साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल की अधूरी शिक्षा।
।।साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल की अधूरी शिक्षा।।
ब्राह्मणवाद इतना खतरनाक राक्षस है, जिस का अनुमान, साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी की शिक्षा से लगाया जा सकता है। इन के पिता हरनाम दास अपने बेटे मंगू राम को अंग्रेजी की उच्च शिक्षा दिलाने का खुआब देखा करते थे, वे चाहते थे कि उन का बेटा अंग्रेजी पढ़ लिख कर, समाज का नाम रोशन करे। अछूत समाज को अंग्रेजी की समस्या से मुक्त कराना भी उन का लक्ष्य था, क्योंकि उस समय कोई भी अछूत अंग्रेजी ना तो पढ़ सकता था और ना ही लिख सकता था। अछूतों को अंग्रेजी के पत्र पढ़ने के लिए भी मनुवादियों के पास जा कर जलील होंना पड़ता था। अछूतों को अंग्रेजी के पत्र पढ़ाने के लिए, कई प्रकार की गुलामी करनी पड़ती थी, इसीलिए पिता हरनाम दास जी ने, साहिबे कलाम मंगू राम जी को, होशियार पुर के समीप बिजबाड़ा स्कूल में पढ़ने भेजा। मंगू राम को, पहले तो विद्यालय में प्रवेश ही बड़ी मुश्किल से मिला, जब मिला तो छुआछूत का मॉन्स्टर उन के साथ ही वहां आ गया। टीचर चमार शब्द से ही करंट खाते थे, फिर चमार को 2222WwWwW22WW2W2W22W2WWW2222222WWW222WWW22W2222WW2WW2W2W222Q तो दूर की बात थी। उन्हें मनुवादी वच्चों से दूर बैठाया जाता था, ताकि कहीं उन से छू कर, वह सवर्ण वच्चों को भ्रष्ट ना कर दें, क्योंकि मनुवादी लोग, अछूतों से छू कर अपवित्र हो जाते थे, फिर इन्हें पवित्र होने के लिए, उन्हें हड्ड खाणी गंगा के जल से नहाना पड़ता था। पानी के छींटे लेकर अपने घर में घुसना पड़ता था, इसी कारण उन्हें कक्षा से दूर बैठना पड़ता था। बैठने के लिए, अपने घर से अपना टाट ले जाना पड़ता, गर्मी से बचने के लिए अपना छाता भी घर से ले जाना पड़ता था, पानी पीने के लिए भी घर से ही ले जाना पड़ता था। गर्मी में तो छाते से काम चल जाता था मगर गर्म लू से बचना मुश्किल होता था, सर्दी और वर्षा से बचना तो बड़ा कठिन होता था। मंगू राम जी को कक्षा के कमरे में तो घुसने ही नहीं दिया जाता था, यदि कहीं अंदर घुसने का प्रयास करे तो टीचरों के डंडे की अमानवीय क्रूर यातना झेलनी पड़ती थी।
वर्षा ऋतु के दिन थे। एक दिन बड़े ही जोर का तूफान आया, जिससे पेड़ टूटते जा रहे थे, पानी की बौछारें कमरों के अंदर घुस कर, कमरों में भी जीना मुहाल कर रही थीं। तूफान इतने जोर का था कि, उस की आंधी के साथ साथ प्रलयंकारी वारिस भी होने लगी, जिस के बीच मंगू राम जी बाहर बरामदे में खड़े थे, बिजली की गड़गड़ाहट के भय से और पानी की तीव्र बौछारों से बचने के लिए, जब वे अंदर घुसने का प्रयास करते तो मास्टर पोहलो राम का बेंत उस की हड्डियों को तोडता जा रहा था, बालक मंगू राम को अंदर जाने से, इस प्रकार रोका जा रहा था कि, मानो कोई जहरीला अजगर कमरे में घुस रहा हो। जब तीव्र तूफान के झोंकों से भयभीत बालक मंगू राम कमरे में घुस ही गए, तब तो मास्टर पोहलो राम के प्रलयंकारी डंडे ने, उन के अंग अंग को तोड़ ही दिया, शरीर पर डंडे के निशान बता रहे थे कि, किसी जालिम हैवान ने, मासूम बच्चे को मौत के घाट उतारने का घृणित कार्य किया हो। दूसरे दिन मंगू राम जी, राक्षस पोहलो राम के आतंक के कारण स्कूल नहीं गए और पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी।
पिता हरनाम दास जी की अंग्रेजी पढ़ाने की तमन्ना अधूरी ही रह गई, बालक मंगू राम जी की शिक्षा अधूरी ही रह गई। ऐसे जालिम हैं, ब्राह्मण जिन्हें आदपुरुष का तनिक भी भय नहीं है, जब कि यही लोग धार्मिक क्रिया कलाप करते आए हैं, ज्ञान की बातें करते हैं, कथाओं में भगवान की अपरम्पार शक्ति का बखान करते है, स्वर्ग नरक की बातें करते हैं, दान पुण्य की बातें करते हैं, मगर ये उपदेश केवल औरों को ही देते है, ये तिलकधारी बाहर से धर्म के ठेकेदार हैं, मगर अंदर से हैवान ही हैं। कर्म हर आदमी को उस का फल अवश्य देता है। मंगू राम जी ने गद्दर पार्टी में शामिल हो कर, रास विहारी बोस और लाला हरदयाल के कंधों से कंधा मिला कर, आजादी की लड़ाई लड़ी, जिससे वे अमर हो गए मगर मास्टर पोहलो राम का नाम मिट्टी में मिल गया
है।
रामसिंह आदवंशी।
अध्यक्ष।
विश्व आदधर्म मंडल।
फरवरी 21, 2021।
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