गुरु रविदास जी महाराज ने कहा है जैसे को तैसा करो
मेरे 85% मूलनिवासी साथियो
सोहम, जय गुरुदेव!
भारतवर्ष में मनुस्मृति के अनुसार शासन चल रहा था, जिसके अनुसार अंधाधुंध भारत के मूल निवासियों को प्रताड़ित किया जाता था, बलि दी जाती थी, पशुओं की तरह व्यवहार किया जाता था, मनुवादियों के इन कुकृत्यों को देख कर के ही गुरुओं के गुरु रविदास जी महाराज भारत की धरती पर आए थे। भारतवर्ष में काफर कातिलों, खूनी अत्याचारियों, व्याभिचारियों, अनाचारियों, दुराचारियों, बलात्कारियों का शासन चल रहा है, जिस से मासूम, भोलेभाले भारत के मूलनिवासी बड़ी निर्दयता और नृशंसता के साथ मारे जा रहे हैं, उन्हीं कातिलों को नकेल डालने के लिए ही वे अवतरित हुए थे। गुरु जी ने लक्षणा शब्द शक्ति में समझाया था कि:----
"सतिसंगति मिलि रहिओ माधो, जस मधुप मखीरा"
गुरु रविदास जी महाराज नि:संकोच, निडर, निर्भय और स्वाभिमान से भारत के 85% मूल निवासियों को खोल कर समझाते हैं, कि आप अपने ही देश में गुलाम बन कर जीवन जी रहे हो! 5000 सालों से चली आ रही यूरेशियन आक्रांताओं की गुलामी के कारण आप की आत्मा मर चुकी है! आप का स्वाभिमान मर चुका है! आप ज्ञानहीन अनपढ़ हो कर पशुओं का जीवन जी रहे हैं! भारत में जो बूचड़ राज चल रहा है, वही इस का मुख्य कारण है इसलिए आप सभी आपस में अच्छी संगत बना कर मिल जुल कर के रहो। 85% मूलनिवासियो आपस में संगठित हो कर के, शिक्षित हो कर के, वीर बहादुर बन कर के, अपना जीवन जियो क्योंकि आप सभी लोग 6743 जातियों में बांटे हुए हैं, जिस के कारण आप आपस में एक दूसरे से नफरत करते हो, यहाँ तक कि मुसीबत में भी आपस में एक दूसरे की सहायता नहीं करते हो और मनुवादी आप को भेड़ियों और शेरों की तरह बड़ी निर्दयता से मार काट कर एक-एक कर के खाते जा रहे हैं मगर जो कुछ एक, आप के मूलनिवासी भी शेरों और भेड़ियों की खाल पहन कर के, शेर और भेड़िए बन गए हैं, वे भी असली शेरों और भेड़ियों के साथ मिल कर आप गरीबों, भूमिहीनों के खून पसीने की कमाई को खा रहे हैं। वे भी आरक्षण का लाभ ले कर विधायक और सांसद बन कर, यूरेशियन लोगों के साथ मिल कर आप का ही खून पिये जा रहे हैं, इसीलिए गुरु जी आप को समझाते हैं, कि आप दयालु- दानी, शालीन और खूंखार बनना मधुमक्खियों से जीना सीखो, मधुमक्खियां सप्रेम मिल जुल कर के, एकता बना कर के, केवल एक ही छत्ते में, केवल एक ही मधुमक्खी रानी के नेतृत्व में दिन रात काम करती हुई रहती हैं। अपना निवास स्थान और शहद का भंडार अपना छत्ता ही बनाती हैं। उस में निर्भय, निडर और खूंखार बन कर रहती हैं। सारा सारा दिन कड़ी मशक्कत कर के फूलों के ऊपर से मधु इकट्ठा कर के छत्ते में जमा करती रहती हैं, जो कोई भिखारी, लूटेरा उस मधु को छीनने के लिए आता है, वे बड़े स्वाभिमान से किनारे हो कर के उसे मधु ले जाने देती हैं, किसी को रंच मात्र भी नुकसान नहीं पहुंचाती हैं और अपने आप शहद के खजाने को छोड़ कर के किनारे बैठ जाती हैं। शायद ये महसूस करती होंगी, कि हम ने किसी भिखारी को अपना शहद दान कर दिया है, उन की महारानी मक्खी भी उस चोरी से दुखी नहीं होती है मगर जब कोई मूर्ख अत्याचारी, कातिल उन के छत्ते को पत्थर मारता है, तब वे किसी की भी नहीं सुनती हैं और ना ही अपनी मालिक मधुमक्खी महारानी से कोई आदेश प्राप्त करती हैं, वे तुरंत कातिल के पीछे दौड़, दौड़ कर उसे भी दौड़ाती दौड़ाती, उस अत्याचारी को दंश मारती हुई, काटती ही जाती है, चाहे वह सागर, समुंदर के बीच छुप जाए, वहां भी ढूंढ कर के उस को खा जाती हैं और खा पी कर के छोड़ देती हैं, ताकि कुत्ते, बिल्ले उस को खाकर हजम कर लें।
गुरु रविदास जी महाराज मधुमक्खियों के दोनों व्यवहारों के द्वारा समझाते हैं, कि आप भी मधुमक्खियों की तरह ही इकट्ठे, एकता बना कर के जीवन जियो "हां" अगर कोई मूर्ख आप के अस्तित्व से छेड़खानी करता है, आप के साथ कोई अन्याय, अत्याचार, अनाचार, दुराचार करता है, आप के साथ कोई खून खराबा करता है, तो आप भी उस का बदला मधुमक्खियों की तरह ही लो और जब आप ऐसा करोगे तो कोई भी आप के साथ अत्याचार, बलात्कार, खून खराबा नहीं करेगा, इसलिए आप सभी धार्मिक, राजनीतिक और सामाजिक रुप से तत्काल मधुमक्खियों की तरह इकट्ठे हो जाओ और केवल आदि धर्म के झंडे तले इकट्ठे हो कर के आदि धर्मी बन जाओ क्योंकि वे फरमाते हैं कि:----
आद से प्रगट भयो जा को ना कोउ अंत।
आदधर्म गुरु रविदास का जाने बिरला संत। बाकी सभी धर्म को त्याग दो, इसी तरह आप अपने गुरु रविदास संगठनों, सतगुरु कबीर संगठनों, सतगुरु नामदेव संगठनों, महाऋषि बाल्मीकि संगठनों, सद्गुरु सेन संगठनों और भी अन्य सभी कोली, बाहती, घिर्थ, कुम्हार, आदि जातीय संगठनों को बंद कर के केवल एक मूल निवासी संगठन के झंडे के नीचे इकठ्ठे हो कर, आपसी सामाजिक और धार्मिक एकता स्थापित करो, इसी तरह सभी राजनीतिक दलों को भंग कर के केवल एक मात्र मूलनिवासी राजनीतिक संगठन, फ्रंट बना कर के, खूनी अत्याचारियों का शासन खत्म करने के लिए तत्काल एक मुठ हो जाओ अन्यथा बार बार राजस्थान के निरीह इंद्र कुमार, हैदराबाद के रोहित वेमुला, गायक सिद्धु मूसेवाला की तरह और भी कई बेगुनाह वच्चे शहीद किये जाते रहेंगे।
राम सिंह आदवंशी।
महासचिव,
बहुजन मुक्ति पार्टी हिमाचल प्रदेश
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