिए।
आज की डेट में मूलनिवासियों का केवल एक मात्र प्रशिक्षित और अनुशासनप्रिय संगठन बामसेफ है और राजनीतिक दल *बहुजन मुक्ति पार्टी* ही है, जिस के संयुक्त मोर्चा ने, चुनाव में उतरने का निर्णय ले लिया है, इसलिए सभी मूल निवासियों को कसम खा कर के इस बार संयुक्त मोर्चे को ही वोट डालना है, केवलमात्र खुद भी वोट डालना है, अपने रिश्तेदारों, मित्रों को भी यह समझा देना है, कि आज के बाद हम किसी भी मनुवादी पार्टी को वोट नहीं डालेंगे अन्यथा इन के ही लोग नौकरी कर पाएंगे और 85% मूलनिवासियों का आरक्षण खत्म करने के लिए निजीकरण करते ही रहेंगे, मूलनिवासी धन धरती के बिना मजदूरी करते करते ही मर जाएंगे।
राम सिंह आदवंशी।
महासचिव,
बहुजन मुक्ति पार्टी हिमाचल प्रदेश।
नोट:--- सभी रीडर साथी अपने मित्रों को भी इन लेखों को आगे शेयर अवश्य करें, ताकि मूलनिवासी लोगों में जागृति पैदा हो सके।
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