तिरंगा झंडा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

 मेरी 85% मूलनिवासी साथियो,  

सोहम, जय गुरुदेव!

बड़े हर्ष का विषय है कि हमारे देश के धीर, वीर, बहादुर नौजवानों ने भारत को मुसलमानों और अंग्रेजों से स्वतंत्र करवाने के लिए अपने प्राणों की परवाह ना करते हुए, गुलामी की बलिवेदी के ऊपर शहादत देते हुए गुलाम भारत को आजाद करवाया था। भारत के तिरंगे झंडे को हाथ में ले कर के नेफा, लद्दाख और कारगिल में दुश्मनों का सफाया कर के एक अरब भारतीयों की रक्षा के लिए सैनिक ने अपने प्राणों की आहुति देकर भारत को गुलाम होने से बचाया है। झंडा केवल डंडा और कपड़ा नहीं है, अपितु यह भारत की आजादी और स्वाभिमान का प्रतीक है। इस झंडे को लेकर के सैनिक सीमाओं पर मान सम्मान और स्वाभिमान से मस्तक ऊंचा कर के पहरा देते हैं। झंडा तनिक भी ना झुके उस के लिए वे अपने प्राणों की आहुति दे देते हैं। यदि कोई झंडे को झुकाने का प्रयास भी करें, तो उस को मौत के घाट उतार देते हैं। वीर सैनिक युद्ध क्षेत्र में दुश्मन के किले को फतेह करने के बाद तत्काल अपनी जीत और अधिपत्य को दिखाने के लिए उस स्थान पर अपने झंडे को गाड़ देते हैं, जिस से ज्ञात होता है, हम ने अमुक किले को फतेह कर के अपने कब्जा कर लिया है अर्थात झंडा अपनी जीत का प्रतीक है। अपने देश के मान सम्मान का प्रतीक है। अपने देश के गौरव का प्रतीक है, इसीलिए लेखकों, कवियों ने अपने लेखों और अपनी कविताओं में कहा है, कि हम मर मिट सकते मगर तिरंगे झण्डे को झुकने नहीं देंगे, परंतु इस बार झंडे का जो जुलूस निकाला गया, वह देखते ही बनता है, झंडे के नाम पर धन की उगाही की गई और अपने मित्रों से झण्डे बनवा कर उन्हें मालामाल किया गया, जगह जगह झण्डे लहराए गए, शहरों, गलियों, कूचों में वच्चों, बूढों से तिरंगा रैलियां करवाई गई मगर गलियों में जो झंडे लापरवाही से फेंके गए, जिन के ऊपर गंदे पाँव पड़े, उन्हें देख कर के बड़ी आत्मग्लानि हुई, उस से ज्यादा हैरानी की बात तो तब हुई जब भारत के होनहार प्रधानमंत्री झंडे को रुमाल के रूप में प्रयोग करते हुए, बहते हुए नाक की गंदगी को साफ करने के लिए प्रयोग करते हुए नजर आए। 

प्रधानमंत्री महोदय ने झंडे का मान सम्मान करने के लिए गरीबों की जेब तक काटने के लिए अधिकारियों और कर्मचारी को विवश कर दिया मगर खुद उस झंडे का जो अपमान किया उस से यह साफ जाहिर होता है, कि राजनेताओं के लिए झण्डा कोई मायने नहीं रखता है, लोगों को मूर्ख बनाने के लिए केवल दिखाबा मात्र ही है, जब कि तिरंगे के मान सम्मान की इन को कोई चिंता नहीं है। इन को चिंता केवल राजसत्ता को साम, दाम, दंड, भेद नीतियां अपना कर, छीन कर हथियाने की है।

रामसिंह आदवंशी। 

महासचिव, 

बहुजन मुक्ति पार्टी हिमाचल प्रदेश। 


Comments

Popular posts from this blog

गुरु रविदास जी की क्रांतिकारी वाणी दोधारी है।

क्रांतिकारी शूरवीर गुरु रविदास जी महाराज।।

उत्तर प्रदेश में चल रहा बुलडोजर।