साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल लाहौर कांफ्रेंस में।।
।।साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल लाहौर कांफ्रेंस में।
अछूतों के दुश्मन मोहनदास करमचंद गांधी ने अंग्रेजों को कहा था कि, भारत में कोई अछूत नहीं हैं, केवल छोटे हिन्दू ही हैं, जिन्हें हम जल्दी ही अपने बराबर बना लेंगे, जिस से वे संतुष्ट हो गए थे, कि ये सत्य हो होगा। साहिबे कलाम के ज्ञापनों की गांधी एंड कंपनी ने, मिट्टी पलीत कर दी थी। जब इस षडयंत्र का आदधर्म मंडल के नेताओं को पता चला तो वे सारे सकते में पड़ गए। सभी पांच साल के अथक परिश्रम को मिट्टी में मिलते देख कर, हार मानने लग पड़े थे। ब्राह्मणवाद का मोहरा गांधी भी नहले पर दहला फेंक रहा था। जहां ये वकील अपनी दलीलों से, अंग्रेजों को मूर्ख बना कर, अछूतों के अधिकारों को छीनने की विसात बिछाते जा रहे थे, वहां कम पढ़े लिखे किस प्रकार मुकाबला कर सकते थे, मगर साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी हिम्मत हारने वाले नेता नहीं थे। वे भी अपनी योजनाओं को सफल बनाने में दिन रात लगे रहे। भले ही गांधी ने अंग्रेजों को मूर्ख बना दिया था, भले ही ब्राह्मणों ने तुरुप चाल चल कर, अछूतों को गुलाम बनाने की योजना को सफल बना लिया था, मगर गांधी, नेहरू, बल्लभभाई पटेल, साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी के अंतर्मन को मूर्ख नहीं बना सके, उन के मन में क्या चल रहा है, उसे भी वे समझ नहीं पाए।
साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी ने, डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को, अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिए, अपना वकील नियुक्त कर लिया था। लॉर्ड लोथियन कमेटी के सामने आदधर्म मंडल की गुलामी की सभी समस्याओं, अपनी सभी मांगों को जोरदार तरीके से पलीड करने के लिए डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को बता दीं थीं। आद धर्म मंडल ने, पांच हजार आदि धर्मी सेना को लाल पगड़ियां पहनाईं और गुरु रविदास शक्ति अमर है,अमर है के सलोगन लगाते हुए, लाहौर के लिए कूच कर गए थे। आदधर्म मंडल के जन आंदोलन को देख कर, लोग बड़े हैरान हो रहे थे, क्योंकि भारत के मूलभारतीयों, मूलनिवासियों का ये पहला रोस भरा अक्रामक जन आंदोलन था।
लाहौर असेंबली हाल तक जब ये आंदोलनकारी नारे लगाते हुए पहुँचे, तो असेंबली हाल में बैठा हुआ, लोथियन भयभीत हो कर हाल से बाहर आ गया, कि क्या कहीं कोई विद्रोह तो नहीं हो गया है? लोथियन के भय को डॉक्टर भीमराव अंबेडकर भांप गए और वे भी उन के पीछे पीछे बाहर हाल की गैलरी में आ गए। तुरंत लोथियन ने डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को पूछा, कि ये कौन लोग हैं? तब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने बताया कि, ये वे लोग हैं, जिन्हें गांधी कहता है कि, भारत में अछूत लोग हैं ही नहीं। दिल को धीरज बंधाते हुए लोथियन ने डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को कहा, कि इन के पांच आदमी कांफ्रेंस में बुला लो, बाकियों को छाया में बैठा दो। ऐसा सुन कर, डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने, साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल और उन के महासचिव बीडीओ हजारा सिंह को हाल में आने के लिए कहा, जब साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल असेंबली हाल में पहुँचे, तब लोथियन ने उन्हें बैठने के लिए कुर्सी उपलब्ध करवाई मगर साहिबे कलाम मंगू राम जी ने कुर्सी को सिर पर रख लिया, जिसे देख कर लार्ड लोथियन गुस्से में बोले कि ये कुर्सी आप को बैठने के लिए दी है या, कि सिर पर रखने के लिए। साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल ने, लोथियन को कहा, सर मेरे पास जमीन ही नहीं है, तो मैं कुर्सी कहां रखूं? लार्ड लोथियन, उन की समस्या को समझ गए और उसी दिन, अछूतों को उन की जमीन के मालिक बना गए थे।
रामसिंह आदवंशी।
अध्यक्ष।
विश्व आदधर्म मंडल।
फरवरी 27, 2021।
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