तत्त सिद्धांत।। भाग पाँच।।

।।तत्त सिद्धांत भाग पाँच।।                ।।सोहम।                 इक़ ओंकार -------------------------------------------------- इक़।                          ओंकार ऊर्जा।                         ऊर्जा के तीन हिस्से      ------ ------------------------------------------ उ।                      अ।                    म। जन्म देने वाला।  पालन करने वाला।   संहारक ब्रह्मा।                विष्णु                    महेश इलेक्ट्रान।           न्यूट्रॉन।                प्रोटान ब्रह्मा विष्णु महेश आदि भगवानों को रद्द कर के सिद्ध किया गया है कि ये तीन गुणं (१) सृष्टि की उतपत्ति है (२)उस की पालना करना (३) उस का संहार करना महापुरुषों की ही शक्तियाँ हैं।उपरोक्त भगवान देहधारी और पारब्रह्म की ही रचना है। सृष्टि की हर रचना के बीच वह आप विचर रहा है। ब्रह्मा, विष्णु और महेश के बीच भी वह आप ही विराजमान हैं, फिर पारब्रह्म की अपनी रचना ही उस की बराबरी किस प्रकार कर सकती है? इस कर के ये तीन देहधारी भगवान उस की शक्तियों के मालिक नहीं बन सकते। यही विचार गुरु नानकदेव जी ने जपुजी के बीच निरूपित कर के इक़ ओंकार के सिद्धांत को और परिपक्व और दृढ़ता प्रदान की है। एका माई जुगति बिआहि। तीनी चेले परवान। इकु लाए दी बांणू।। जिव तिस भावै तिवें चलावे। जिव होवे फरमाणू।। उह वेखै उन्हा नदरी ना आवै। बहुता एहू विडाणु ।। आदेसू तिसे आदेसू।। आदि अनीलू अनादि अनाहित। जुग जुग एके वेसू।।३००।। इस तरह इस शलोक के बीच सोहम /इक़ ओंकार से सृष्टि सृजन के संकल्प की प्रौढ़ता हो गई हैं और साथ ही साथ हरि सो हीरा का अर्थ पारब्रह्म, केवल और केवल एक ही है।-- भी दृढ़ हो गया है। रामसिंह आदवंशी।। अध्यक्ष। विश्व आदधर्म मंडल। मई 15, 2021।

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