सर्वश्रेष्ठ महानायक राक्षस कालनेमि।।
।। सर्वश्रेष्ठ महानायक राक्षस कालनेमि।।
रावण एक कुशल शासक था और एक कुशल प्रशासक भी था, एक धर्मात्मा भी था, कुशल नीति निर्धारक भी था, कुशल प्रकांड विद्वान भी था, नारी का सम्मान भी वहुत करता था, इन्हीं योग्यताओं के कारण, उस ने, प्रजा की भलाई और सुरक्षा के लिए, योग्य ही नहीं, बुद्धिमान राक्षस भी सीमाओं के ऊपर नियुक्त किये हुए थे, जिन में एक थे कालनेमि। कालनेमि को राक्षस रावण का विश्वस्त सेवक बताया गया है। एक विद्वान लेखक लिखता है कि, कालनेमि भयंकर मायावी और क्रूर था। इस की प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैली हुई थी। रावण ने इसे एक बहुत ही कठिन कार्य सौंप दिया था। जब राम-रावण युद्ध में लक्ष्मण को शक्ति लग गई थी, तब लक्ष्मण बेहोश हो गया था। तब राम ने, हनुमान को तुरंत संजीवनी लाने के लिए कहा गया था। हनुमान जब द्रोणाचल पर्वत की ओर चल पड़ा तो वीर रावण ने उस के रास्ते मे रूकाबट डालने के लिए वीर कालनेमि नामक राक्षस को भेजा दिया था। राक्षस कालनेमि ने, हनुमान के आने से पूर्व ही अपनी माया से तालाब, मंदिर और सुंदर बगीचा बना लिया था और कालनेमि वहीं एक ऋषि का भेष धारण कर के मार्ग में बैठ गया था। हनुमान जब वहां पंहुच गया, तो उस ने उस स्थान को देख कर जलपान के लिए रुकने का मन बना लिया, वह जैसे जैसे ही तालाब में उतरने लगा, वैसे वैसे ही तालाब में प्रवेश करते करते ही एक मगरमच्छ ने, हनुमान का पैर पकड़ लिया था। हनुमान ने, मगरमच्छ को मार डाला था। उस के बाद, क्रोध की आग में जलते हुए, हनुमान ने, अपनी पूंछ से कालनेमि को जकड़ कर उस का भी वध कर दिया।
अब इस छद्म कथा का, मनोवैज्ञानिक, तर्क के अनुसार विश्लेषण किया जाए कि, क्या कोई बानर, किसी महाबलेश्वर, महाबली, महायोद्धा को, अपनी पूंछ से मार सकता है ? यूरेशियन लेखक लिखता है कि, कालनेमि राक्षस वहुत बड़ा शक्तिशाली था, कालनेमि ने, सुंदर उपवन ही बसा दिया था, तालाब बना दिया था, सुंदर मन्दिर बना दिया था, जिस के बीच वह बैठ गया था। क्या ऐसा संभव हो सकता है कि, कोई क्षणों में ही इतना बड़ा निर्माण कर सकता है ? क्या कोई किसी के मन की बात को पहले ही जान सकता है कि, मेरे तालाब में जलपान करने के लिए, हनुमान उतरेगा और पानी पीते समय ही मगरमच्छ का शिकार बन जाएगा।
वास्तव में, यूरेशियन लेखकों ने, जो अनर्गल विलाप कर के, मूलनिवासी शासकों के विरुद्ध, अपनी षडयंत्रकारी विचारधारा को लिखा हुआ है, उस के बारे में ये तनिक भी आभास नहीं किया था कि, कभी गुलाम भी पढ़ लिख सकेंगे और हमारी बुद्धि के निकले हुए दिवाले का भी पोस्टमार्टम करेंगे। मूलनिवासी लेखकों को, कल्पित साहित्य को, तर्क की कसौटी पर कस कर, लिख कर सत्य और झूठ को उजागर करना चाहिए।
रामसिंह आदवंशी।
अध्यक्ष।
विश्व आदधर्म मंडल।
फरवरी 09, 2021।
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