सरकारी जमीन का दोहन

 मेरे 85% मूलनिवासी साथियो,

सोहम, जय गुरुदेव!

उत्तर प्रदेश की सरकार, सरकारी जमीन को 99 वर्षों के लिए बड़े-बड़े अमीरों, पूंजीपतियों और कंपनियों के मालिकों को देने जा रही है, ताकि बेकार बंजर पड़ी हुई सरकारी जमीन का दोहन किया जा सके| सरकारी जमीन के दोहन की बात तो बहुत ही अच्छी बात है, जनता के लिए बहुत ही लाभकारी हैl खाली पड़ी बेकार जमीन से यदि उत्पाद लिए जाएं तो भारत की दशा और अर्थव्यवस्था में क्रांतिकारी परिवर्तन हो सकता है| भूखे नंगे रहने वाले भूमिहीन भी समृद्ध और खुशहाल हो सकते हैं| भारत में कोई भी गरीब भूखा नहीं मर सकता है| परंतु आज तक ये सरकारी जमीन बंजर रह कर के सरकार को रोती रही, कि मैं बांझ पड़ी हुई है और मेरा दुरुपयोग होता आ रहा है| भूखे नंगे मरने वाले भूमिहीन भी चाहते हैं, कि बंजर पड़ी सरकारी जमीन हमें दी जाए, ताकि हम फलदार पौधे लगा कर के बगीचे लगा सकें, भिन्न भिन्न प्रकार की सब्जियां और फसलें उगा कर के भरपेट भोजन कर सकें| घरों में बेकार रहने वाले बच्चे, बूढ़े और स्त्रियां भी खेतों में काम कर के अपने परिवार का गुजारा कर सकें मगर कांग्रेस और भाजपा ने आज तक इन भूमिहीनों को भूमि हीन रख कर के बड़ी निर्दयता के साथ उन को नंगे भूखे मरने के लिए विवश कर रखा है मगर ना जाने आज उत्तर प्रदेश की मूलनिवासी, मुस्लिम, अछूत विरोधी सरकार के दिमाग में क्या आ गया है, कि वह सरकारी जमीन का दोहन कर के उस का लाभ उठाना चाहती है|

मुझे इसके पीछे एक षड्यंत्र नजर आ रहा है कि सरकारी जमीन का दोहन करने के बहाने भाजपा सरकारी जमीन को पूंजीपतियों, अमीरों और अपने सगे संबंधियों को लुटा कर के अपना उल्लू सीधा करना चाहती है| इन लोगों को यह जमीन 99 वर्षों के लिए लीज पर देने का प्रस्ताव पारित कर के जमीन बाँटने का वातावरण बनाया जा रहा है मगर यह जमीन इन लोगों को सीधे रूप में नहीं दी जा रही है, जो इस के ऊपर खुद कृषि कर के अनाज उत्पन्न कर सकें| गरीबों को फिर इन शोषक, अमीरों, पूंजीपतियों का ही गुलाम बनाने की एक साजिश नजर आ रही है, जिस को समझना बहुत जरूरी है| 85% मूल निवासियों को इकट्ठा हो कर के सरकार को विवश करना पड़ेगा कि यह जमीन सीधे गरीब भूमिहीनों को दी जाए और सभी भूमिहीनों से ही सरकार टैक्स ले कर सरकार की आय भी बढ़ाए| सरकार को भी जमीन से आमदनी होगी और गरीब लोग स्वतंत्र हो कर के अपनी इच्छा अनुसार बंजर पड़ी जमीन का लाभ उठा सकेंगे| यदि जमीन के मालिक अमीर ही होंगे और उस के ऊपर काम करने वाले केवल गरीब ही होंगे तो इन गरीबों का अमीर पूंजीपति शोषण ही करेंगे, जिस से धरती का दोहन भी शत प्रतिशत नहीं होगा, क्योंकि पराई जमीन के ऊपर कोई भी व्यक्ति ईमानदारी से कृषि नहीं करता है और ना ही कोई करेगा और ना ही किसी को पराई जमीन के ऊपर कोई काम करना चाहिए, ना ही किसी को अपने खून पसीने की कमाई किसी कंपनी के अमीर पूँजीपति को मिलनी चाहिए| यदि मूलनिवासी भरपेट खाना, खाना चाहते तो अपनी मूलनिवासी सरकार बनानी होगी अन्यथा मनुवादी सरकारें अपने मच्छरों को ही पाल कर आप का खूंन पियेंगी|

रामसिंह आदवंशी|

महासचिव|

बहुजन मुक्ति पार्टी हिमाचल प्रदेश|


Comments

Popular posts from this blog

गुरु रविदास जी की क्रांतिकारी वाणी दोधारी है।

क्रांतिकारी शूरवीर गुरु रविदास जी महाराज।।

उत्तर प्रदेश में चल रहा बुलडोजर।