सिंधुघाटी सभ्यता के साथ गुरु रविदास जी के सिद्धांत मिलते हैं।।
।।सिंधुघाटी सभ्यता के साथ गुरु रविदास जी के सिद्धांत मिलते हैं।।
सिंधुघाटी सभ्यता के मिले ऐतिहासिक अवशेषों से ज्ञात होता है, कि उस काल में ही बेगमपुरा स्थापित था, जिस देश काल में ना सेना थी, ना ही पुलिस थी, जिस शासन में किले दुर्ग ना हों, जिस काल में किसी को फांसी ना हुई हो, किसी का शोषण ना हुआ हो, वही काल सवर्ण युग हो सकता है वही राज्य बेगमपुरा हो सकता है, वही शासक आदर्श शासक हो सकता है, जिस प्रकार वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन काल में चिताओं को जलाने की पंक्तियां लगी हों, चारों ओर त्राहिमाम मचा हो, चारों ओर कोहराम छा रहा हो, सरकारी खजाने खाली कर के पत्रकार खरीद कर झूठा प्रचार कर के सरकार के काले कारनामे छुपाए जा रहे हों, राफेल जैसे फ्रांसीसी जहाजों की खरीद फरोख्त की फाइलें ही गायब हो रही हों, कोरोना की आड़ में गरीबों को नंगा भूखा मारा जा रहा हो, रोजगार खत्म कर के डेढ़ अरब भारतीयों को सड़कों पर खड़ा कर दिया हो, मूक दर्शक दरबारी भी पाप कर्म में शामिल हो कर जनता का खून निचोड़ने में भागीदार हों, उस काल में क्या आदपुरुख किसी शासक का साथ देता है? मगर इन काले कारनामों का सिंधु घाटी की सभ्यता में कोई भी नामोनिशान नहीं मिला है, जिस का साफ साफ अर्थ निकलता है कि, उस समय गुरु रविदास जी की विचारधारा के अनुसार ही सरकार चलती थी और जनता भी सत्य के मार्ग पर चलती थी, जिस के कारण इस काल को स्वर्ण युग कहा जाता है।
गुरु रविदास महाराज, अंतर्ज्योति ज्योतिर्ज्ञानी गुरु हुए हैं, आज तक जिन का दुनियां के किसी भी छोर में कोई बराबरी करने वाला नजर नही आता है, भले ही ब्राह्मणों ने,भारत के वीर सपूत, ज्योतिर्ज्ञानी, अजेय छत्रधारी सम्राट की कदर नहीं की है और अपनी श्रेष्ठता की लाज बचाने के लिए, गुरु जी को विश्व मानचित्र से लुप्त कर दिया है मगर विदेशी स्कालरों ने गुरु रविदास जी की प्रतिभा को समझा है, परखा है और उन के दर्शन को आलोचनात्मक दृष्टि से, लिख कर भावी स्कालरों के लिए मार्ग दर्शन किया है। गुरु जी के ज्योतिर्ज्ञान का आभास निम्नलिखित पंक्तियों से किया जा सकता है:---
सगल भवन के नायका, इक छिन दर्श दिखाई जी।
मलिन भई मति माधबा, तेरी गति लखि ना जाई।
करहु कृपा तुम चुकई, मैं सुमति देहु समझाई।
गुरु रविदास जी महाराज, ज्योतिरमण्डलों के सर्वोच्च नायक आदपुरुख की सर्वोच्चता का बड़ी बारीकी से सँगत को समझाते हैं कि, आप सम्पूर्ण ज्योतिरगुरु हैं, आप ही सृष्टि के नायक अर्थात नेतृत्व करने वाले विश्व गुरु हो, ज्योति से प्रकाश करने वाले हो, इसीलिए आप सँगत को दर्शन देकर भूली भटकी हुई आत्मा को सन्मार्ग दिखाओ। आप ही विश्व गुरु हैं, हे!आदपुरुष आप के अतिरिक्त कोई भी धरती पर गुरु नहीं है, यही सत्य, यही तर्कसंगत प्रमाण सिंधुघाटी की सभ्यता में मिले हैं जिन को ब्राह्मणों ने पुनः छुपा कर, प्राचीन सभ्यताओं को मलिन कर के लिख दिया है। जब सिंधुघाटी की सभ्यता में किसी भी देवी देवता का पूजा घर नहीं मिला है तो फिर उस मे, देवी देवताओं को ढूंढना केवल ब्राह्मणवाद के सिवाए कुछ भी नही है।
प्रोफैसर लालसिंह अपनी पुस्तक गुरु रविदास जी दा धर्म सिंधुघाटी दे आदिवासी अछूतां दा आदधर्म के पृष्ठ 53 पर लिखते हैं कि, सिंधुघाटी के आदधर्म की सीलों की विचारधारा और गुरु रविदास जी महाराज की वाणी की विचारधारा के बीच सतिगुरु प्रसादी का सिद्धांत स्पष्ट रूप में मिलता है, वे आगे लिखते हैं कि, सिंधुघाटी के आदधर्म के सबूतों के बीच उपलब्ध विचारधारा के बीच आज की इकीसवीं सदी के धार्मिक विचार उपलब्ध हैं। गुरु रविदास जी महाराज और सिंधुघाटी सभ्यता के अध्ययन से स्पष्ट ज्ञात हो रहा है कि, सिंधुघाटी की सभ्यता की सीलों से स्पष्ट रूप में निरूपित मूल मंत्र के सिद्धांतिक विचार उपलब्ध हैं। कमाल तो ये है कि सिंधुघाटी की विचारधारा विज्ञान के सिद्धांतों के ऊपर भी पूरी उतरती है।ये सृष्टि के सृजन के कुदरती नियमानुसार सिद्ध होता है। इस से ये तथ्य भी सिद्ध होता है कि, बुद्ध मत के बुनियादी सिद्धांत सिंधुघाटी के आदधर्म के ही बुनियादी सिद्धांत अपनाए गए हैं।
इस अध्ययन से सिद्ध होता है कि गुरु रविदास जी के दर्शन के सिद्धान्त सिंधुघाटी सभ्यता से मेल खाते हैं, जब कि गुरु रविदास के समय मे सिंधुघाटी सभ्यता का जन्म नहीं हुआ था, यही नहीं सभी मतों ने गुरु रविदास जी के दर्शन की नकल कर के अपने मतों को सुधारा है, गुरु जी के ऐसा चाहूं राज की थियूरी ने कम्युनिज्म को जन्म दिया है, ग्लोबल सरकार की स्थापना की नींव भी उन्होंने डाली, जिस के परिणामस्वरूप ही संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना हुई, ज्योतिर्मंडल सरकार भी एक दिन अवश्य बन ही जाएगी।
रामसिंह आदवंशी।
अध्यक्ष।
विश्व आदधर्म मंडल।
मई 07, 2021।
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