मूल निवासियों आपका भूमिहीन होना है आप की गुलामी का प्रतीक है
मेरे 85% मूलनिवासियो,
सोहम, जय गुरुदेव!
आज से 4000 साल पहले आप के पूर्वजों का शासन था, जिस के अंतिम सम्राट शिव शंकर को ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने छलबल से मार कर के उस की राजसत्ता छीन कर आप की सिंधु घाटी की सभ्यता, संस्कृति को जला कर खत्म कर दिया था! आप को बुरी तरह गुलाम बना कर के रखा गया था! आप की धन-धरती को छीन कर के आप को बेघर कर दिया गया था! आप को अपने मुजारे बना कर के अपनी सेवा के लिए बंधुआ मजदूर बना कर के रख लिया था! जो लोग बंधुआ मजदूर नहीं बने थे, उन का बड़ी नृशंसता से कत्लेआम कर के मिटा दिया था! मगर जिन मूलनिवासी आदिवासियों ने जिंदा रहना स्वीकार किया था, यूरेशियन लोगों ने उन के साथ समझौता कर लिया था कि आप हमारे गुलाम बन कर रहोगे। तब से ही आप गुलामी भरा जीवन जीते आ रहे हैं! भारत की धरती, आप की अपनी धरती थी, जिस को पूरी तरह आर्यों ने छीन कर अपने कब्जे में ले रखा है! अंग्रेजों ने भारत में आकर के यूरेशियन लोगों की गुलामी के कानूनों के रद्द कर के खत्म किया था, जिस के फलस्वरूप आप लोग भारत की धरती के पुन: मालिक बनने शुरू हुए थे मगर वह भी बहुत कम मात्रा में जमीन दी गई। जब आप के मूलनिवासी "सांसी जाति" के महाराजा रणजीत सिंह शासक बने तब उन्होंने गुलाम कुषाण जाति के लोगों को, जिन्हें आज किसान या जाट कहा जाता है, थोक में जमीन बांटी थी। इसी तरह हरिसिंह नलवा आदि ने भी जाटों को जमीने बाँट कर के उन को भूमि का मालिक बनाया गया था मगर उन्होंने भी भारत के मूलनिवासी अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ी जातियों के लोगों को थोक में जमीन नहीं बांटी थी, जिस के परिणाम स्वरूप आप लोग आज भी धरती से वंचित रखे गए हैं, जिस के कारण इन लोगों के पास अनाज पैदा करने के लिए कोई साधन नहीं है। केवल मजदूरी के ऊपर मूलनिवासी जीवन जीते आ रहे हैं, जिस के कारण आप मजदूरी से जो धन इकट्ठा करते हैं, वह तो खाने-पीने के सामान पर ही खर्च हो जाता है, जब कि ये आप को जमीन से मिलना चाहिए था। इसी कारण आप अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं दे पाते हैं, अच्छे मकान नहीं बना पाते हैं, उद्योग और इंडस्ट्री नहीं लगा पाते हैं, अपने स्कूल नहीं खोल पाते हैं, अपनी दुकान नहीं चला पाते हैं, इन जालिम, खूनी अध्यापकों से इंद्र कुमार, रोहित बेमुला,और मासूम वच्चियों को नहीं बचा पाते हैं। इसलिए भारत के मूल निवासियों को घुट घुट कर जीवन जीना पड़ रहा है, परंतु आप लोग अपने साहिब कांशी राम और वामन मेश्राम, कुमार काले, वीएल मातंग आदि महापुरुषों के बताए हुए रास्ते पर भी नहीं चल रहे हैं और जो चल रहे हैं, वे भी खूनी मनुवादियों के गुलाम पिछलग्गू बन कर के विधानसभा और संसद में बैठे हुए हैं। ये लोग वहां पर भी जलील हो कर के अपनी नारकीय जिंदगी जी रहे हैं! इन लोगों को तनिक भी शर्म और हया नहीं है, कि सभी इकट्ठे हो कर के अपने ही "लाल झंडे" के नीचे अपनी सरकार बनाएं! यदि अपने "सांसी" जाति के महाराजा रणजीत सिंह, महाराजा शिवाजी की तरह अपना राजपाठ और अपना शासन प्रशासन स्थापित कर लें, तो महाराजा रणजीत सिंह, महाराजा हरी सिंह नलवा, महाराजा शिवाजी, की तरह ही आदिवासी मंत्री, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री भारतवर्ष के मूल निवासियों को जमीन अवश्य बाटेंगे और सभी मूलनिवासियों को आत्मनिर्भर अवश्य बनाएंगे, इसलिए 85% मूल निवासियों को कसम खा लेनी चाहिए, कि आज के बाद हम कभी भी मनुवादियों की पार्टियों को कोई वोट नहीं डालेंगे और मनुवादियों को वोट भी डालने नहीं देंगे। यह क्रूर मनुवादी आप लोगों को गुमराह करते हैं कि आप की पार्टी कभी नहीं जीतेगी और आप का वोट बर्बाद जाएगा, इसलिए आप अपना वोट बर्बाद मत करो!
मेरे प्यारे मूलनिवासी साथियो! आप का वोट हार जाए या जीत जाए मगर आप का वोट कभी भी कांग्रेसी, बीजेपी और आप पार्टी को नहीं जाना चाहिए। यदि आप का वोट कभी हारेगा, तो कभी जीतेगा भी, क्योंकि साहिब कांशीराम जी ने भी 1984 में जब बसपा बनाई थी, तब कहा था, "कि बहुजन समाज पार्टी पहले बुरी तरह हारेगी, पिटेगी मगर दूसरी बार कांग्रेस को बुरी तरह हराएगी और तीसरी बार आप की सरकार बनेगी, जो सच्च ही साबित हुआ था। बहुजन समाज पार्टी पहली बार बुरी तरह हारी थी, दूसरी बार कांग्रेस हराई थी और तीसरी बार उत्तर प्रदेश में अपनी सरकार बनाई थी मगर पिछड़े दिमाग के पिछड़े नेता मुलायम सिंह यादव और लालू प्रसाद यादव, साहिब कांशी राम जी के साथ कंधे से कंधा मिला कर नहीं चले अन्यथा उस समय ही साहब कांशी राम भारत के प्रधानमंत्री बनते और आज भारत में कोई भी भूमिहीन नहीं रहता और आप लोगों को भूमि बांटी जाती, जिस से आप फल, मेवे और सब्जियां पैदा कर के अपनी आमदन बढ़ा सकते थे। जो कुछ आप मजदूरी से कमाते, उस से आप सुंदर सुंदर महल बना कर के अपने बच्चों को देश विदेश में उच्च शिक्षा दिला सकते थे मगर आप की सरकार ना होने के कारण आप के बच्चों को उच्च शिक्षा नहीं मिल पा रही है और जो आप के वच्चे सरकारी विद्यालयों में पढ़ रहे हैं, उन को भी ये सरकारें बिना परीक्षा से पास कर के बर्बाद कर रही है, कुछ मेधावी छात्रों को लैपटॉप बांट करके उन को लैपटॉप में ही व्यस्त करके पढ़ाई से दूर कर रहे हैं, इसलिए आप सभी से अपील है, कि इस बार आप सभी मूलनिवासी संयुक्त मोर्चे को ही वोटिंग करें और अपने ही विधायक और सांसद बनाएं तभी आप को न्याय मिल सकेगा, आप को उच्च शिक्षा मिल सकेगी, आप की बेकारी खत्म हो सकेगी।
रामसिंह आदवंशी।
महासचिव,
बहुजन मुक्ति पार्टी हिमाचल प्रदेश।
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